पेटीएम, फोनपे जैसे मोबाइल वॉलेट पर धोखाधड़ी होने पर मिली यह बड़ी राहत
- 25 फीसदी का इजाफा हुआ दिसंबर में यूपीआई से भुगतान में
- 01 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर गया इस दौरान वॉलेट भुगतान का
- 03 खरब ट्रांजेक्शन वर्ष 2018 में किया गया यूपीआई के माध्यम से
- 68 हजार मोबाइल वॉलेट फर्जीवाड़े के मामले सामने आए वर्ष 2017 में
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मोबाइल वॉलेट से डाटा लीक और फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए आरबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने हाल में जारी अपनी गाइडलाइन में कहा है कि मोबाइल वॉलेट से किसी भी तरह के अवैध ट्रांजेक्शन पर उपभोक्ता की जिम्मेदारी नहीं होगी और उसे फर्जीवाड़े की रकम चुकाने से राहत मिलेगी।
केंद्रीय बैंक ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) जारी करने वाले बैंकों से कहा है कि ट्रांजेक्शन अलर्ट एसएमएस के साथ उपभोक्ताओं को संपर्क के लिए नंबर या मेल आईडी भी उपलब्ध कराएं जिससे वह अवैध ट्रांजेक्शन की समय रहते शिकायत कर सके।
उपभोक्ता को नहीं चुकानी होगी रकम
आरबीआई ने अपनी गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर पीपीआई जारीकर्ता की लापरवाही से उपभोक्ता के मोबाइल वॉलेट से अवैध लेनदेन होता है तो उसकी देयता शून्य होगी और उपभोक्ता को फर्जीवाड़े की रकम नहीं चुकानी पड़ेगी।
साथ ही अमेजन-पे, फोन-पे, पेटीएम जैसे मोबाइल वॉलेट कंपनियों के पीपीआई जारीकर्ता को सभी उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर और मेल आईडी पर अनिवार्य रूप से समय पर ट्रांजेक्शन अलर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इस अलर्ट एसएमएस के साथ वह नंबर और मेल आईडी भी उपलब्ध कराएं, जिस पर उपभोक्ता अवैध ट्रांजेक्शन की शिकायत कर सके।
10 दिन में वापस आ जाएगा पैसा
अगर उपभोक्ता अपने मोबाइल वॉलेट से अवैध ट्रांजेक्शन की शिकायत समय पर करता है तो पीपीआई की ओर से शिकायत के 10 दिन के भीतर पैसा उपभोक्ता के खाते में वापस आ जाएगा। पीपीआई जारीकर्ता को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी शिकायत का निपटान 90 दिनों के भीतर करके उपभोक्ता की देयता तय करनी होगी। अगर पीपीआई 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा नहीं कर पाता है तो फर्जीवाड़े की राशि उपभोक्ता को वापस मिल जाएगी, चाहे उसकी गलती हो या न हो।
तीन दिन में शिकायत जरूरी
उपभोक्ता अवैध लेनदेन की शिकायत अगर समय पर नहीं करता है या उसके मोबाइल वॉलेट से अवैध ट्रांजेक्शन उसकी गलती से हुआ है तो ऐसी स्थिति में फर्जीवाड़े की रकम उसे ही चुकानी होगी। इसलिए जरूरी है कि उपभोक्ता इसकी शिकायत तीन दिनों के भीतर करे। अगर वह चार से सात दिन में इसकी शिकायत करता है तो 10 हजार रुपये तक के फर्जीवाड़े की रकम उसे चुकानी होगी।
एनसीएससी ने की थी मांग
नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोआर्डिनेटर (एनसीएससी) ने पिछले दिनों डिजिटल पेमेंट पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ हुई समीक्षा बैठक में वॉलेट के डाटा और लेनदेन को सुरक्षित करने के नियम बनाने की मांग की थी।
इस पर आईटी मंत्रालय ने आरबीआई को मोबाइल वॉलेट को लेकर उचित दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था। अभी तक नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच करार में वॉलेट की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं के हित में कोई नियम नहीं थे।