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क्रेडिट कार्ड का बकाया सीधे खाते से काटना गैरकानूनी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2013 12:30 AM IST
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बैंक जनता के पैसे को अपने पास संरक्षक के तौर पर रखती है। क्रेडिट कार्ड का बकाया बिना किसी नोटिस के सीधे बैंक उपभोक्ता के खाते से काटना गैरकानूनी, आपत्तिजनक और निंदनीय है।
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यह टिप्पणी उपभोक्ता फोरम ने एचडीएफसी बैंक को उपभोक्ता को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी करते हुए की है।
खास बात यह है कि इस मामले में उपभोक्ता को क्रेडिट कार्ड मिला भी नहीं था। उसके नाम पर बना क्रेडिट कार्ड अन्य पते पर भेज दिया गया था।
गुड़गांव निवासी सुनील कुमार कुशवाहा के दावे पर उपभोक्ता फोरम ने कहा कि हमने पाया है कि खाताधारक को क्रेडिट कार्ड नहीं मिला था। उसके नाम पर क्रेडिट कार्ड जारी किया गया था, लेकिन वह गलत पते पर भेजा गया।
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यह चूक प्रतिवादी यानी बैंक की ओर से हुई। इसके बाद क्रेडिट कार्ड से हुए खर्च का बकाया बैंक की ओर से उपभोक्ता को बिना नोटिस दिए उसके खाते से काट लिया गया। यह न्यायोचित नहीं है। जब उपभोक्ता की ओर से कई बार इस संबंध में बैंक से शिकायत की गई, तब खाते में पैसा वापस किया गया।
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इसमें कोई शक नहीं कि एक माह की इस अवधि के दौरान शिकायतकर्ता को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। वह भी बैंक में सुरक्षित किए गए अपने ही धन के लिए।
फोरम के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने गैरकानूनी कारगुजारी करने वाले बैंक को उपभोक्ता को बेवजह परेशानी में डालने, वित्तीय नुकसान, उत्पीड़न और मानसिक परेशानी के एवज में 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
साथ ही बैंक को अपनी गलतियों को सुधारने को कहा है। बैंक को इस संबंध में सितंबर, 2008 से कई बार उपभोक्ता ने शिकायत भेजी कि उसे बेवजह क्रेडिट कार्ड के भुगतान के संबंध में फोन आ रहे हैं, जबकि उसे कोई क्रेडिट कार्ड मिला ही नहीं है।
बैंक की ओर से उसे इस संबंध में सितंबर, 2009 में कानूनी नोटिस भेजा गया। इसके बाद कुशवाहा ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।