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साधारण बीमा के नियमों में बदलाव करेगी सरकार
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Oct 2012 06:20 PM IST
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हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस, फायर इंश्योरेंस जैसे साधारण बीमा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार जल्द ही नियमों में बदलाव कर सकती है। इसके तहत वित्त मंत्रालय और इरडा कई कदम उठाने की तैयारी कर रहे है। पहुंच बढ़ाने के लिए कदम क्या हो सकते हैं, उसे कैसे लागू किया जाय इस पर वित्त मंत्रालय ने साधारण बीमा कंपनियों से 26 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं।
सूत्रों के अनुसार इस संबंध में साधारण बीमा कंपनियां एक विस्तृत रुप रेखा तैयार कर वित्त मंत्रालय को पेश करेंगी। जिसके बाद वित्त मंत्रालय और बीमा विनियामक प्राधिकरण (इरडा) नई गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। इसके पहले सोमवार को वित्त मंत्री के साथ साधारण बीमा कंपनियों के साथ हुई बैठक मे हेल्थ इंश्योरेंस को प्रभावी बनाने पर प्रमुख जोर रहा था। इसके तहत ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस प्रणाली को बेहतर करने और ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम का मूल्य तय करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने की बात कही गई है।
साधारण बीमा कारोबार के तहत आने वाला प्रीमियम सकल घरेलू उत्पाद का के वल 0.71 फीसदी है जो कि अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में कहीं कम है। कुल साधारण बीमा के कारोबार में 41 फीसदी हिस्सेदारी मोटर इंश्योरेंस की है। अपने प्रस्ताव में कंपनियां थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के जोखिम को देखते हुए इसके लिए प्रीमियम खुद तय करने, क्लेम सेटलमेंट के लिए समय सीमा तय करने का रोडमैप दे सकती हैं। कंपनियां इन सबके अलावा कर सुधारों की भी मांग कर रही है।
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सूत्रों के अनुसार इस संबंध में साधारण बीमा कंपनियां एक विस्तृत रुप रेखा तैयार कर वित्त मंत्रालय को पेश करेंगी। जिसके बाद वित्त मंत्रालय और बीमा विनियामक प्राधिकरण (इरडा) नई गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। इसके पहले सोमवार को वित्त मंत्री के साथ साधारण बीमा कंपनियों के साथ हुई बैठक मे हेल्थ इंश्योरेंस को प्रभावी बनाने पर प्रमुख जोर रहा था। इसके तहत ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस प्रणाली को बेहतर करने और ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम का मूल्य तय करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने की बात कही गई है।
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साधारण बीमा कारोबार के तहत आने वाला प्रीमियम सकल घरेलू उत्पाद का के वल 0.71 फीसदी है जो कि अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में कहीं कम है। कुल साधारण बीमा के कारोबार में 41 फीसदी हिस्सेदारी मोटर इंश्योरेंस की है। अपने प्रस्ताव में कंपनियां थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के जोखिम को देखते हुए इसके लिए प्रीमियम खुद तय करने, क्लेम सेटलमेंट के लिए समय सीमा तय करने का रोडमैप दे सकती हैं। कंपनियां इन सबके अलावा कर सुधारों की भी मांग कर रही है।
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