बीमाधारकों के लिए खुशखबरी, अब इन सब बीमारियों पर भी मिलेगा कवर
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इंश्योरेंस रेग्यूलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने बीमाधारकों को बड़ा फायदा दिया है। नई गाइडलाइन के तहत बीमा कंपनियां अब वर्क प्लेस पर जोखिम भरी गतिविधियों और आर्टिफिशल लाइफ मेनटेनेंस से होने वाली बीमारियों, मानसिक रोगों, उम्र संबंधी बीमारी और जन्मजात बीमारी को हेल्थ कवर से बाहर नहीं कर पाएंगी।
फैक्ट्री कर्मचारियों को मिली राहत
इस संदर्भ में इरडा ने कहा कि अब से कैटरैक्ट सर्जरी, नी-कैप रिप्लेसमेंट, अल्जाइमर और पार्किंसन्स जैसी उम्र संबंधी समस्याएं भी कवर होंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई हैं। खतरनाक रसायन के साथ काम करने वाले लोगों की स्वास्थ्य पर दीर्घ अवधि में बुरा असर होता है इसलिए अब से उनकी सांस और त्वचा संबंधी इलाज से इनकार नहीं किया जा सकेगा।
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अगर किसी कर्मचारी का एक कंपनी से दूसरे में ट्रांसफर होता है और उसने वेटिंग पीरियड की जरूरतों का एक हिस्सा पूरा कर लिया है, तो नई कंपनी द्वारा कर्मचारी पर सिर्फ अनएक्सफायर्ड वेटिंग पीरियड ही लागू होगा।
अगर बीमा कंपनी एपिलेप्सी, किडनी, एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी कवर नहीं करना चाहती है, तो इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल होगा। ऐसी स्थिति में 30 दिन से एक साल तक का एक वेटिंग पीरियड होगा, जिसके बाद फिर से कवर शुरू होगा।
इस बात का रखें ध्यान
इस संदर्भ में आइडियर इंस्योरेंस ब्रोकर्स के फाउंडर राहुल अग्रवाल ने कहा कि, 'यह निश्चित रूप से लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर है, जिन्हें अब तक कवर नहीं मिल पाता था। लेकिन बीमाधारकों को एक बात का खास ध्यान रखना होगा। उनको सतर्क रहना होगा क्योंकि नई गाइडलाइन के बाद प्रीमियम में काफी वृद्धि हो सकती है।
इसलिए लिया फैसला
पिछले साल नवंबर में वर्किंग कमिटी ने इरडा को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बीमा कंपनियां अल्जाइमर, पार्किंसन्स, एचआईवी या एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों को कवर से बाहर नहीं कर सकतीं। इसलिए इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए इरडा ने ये फैसला लिया है।