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टेंशन नहीं लेनी है तो अपने पैसे को यहां करें निवेश
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 21 Oct 2013 11:20 AM IST
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कमाना जरूरी है लेकिन उससे भी जरूरी है कमाई के कुछ भाग को भविष्य के लिए निवेश करना। निवेश की दुनिया बहुत बड़ी है। आम लोगों तक इसकी पूरी जानकारी पहुंच भी नहीं पाती।
निवेश के विकल्पों को कई भागों में बांटा जा सकता है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह जानना है कि किस तरह के निवेश सुरक्षित श्रेणी में हैं और कौन से कम सुरक्षित। मेहनत की कमाई अगर निवेश की असुरक्षित दुनिया में पहुंच गई, तो फायदा भूल जाइए, मूल कमाई भी हवा हो सकती है। आज के इस आलेख में हम बात करेंगे आम लोगों की पहुंच वाले निवेश के सुरक्षित विकल्पों के बारे में।
प्रॉपर्टी में निवेश
कहा जाता है कि प्रापर्टी में किया गया निवेश कभी घाटा नहीं देता। कुछ खास बातों का ध्यान दिया जाए, तो यह बात काफी हद तक सही भी साबित होती है।
आपके पास अगर रहने के लिए मकान है और लंबी अवधि के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, तो मकान के बजाय प्लॉट का विकल्प चुनें। विशेष ध्यान यह रहे कि प्लाट के कागजात ठीक हों, मालिकाना हक और कब्जे को लेकर कोई समस्या न हो। प्लॉट अगर किसी सरकारी प्राधिकरण का हो तो सबसे अच्छा।
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किसी भी वैसे शहर जहां आने वाले सालों में कारखानों या किसी अन्य कारणों से विकास की संभावना हो, वहां शहर से थोड़ी दूर पर लिया गया प्लॉट लंबी अवधि में हर तरह से शानदार साबित होता है। प्रॉपर्टी में सुरक्षित निवेश का मूलमंत्र है प्रॉपर्टी के चयन में सावधानी।
बांड में निवेश
ग्लोबल और घरेलू दोनों ही स्तरों पर आर्थिक व कारोबारी हालात अस्थिरता भरे होने के चलते निवेश करते वक्त अपनी पूंजी की सुरक्षा पर जोर देना आज के दौर में सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। इक्विटी बाजार में जारी उठा-पटक की स्थिति अभी कई महीनों तक जारी रहने के आसार है क्योंकि अमेरिका में शटडाउन संकट खत्म हो जाने के बावजूद फेडरल रिजर्व की बांड खरीद (क्यूई-3) पर अनिश्चितता बरकरार है।
फेड अगर बांड खरीद बंद करने का फैसला लेता है, तो यह इक्विटी बाजारों को बुरी तरह प्रभावित करेगा। ऐसे में इक्विटी में निवेश से जुड़े जोखिम काफी बढ़ गए हैं। इससे लिए कंपनियों के नतीजों व आंकड़ों के साथ-साथ घरेलू व ग्लोबल अर्थव्यवस्था के आंकड़ों पर नजर रखना भी जरूरी हो गया है।
कॉरपोरेट सौदों, समझौतों, घटनाओं और घोषणाओं आदि को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। निर्यात से जुड़े सेक्टर में निवेश करने वालों को मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति के प्रति भी सचेत रहने की जरूरत है। इक्विटी की ही तरह बांड में निवेश में भी सतर्कता जरूरी हो गई है क्योंकि महंगाई, औद्योगिक विकास दर (आईआईपी) और आर्थिक विकास दर के आंकड़े इसे प्रभावित करते हैं।
ऐसे में कम से कम तीन-चार साल की अवधि का लक्ष्य लेकर इंटरमीडिएट बांड में निवेश ज्यादा मुफीद लगता है। सोने को आमतौर पर हमारे देश में सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, पर मौजूदा हालात में सोने में निवेश भी जोखिम से मुक्त नहीं कहा जा सकता।
चालू खाते के घाटे (कैड) को काबू में लाने के लिए सोने के आयात व इसके निवेश पर सरकार व रिजर्व बैंक की ओर से की जा रही सख्ती का असर इस पर साफ नजर आ रहा है, जोकि आगे भी बना रह सकता है। इसके अलावा ग्लोबल बाजार में अनिश्चय की स्थिति के चलते भी आज के दौर में सोने में निवेश के प्रति निश्चिंत नहीं रहा जा सकता।
डाकघर सावधि जमा खाता योजना
डाकघर सावधि जमा खाता बैंक के एफडी की तरह होता है। डाकघर सावधि जमा खाते को किसी भी डाकघर में न्यूनतम 200 रुपये से खोला जा सकता है। इसमें निवेश की अधिकतम सीमा नहीं है। यह सिंगल और ज्वाइंट अकाउंट दोनों हो सकता है। इसमें परिपक्वता अवधि 1, 2, 3 और 5 साल होती है। फिलहाल इस पर खाताधारक को अलग-अलग परिपक्वता के मुताबिक 8.20 फीसदी से 8.40 फीसदी ब्याज मिल रहा है। पांच साल की परिपक्वता वाले जमा पर खाताधारक को आयकर कानून की धारा 80सी के तहत कर में कटौती का लाभ भी मिलता है।
राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी)
इसे खासकर सरकारी कर्मचारियों, बिजनेसमैन और कर चुकाने वाले अन्य वेतनभोगी वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें निवेश की अधिकतम सीमा नहीं है। यह दो तरह का होता है, टाइप- 1 (VIII इश्यू) और टाइप- 2 (IX इश्यू), टाइप- 1 के अंतर्गत धारा 80सी के तहत सालाना 1 लाख रुपये तक कर में कटौती का लाभ मिलता है। इस पर ब्याज दर फिलहाल 8.50 फीसदी है। इसकी परिपक्वता अवधि पांच साल है। इस योजना में ट्रस्ट और एचयूएफ निवेश नहीं कर सकते हैं। टाइप- 2 में भी निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इसकी परिपक्वता 10 साल है। इसके अंतर्गत 8.80 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। दोनों ही स्थिति में न्यूनतम 100 रुपये का निवेश होना चाहिए। निवेश 100, 500, 1,000, 5,000 और 10,000 के गुणक में होना चाहिए।
पोस्ट ऑफिस की सारी जमा योजनाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। देश का कोई भी नागरिक चैन से यहां अपनी रकम जमा कर सकता है। जमाकर्ता को नॉमिनेशन यानी नामित की भी सुविधा प्राप्त है और वह जब चाहे नामित के नाम में परिवर्तन कर सकता है। ग्रामीण भारत में पोस्ट ऑफिस की छवि एक तरह से निवेश के मंदिर के रूप में बनी रही है।
सुरक्षित निवेश के लिहाज से पोस्ट ऑफिस में कई विकल्प हैं जिनमें बचत जमा खाता, रेकरिंग खाता, मासिक आय योजना (एमआईएस), पीपीएफ, सावधि जमा, सीनियर सिटीजन बचत योजना और राष्ट्रीय बचत पत्र शामिल है। इसके अलावा, पोस्ट ऑफिस दो तरह की जीवन बीमा - पोस्टल लाइफ और ग्रामीण पोस्टल लाइफ का भी पावरफुल विकल्प देता है।
डाकघर बचत खाता
यह बैंक के बचत खाते की तरह ही होता है। देश के किसी भी डाकघर में न्यूनतम 50 रुपये से यह खाता खोला जा सकता है। यह सिंगल और संयुक्त (ज्वाइंट) अकाउंट दोनों तरह से खोला सकता है। इस अकाउंट पर खाताधारक को सालाना 4 फीसदी ब्याज मिलता है, जो पूरी तरह करमुक्त है। इसमें खाताधारक को चैक व नामिनी की सुविधा भी मिलती है।
इस बारे में बस इतना कहा जा सकता है कि आपकी जमा रकम के साथ-साथ इसपर मिलने वाला रिटर्न भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। निवेश की मियाद पूरी होने पर निवेशकों के हाथ बिना किसी परेशानी के रकम मय लाभ मिल जाए। बाजार में इस तरह के सुरक्षित निवेश के नाम वाली कई योजनाएं आती हैं जिनको इसके एजेंट सुरक्षित बताते हैं, लेकिन निवेशकों को इस बात की पुख्ता जांच कर लेनी होगी क्या वे सचमुच सुरक्षित निवेश की श्रेणी में हैं।
सरकारी एजेंसियों की निवेश योजनाएं अमूमन सुरक्षित मानी जाती हैं। निवेश के एक हिस्से को थोड़ी जोखिम वाली श्रेणी में भी जमा किया जा सकता है, लेकिन यह व्यक्ति की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा। आमतौर पर कम उम्र के लोग जिनकी मूल जिम्मेदारियों में अभी समय है, वे निवेश के एक हिस्से को जोखिम वाली श्रेणी में डाल सकते हैं।
मासिक आय खाता योजना
डाकघर की मासिक आय खाता योजना (एमआईएस) खाते की परिपक्वता अवधि पांच साल होती है। इसमें खाताधारक को एकमुश्त जमा पर हर माह ब्याज मिलता है। अभी इस पर 8.40 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। यह खुद ब खुद बचत खाते में जमा हो जाता है।
सिंगल या ज्वाइंट अकाउंट दोनों तरह से इसे किसी भी डाकघर में खोला जा सकता है। सिंगल अकाउंट के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम 4.5 लाख रुपये है। जबकि, ज्वाइंट अकाउंट में निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम सीमा 9 लाख रुपये है।
डाकघर रेकरिंग जमा खाता योजना
आरडी खाता सिंगल या ज्वाइंट अकाउंट दोनों हो सकता है। इस खाते की परिपक्वता पांच साल होती है। प्रति माह इसमें 10 रुपये का निवेश जरूरी है। इस पर खाताधारक को 8.30 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। एक साल के बाद खाताधारक को 50 फीसदी तक की रकम निकालने की अनुमति है। तीन साल के बाद खाताधारक परिपक्वता से पहले भी इस खाते को बंद कर सकता है। इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)
पीपीएफ अकाउंट में एक वित्तवर्ष में अधिकतम एक लाख रुपये तक के निवेश पर कर में कटौती का लाभ मिलता है। इसे एकमुश्त या 12 किस्तों में जमा कर सकते हैं। पीपीएफ अकाउंट नाबालिग और बालिग दोनों ही व्यक्ति का हो सकता है। इसकी परिपक्वता अवधि 15 साल है। प्रत्येक वित्तवर्ष में न्यूनतम 500 रुपये का निवेश जरूरी है। इस पर 8.70 फीसदी ब्याज मिलता है। पीपीएफ खाते पर खाताधारक को कम ब्याज पर लोन की भी सुविधा है।
सभी बैंकों में निवेश के कई सारे विकल्प हैं जिनमें से सबसे लोकप्रिय सावधि जमा योजनाएं हैं। वरिष्ठ नागरिकों को बैंक जमा पर सामान्य से अधिक ब्याज देते हैं। बैंकों की सावधि जमा योजनाएं यानी एफडी सभी तरह की मियाद वाली होती हैं।
अधिकांश बैंक कुछ खास तरह के मिक्स्ड बचत खाते खोलते हैं। इन खातों में रकम एक निश्चित सीमा से ऊपर जाने पर अतिरिक्त राशि अपने आप एफडी में चली जाती है, जिसपर बैंक अधिक ब्याज देते हैं। जरूरत के समय इनसे रकम निकालने में कोई परेशानी भी नहीं होती। कुछ सरकारी बैंक नामित हैं जहां पीपीएफ खाते भी खोले जा सकते हैं। बैंकों की सावधि जमा योजनाओं की रकम का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित निवेश में किए जाने के कारण इनमें पूंजी की सुरक्षा को लेकर भी कोई संदेह या सवाल नहीं है।
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निवेश के विकल्पों को कई भागों में बांटा जा सकता है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह जानना है कि किस तरह के निवेश सुरक्षित श्रेणी में हैं और कौन से कम सुरक्षित। मेहनत की कमाई अगर निवेश की असुरक्षित दुनिया में पहुंच गई, तो फायदा भूल जाइए, मूल कमाई भी हवा हो सकती है। आज के इस आलेख में हम बात करेंगे आम लोगों की पहुंच वाले निवेश के सुरक्षित विकल्पों के बारे में।
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प्रॉपर्टी में निवेश
कहा जाता है कि प्रापर्टी में किया गया निवेश कभी घाटा नहीं देता। कुछ खास बातों का ध्यान दिया जाए, तो यह बात काफी हद तक सही भी साबित होती है।
आपके पास अगर रहने के लिए मकान है और लंबी अवधि के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं, तो मकान के बजाय प्लॉट का विकल्प चुनें। विशेष ध्यान यह रहे कि प्लाट के कागजात ठीक हों, मालिकाना हक और कब्जे को लेकर कोई समस्या न हो। प्लॉट अगर किसी सरकारी प्राधिकरण का हो तो सबसे अच्छा।
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किसी भी वैसे शहर जहां आने वाले सालों में कारखानों या किसी अन्य कारणों से विकास की संभावना हो, वहां शहर से थोड़ी दूर पर लिया गया प्लॉट लंबी अवधि में हर तरह से शानदार साबित होता है। प्रॉपर्टी में सुरक्षित निवेश का मूलमंत्र है प्रॉपर्टी के चयन में सावधानी।
बांड में निवेश
ग्लोबल और घरेलू दोनों ही स्तरों पर आर्थिक व कारोबारी हालात अस्थिरता भरे होने के चलते निवेश करते वक्त अपनी पूंजी की सुरक्षा पर जोर देना आज के दौर में सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। इक्विटी बाजार में जारी उठा-पटक की स्थिति अभी कई महीनों तक जारी रहने के आसार है क्योंकि अमेरिका में शटडाउन संकट खत्म हो जाने के बावजूद फेडरल रिजर्व की बांड खरीद (क्यूई-3) पर अनिश्चितता बरकरार है।
फेड अगर बांड खरीद बंद करने का फैसला लेता है, तो यह इक्विटी बाजारों को बुरी तरह प्रभावित करेगा। ऐसे में इक्विटी में निवेश से जुड़े जोखिम काफी बढ़ गए हैं। इससे लिए कंपनियों के नतीजों व आंकड़ों के साथ-साथ घरेलू व ग्लोबल अर्थव्यवस्था के आंकड़ों पर नजर रखना भी जरूरी हो गया है।
कॉरपोरेट सौदों, समझौतों, घटनाओं और घोषणाओं आदि को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। निर्यात से जुड़े सेक्टर में निवेश करने वालों को मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति के प्रति भी सचेत रहने की जरूरत है। इक्विटी की ही तरह बांड में निवेश में भी सतर्कता जरूरी हो गई है क्योंकि महंगाई, औद्योगिक विकास दर (आईआईपी) और आर्थिक विकास दर के आंकड़े इसे प्रभावित करते हैं।
ऐसे में कम से कम तीन-चार साल की अवधि का लक्ष्य लेकर इंटरमीडिएट बांड में निवेश ज्यादा मुफीद लगता है। सोने को आमतौर पर हमारे देश में सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, पर मौजूदा हालात में सोने में निवेश भी जोखिम से मुक्त नहीं कहा जा सकता।
चालू खाते के घाटे (कैड) को काबू में लाने के लिए सोने के आयात व इसके निवेश पर सरकार व रिजर्व बैंक की ओर से की जा रही सख्ती का असर इस पर साफ नजर आ रहा है, जोकि आगे भी बना रह सकता है। इसके अलावा ग्लोबल बाजार में अनिश्चय की स्थिति के चलते भी आज के दौर में सोने में निवेश के प्रति निश्चिंत नहीं रहा जा सकता।
डाकघर सावधि जमा खाता योजना
डाकघर सावधि जमा खाता बैंक के एफडी की तरह होता है। डाकघर सावधि जमा खाते को किसी भी डाकघर में न्यूनतम 200 रुपये से खोला जा सकता है। इसमें निवेश की अधिकतम सीमा नहीं है। यह सिंगल और ज्वाइंट अकाउंट दोनों हो सकता है। इसमें परिपक्वता अवधि 1, 2, 3 और 5 साल होती है। फिलहाल इस पर खाताधारक को अलग-अलग परिपक्वता के मुताबिक 8.20 फीसदी से 8.40 फीसदी ब्याज मिल रहा है। पांच साल की परिपक्वता वाले जमा पर खाताधारक को आयकर कानून की धारा 80सी के तहत कर में कटौती का लाभ भी मिलता है।
राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी)
इसे खासकर सरकारी कर्मचारियों, बिजनेसमैन और कर चुकाने वाले अन्य वेतनभोगी वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें निवेश की अधिकतम सीमा नहीं है। यह दो तरह का होता है, टाइप- 1 (VIII इश्यू) और टाइप- 2 (IX इश्यू), टाइप- 1 के अंतर्गत धारा 80सी के तहत सालाना 1 लाख रुपये तक कर में कटौती का लाभ मिलता है। इस पर ब्याज दर फिलहाल 8.50 फीसदी है। इसकी परिपक्वता अवधि पांच साल है। इस योजना में ट्रस्ट और एचयूएफ निवेश नहीं कर सकते हैं। टाइप- 2 में भी निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। इसकी परिपक्वता 10 साल है। इसके अंतर्गत 8.80 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। दोनों ही स्थिति में न्यूनतम 100 रुपये का निवेश होना चाहिए। निवेश 100, 500, 1,000, 5,000 और 10,000 के गुणक में होना चाहिए।
पोस्ट ऑफिस की सारी जमा योजनाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। देश का कोई भी नागरिक चैन से यहां अपनी रकम जमा कर सकता है। जमाकर्ता को नॉमिनेशन यानी नामित की भी सुविधा प्राप्त है और वह जब चाहे नामित के नाम में परिवर्तन कर सकता है। ग्रामीण भारत में पोस्ट ऑफिस की छवि एक तरह से निवेश के मंदिर के रूप में बनी रही है।
सुरक्षित निवेश के लिहाज से पोस्ट ऑफिस में कई विकल्प हैं जिनमें बचत जमा खाता, रेकरिंग खाता, मासिक आय योजना (एमआईएस), पीपीएफ, सावधि जमा, सीनियर सिटीजन बचत योजना और राष्ट्रीय बचत पत्र शामिल है। इसके अलावा, पोस्ट ऑफिस दो तरह की जीवन बीमा - पोस्टल लाइफ और ग्रामीण पोस्टल लाइफ का भी पावरफुल विकल्प देता है।
डाकघर बचत खाता
यह बैंक के बचत खाते की तरह ही होता है। देश के किसी भी डाकघर में न्यूनतम 50 रुपये से यह खाता खोला जा सकता है। यह सिंगल और संयुक्त (ज्वाइंट) अकाउंट दोनों तरह से खोला सकता है। इस अकाउंट पर खाताधारक को सालाना 4 फीसदी ब्याज मिलता है, जो पूरी तरह करमुक्त है। इसमें खाताधारक को चैक व नामिनी की सुविधा भी मिलती है।
इस बारे में बस इतना कहा जा सकता है कि आपकी जमा रकम के साथ-साथ इसपर मिलने वाला रिटर्न भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। निवेश की मियाद पूरी होने पर निवेशकों के हाथ बिना किसी परेशानी के रकम मय लाभ मिल जाए। बाजार में इस तरह के सुरक्षित निवेश के नाम वाली कई योजनाएं आती हैं जिनको इसके एजेंट सुरक्षित बताते हैं, लेकिन निवेशकों को इस बात की पुख्ता जांच कर लेनी होगी क्या वे सचमुच सुरक्षित निवेश की श्रेणी में हैं।
सरकारी एजेंसियों की निवेश योजनाएं अमूमन सुरक्षित मानी जाती हैं। निवेश के एक हिस्से को थोड़ी जोखिम वाली श्रेणी में भी जमा किया जा सकता है, लेकिन यह व्यक्ति की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा। आमतौर पर कम उम्र के लोग जिनकी मूल जिम्मेदारियों में अभी समय है, वे निवेश के एक हिस्से को जोखिम वाली श्रेणी में डाल सकते हैं।
मासिक आय खाता योजना
डाकघर की मासिक आय खाता योजना (एमआईएस) खाते की परिपक्वता अवधि पांच साल होती है। इसमें खाताधारक को एकमुश्त जमा पर हर माह ब्याज मिलता है। अभी इस पर 8.40 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। यह खुद ब खुद बचत खाते में जमा हो जाता है।
सिंगल या ज्वाइंट अकाउंट दोनों तरह से इसे किसी भी डाकघर में खोला जा सकता है। सिंगल अकाउंट के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम 4.5 लाख रुपये है। जबकि, ज्वाइंट अकाउंट में निवेश की न्यूनतम सीमा 1,500 रुपये और अधिकतम सीमा 9 लाख रुपये है।
डाकघर रेकरिंग जमा खाता योजना
आरडी खाता सिंगल या ज्वाइंट अकाउंट दोनों हो सकता है। इस खाते की परिपक्वता पांच साल होती है। प्रति माह इसमें 10 रुपये का निवेश जरूरी है। इस पर खाताधारक को 8.30 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। एक साल के बाद खाताधारक को 50 फीसदी तक की रकम निकालने की अनुमति है। तीन साल के बाद खाताधारक परिपक्वता से पहले भी इस खाते को बंद कर सकता है। इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)
पीपीएफ अकाउंट में एक वित्तवर्ष में अधिकतम एक लाख रुपये तक के निवेश पर कर में कटौती का लाभ मिलता है। इसे एकमुश्त या 12 किस्तों में जमा कर सकते हैं। पीपीएफ अकाउंट नाबालिग और बालिग दोनों ही व्यक्ति का हो सकता है। इसकी परिपक्वता अवधि 15 साल है। प्रत्येक वित्तवर्ष में न्यूनतम 500 रुपये का निवेश जरूरी है। इस पर 8.70 फीसदी ब्याज मिलता है। पीपीएफ खाते पर खाताधारक को कम ब्याज पर लोन की भी सुविधा है।
सभी बैंकों में निवेश के कई सारे विकल्प हैं जिनमें से सबसे लोकप्रिय सावधि जमा योजनाएं हैं। वरिष्ठ नागरिकों को बैंक जमा पर सामान्य से अधिक ब्याज देते हैं। बैंकों की सावधि जमा योजनाएं यानी एफडी सभी तरह की मियाद वाली होती हैं।
अधिकांश बैंक कुछ खास तरह के मिक्स्ड बचत खाते खोलते हैं। इन खातों में रकम एक निश्चित सीमा से ऊपर जाने पर अतिरिक्त राशि अपने आप एफडी में चली जाती है, जिसपर बैंक अधिक ब्याज देते हैं। जरूरत के समय इनसे रकम निकालने में कोई परेशानी भी नहीं होती। कुछ सरकारी बैंक नामित हैं जहां पीपीएफ खाते भी खोले जा सकते हैं। बैंकों की सावधि जमा योजनाओं की रकम का इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित निवेश में किए जाने के कारण इनमें पूंजी की सुरक्षा को लेकर भी कोई संदेह या सवाल नहीं है।