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'ईपीएफ पर टैक्स' का प्रस्ताव वापस लेगी सरकार!

Wed, 02 Mar 2016 09:12 AM IST
Updated Wed, 02 Mar 2016 09:12 AM IST
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Govt to rollback tax on EPF!

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से निकासी के 60 फीसदी हिस्से पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव के चौतरफा विरोध के बाद सरकार ने वादा किया है कि वह इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग पर विचार करेगी। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) पर कर में छूट जारी रहेगी। सोमवार को पेश आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रस्ताव किया था कि ईपीएफ से निकाली गई राशि के 60 प्रतिशत हिस्से पर कर लगाया जाएगा।

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विपक्षी पार्टियों समेत ट्रेड यूनियनों ने भी इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि सरकार का यह कदम मजदूर विरोधी और स्पष्ट रूप से दोहरे कराधान वाला है। बजट में किए गए इस प्रस्ताव के संदर्भ में राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि पहली अप्रैल के बाद ईपीएफ में किए गए योगदान के 60 फीसदी ब्याज पर टैक्स लगाया जाएगा और योगदान की मूल राशि पर आयकर की छूट जारी रहेगी। हालांकि, सरकार ने मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी किया जिसमें केवल ब्याज पर कर लगाए जाने का कहीं जिक्र नहीं था।
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इसमें दावा किया गया है कि इस नए टैक्स प्रस्ताव का लक्ष्य केवल उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारी हैं जिनकी संख्या 3.7 करोड़ ईपीएफ सदस्यों में लगभग 70 लाख मात्र है। तीन करोड़ लोग सांविधिक वेतन सीमा 15 हजार प्रति माह के दायरे में आते हैं इसलिए वे प्रभावित नहीं होंगे।

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वित्त मंत्री ने खुल कर नहीं दिया जवाब

Govt to rollback tax on EPF!

वित्त मंत्री अरुण जेटली से जब अमर उजाला ने इस बारे में जानना चाहा तो कुछ बोलने की बजाय सिर हिला कर जवाब देते रहे। हालांकि, इस मामले पर वित्त मंत्रालय की तरफ से एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है जिसमें बताया गया है कि बजट में ईपीएफ पर टैक्स लगाने का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पैसा निकालने की बजाय किसी पेंशन योजना में निवेश के लिए प्रेरित करना है।

इस उद्देश्य के लिए सरकार ने घोषणा की है कि ईपीएफ के 40 फीसदी कोष की निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे ऐसी उम्मीद की जा रही है कि निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद बची हुई 60 फीसदी राशि किसी एन्युटी या रिटायरमेंट योजना में निवेश निवेश करेंगे।

सरकार का कहना है कि अगर एन्युटी में निवेश करने वाले कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी को यह राशि बगैर टैक्स काटे मिलेगी।

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