किसान बनकर करोड़ों का चूना लगाने वाले लोगों की उड़ेगी नींद
- आयकर विभाग ने विशेष जांच अभियान की पहल की
- किसान बन कर करोड़ों की आमदनी दिखाने वाले लोगों की जल्द ही नींद उड़ने वाली है
विस्तार
किसान बन कर करोड़ों की आमदनी दिखाने वाले लोगों की जल्द ही नींद उड़ने वाली है। आयकर विभाग ने ऐसे लोगों के बारे में विस्तृत छानबीन शुरू कर दी है। फिलहाल विभाग ने ऐसे 444 किसानों की पहचान की है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी जुटायी जाएगी। बाद में इस सूची का दायरा बढ़ भी सकता है।
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड -सीबीडीटी- के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फील्ड आफिस को इस बारे में सिस्टम डाइरेक्टरेट से एक पत्र इसी महीने के पहले सप्ताह जारी कर दिया गया है। विभाग ने असेसमेंट वर्ष 2007-08 से 2015-16 के बीच खेती से करोड़ों रुपये की आमदनी दिखा कर जिन्होंने रिटर्न दाखिल किया है, उनमें से 444 लोगों को छांटा गया है। उनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है।
विभाग इस पक्ष को भी देखेगा कि कहीं गलती से तो कोई गलत इंट्री तो नहीं कर दिया गया है। यदि ऐसा है तो गलती सुधारी जाएगी। ये मामले दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, भोपाल, जयपुर, पुणे, गुवाहाटी, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई क्षेत्र के हैं। अधिकारी किन चीजों पर जांच फोकस करेंगे, इस सवाल पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसानों से खाद-बीज की खरीद से लेकर पैदावार व मंडी का रिकॉर्ड भी तलब किया जा सकता है।
किसान की जिस जगह जमीन है, उसके अगल-बगल खेत वाले किसानों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि पता चल सके कि उनकी कितनी आमदनी है और उस खेत में क्या बोया जाता है। बताया जाता है कि इस तथाकथित बड़े किसानों की सूची में बड़े कारोबारी, प्रभावी राजनेता और अफसर तक शामिल हैं। जांच के दौरान इन सभी का छह साल का रिकॉर्ड देखा जाएगा।
खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर कोई आयकर नहीं लगता है
उल्लेखनीय है कि खेती-बाड़ी से होने वाली आमदनी पर कोई आयकर नहीं लगता है। साथ ही खुद को किसान साबित करने के लिए कोई विशेष पैमाना भी नहीं है। इसका लाभ उठा कर तथाकथित बड़े किसान वर्षों से खेती को फायदे का धंधा दिखा कर अपनी बैलेंस शीट में करोड़ों रुपए की आय दिखा रहे हैं।
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि ऐसे किसानों की आमदनी सूखा, बाढ़ एवं अन्य विपदा केसमय भी नहीं घटती है, बल्कि बढ़ जाती है। विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एक कारोबारी ने छत्तीसगढ़ में 100 एकड़ बंजर जमीन खरीद रखी थी और उसमें उसे हर साल करोड़ों की आमदनी हो रही थी।
जब जांच हुई तो पता चला कि इसके सहारे काला धन सफेद किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जांच केदौरान विशेष सावधानी बरतें क्योंकि इसमें मिली सूचना को ही पटना उच्च न्यायालय में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि करोड़पति किसानों से संबंधित एक पीआईएल पटना उच्च न्यायालय में लंबित है।