EPFO से जुड़े लंबित मामलों की होगी ऑनलाइन सुनवाई, हजारों उपभोक्ताओं को फायदा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार कोरोना संकट के बीच भविष्य निधि संगठन से जुड़े कर्मचारियों को राहत देने पर विचार कर रही है। देश में ईपीएफओ से जुड़े हजारों मामले लंबित हैं, कोरोना महामारी की वजह से इन मामलों की नियमित सुनवाई नहीं हो रही है पीएफ और ईपीएफ निकासी जैसे कामों में देरी हो रही है।
इन लंबित मामलों की नियमित सुनवाई के लिए सरकार मामलों की ऑनलाइन सुनवाई कराने पर विचार कर रही है, इसके लिए ई-कोर्ट लगाए जाएंगे। हरियाणा के करनाल में ई-प्रोसेसिंग के लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी गई है। अगर श्रम मंत्रालय से जल्द मंजूरी मिल गई तो अनलॉक के दौरान ही ईपीएफ के हजारों कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ मिल सकता है।
कोर्ट में तारीख ना मिलने या फिर अधिकारियों के पास समय की कमी होने की वजह से मामले अटक जाते हैं उनकी सुनवाई नहीं हो पाती लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ई-सुनवाई के सार्थक परिणाम हैं और इससे ग्राहकों को फायदा मिलेगा। देश में साल 2010 के बाद से ईपीएफ के अभीतक 68,000 मामले लंबित हैं।
कोरोना काल में ग्राहकों को मिलेगा इस सुविधा का फायदा
कोरोना के बीच सुनवाई के लिए ईपीएफओ कोर्ट नहीं लग रहा है, जिसकी वजह से लंबित मामले और बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर दो साल पहले तैयार हो गया था लेकिन प्रभावी नहीं था। ई-कोर्ट की वजह से सुनवाई के लिए किसी को कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कंपनी के वकील, विभाग के निरीक्षक और अन्य सभी अधिकारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से ही सुनवाई करेंगे। करनाल में टेस्टिग के बाद उम्मीद है जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है।
ईपाएफओ कोर्ट में कैसे मामले सामने आते हैं?
-
7ए- इसके तहत उन कंपनियों पर मामले दर्ज किए जाते हैं, जिसने कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं किया। सुनवाई के अगर कंपनी दोषी पाई जाती है तो कंपनी पर कार्रवाई की जाती है।
-
14बी और 7क्यू- उन कंपनियों पर मामला दर्ज किया जाता है, जो कि समय पर कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करतीं। इस मामले में दोषी पाए जाने पर कंपनी का खाता भी सीज कर आगे की कार्रवाई करने का अधिकार ईपीएफओ के पास है।