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कंपनी कवर के अलावा व्यक्तिगत हेल्थ बीमा भी रखें
कारोबार डेस्क
Updated Tue, 09 Oct 2012 07:07 PM IST
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बहुत सी कंपनियां अपने कर्मचारियों को हेल्थ कवर की सुविधा उपलब्ध कराती हैं। इसमें कर्मचारियों के साथ-साथ उनके आश्रितों को भी शामिल किया जाता है। इससे सीमित वेतन पाने वालों को स्वास्थ्य खर्चों को लेकर काफी राहत मिलती है।
नौकरीपेशा व्यक्ति को हेल्थ कवर की यह सुविधा ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना के अंतर्गत मुहैया कराई जाती है। आजकल मेडिकल खर्चे इस कदर बढ़ गए हैं कि कई बार कंपनियों की ओर दी जा रही हेल्थ कवर की सुविधा भी जरूरत के समय कम पड़ जाती है। इसके अलावा, अचानक नौकरी छूट जाने या छोड़ने की स्थिति में भी कंपनी की ओर से दिया गया हेल्थ कवर काम नहीं आता है। जबकि, बीमारी कभी भी बताकर नहीं आती। ऐसे में एक सामान्य नौकरीपेशा व्यक्ति को अच्छीखासी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है। यदि पहले से थोड़ा सचेत रहा जाए तो इन परिस्थितियों में भी दिक्कतों से बचा जा सकता है। नौकरीपेशा व्यक्ति को कंपनियों की ओर से दिए गए हेल्थ बीमा कवर के अलावा भी खुद व्यक्तिगत तौर पर हेल्थ बीमा जरूर लेना चाहिए।
अगर अपना हेल्थ बीमा रहा तो कम से कम इस फ्रंट पर निश्चिंतता रहती है। बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय को ध्यान में रखते हुए भी अपना कवर जरूर लेने की सलाह देते हैं। पहला, व्यक्तिगत बीमा में कई बीमा कंपनियां कुछ सालों तक पहले से मौजूद बीमारी को शामिल नहीं करती हैं। अगर, आपके पास लगातार कई सालों से कंपनी का दिया बीमा है फिर भी कंपनियां इसे नहीं मानतीं, वह चाहती हैं कि आपके पास अपना व्यक्तिगत बीमा पिछले सालों से चल रहा हो।
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दूसरा, देरी से व्यक्तिगत हेल्थ कवर लेना महंगा पड़ता है। मान लीजिए कि 50-55 की उम्र में कोई नौकरी बदले और उस समय वह हेल्थ बीमा कराने जाए तो उसे न सिर्फ महंगा प्रीमियम देना होगा बल्कि कई हेल्थ टेस्ट भी कराने होंगे। इन सभी टेस्ट के बाद ही बीमा कंपनी उसे बीमा देगी। तीसरा, नौकरीपेशा लोगों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के लिए अलग से हेल्थ बीमा जरूर कराएं, क्योंकि कई कंपनियां एक निश्चित उम्र के बाद आवेदन स्वीकार नहीं करती हैं। ऐसे में बहुत संभव होगा कि नौकरी छूटने पर आप माता-पिता का हेल्थ कवर ले हीं न पाएं।
फैमिली फ्लोटर का जलवा
ज्यादातर बीमा कंपनियां एक ही बीमा पालिसी के तहत एकल परिवार के सभी सदस्यों को हेल्थ कवर का विकल्प देती हैं। इसे फैमिली फ्लोटर पॉलिसी कहा जाता है। इस तरह की पालिसी में कम प्रीमियम में पूरे परिवार को मेडिकल इंश्योरेंश की सुरक्षा प्राप्त हो जाती है और सबके लिए अलग-अलग पालिसियां लेने का झंझट भी नहीं रह जाता।
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नौकरीपेशा व्यक्ति को हेल्थ कवर की यह सुविधा ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना के अंतर्गत मुहैया कराई जाती है। आजकल मेडिकल खर्चे इस कदर बढ़ गए हैं कि कई बार कंपनियों की ओर दी जा रही हेल्थ कवर की सुविधा भी जरूरत के समय कम पड़ जाती है। इसके अलावा, अचानक नौकरी छूट जाने या छोड़ने की स्थिति में भी कंपनी की ओर से दिया गया हेल्थ कवर काम नहीं आता है। जबकि, बीमारी कभी भी बताकर नहीं आती। ऐसे में एक सामान्य नौकरीपेशा व्यक्ति को अच्छीखासी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है। यदि पहले से थोड़ा सचेत रहा जाए तो इन परिस्थितियों में भी दिक्कतों से बचा जा सकता है। नौकरीपेशा व्यक्ति को कंपनियों की ओर से दिए गए हेल्थ बीमा कवर के अलावा भी खुद व्यक्तिगत तौर पर हेल्थ बीमा जरूर लेना चाहिए।
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अगर अपना हेल्थ बीमा रहा तो कम से कम इस फ्रंट पर निश्चिंतता रहती है। बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय को ध्यान में रखते हुए भी अपना कवर जरूर लेने की सलाह देते हैं। पहला, व्यक्तिगत बीमा में कई बीमा कंपनियां कुछ सालों तक पहले से मौजूद बीमारी को शामिल नहीं करती हैं। अगर, आपके पास लगातार कई सालों से कंपनी का दिया बीमा है फिर भी कंपनियां इसे नहीं मानतीं, वह चाहती हैं कि आपके पास अपना व्यक्तिगत बीमा पिछले सालों से चल रहा हो।
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दूसरा, देरी से व्यक्तिगत हेल्थ कवर लेना महंगा पड़ता है। मान लीजिए कि 50-55 की उम्र में कोई नौकरी बदले और उस समय वह हेल्थ बीमा कराने जाए तो उसे न सिर्फ महंगा प्रीमियम देना होगा बल्कि कई हेल्थ टेस्ट भी कराने होंगे। इन सभी टेस्ट के बाद ही बीमा कंपनी उसे बीमा देगी। तीसरा, नौकरीपेशा लोगों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के लिए अलग से हेल्थ बीमा जरूर कराएं, क्योंकि कई कंपनियां एक निश्चित उम्र के बाद आवेदन स्वीकार नहीं करती हैं। ऐसे में बहुत संभव होगा कि नौकरी छूटने पर आप माता-पिता का हेल्थ कवर ले हीं न पाएं।
फैमिली फ्लोटर का जलवा
ज्यादातर बीमा कंपनियां एक ही बीमा पालिसी के तहत एकल परिवार के सभी सदस्यों को हेल्थ कवर का विकल्प देती हैं। इसे फैमिली फ्लोटर पॉलिसी कहा जाता है। इस तरह की पालिसी में कम प्रीमियम में पूरे परिवार को मेडिकल इंश्योरेंश की सुरक्षा प्राप्त हो जाती है और सबके लिए अलग-अलग पालिसियां लेने का झंझट भी नहीं रह जाता।