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इंश्योरेंस क्लेम में देरी पर यहां करें शिकायत
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 06 May 2013 09:25 PM IST
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इंश्योरेंस क्लेम के जरिये ही नॉमिनी को बीमे की राशि मिलती है। इसलिए पॉलिसीधारक के लिए यह जरूरी हो जाता है कि इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया और उससे जुड़ी कागजी कार्रवाई को न केवल खुद अच्छी तरह से समझ ले, बल्कि अपने आश्रितों, जिन्हें की बीमे का क्लेम मिलना है, को भी इससे भली भांति अवगत करा दे।
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इंश्योरेंस क्लेम के निपटारे में देरी या बाधा आने पर क्लेमकर्ता इसकी शिकायत कर मामले के समय निपटारे का आग्रह कर सकता है। इसके लिए पहले तो बीमा कंपनी के पास शिकायत भेजनी होती है।
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कंपनी की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने या कार्रवाई न होने पर मामला बीमा नियामक इरडा के पास भी ले जाया जा सकता है।
इरडा ने शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष तौर पर एक इंटिग्रेटेड ग्रिवांस मैनेजमेंट सिस्टम (आईजीएमएस) बना रखा है। इसके जरिये बीमा कंपनियों द्वारा मामले के निपटारे और शिकायतों के निवारण पर नजर रखी जाती है।
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साथ ही आईजीएमएस के जरिये इरडा क्लेम से जुड़े मूलभूत कारणों के आधार पर निपटारे में हो रही देरी आदि की अपने स्तर पर विवेचना भी करता है।
क्लेम निपटारे संबंधी इन व्यवस्थाओं के बावजूद मामले का उचित ढंग से निपटारा न होने पर क्लेमकर्ता उपभोक्ता अदालत व बीमा लोकपाल (इंश्योरेंस ओंबड्समैन) के पास भी अपना मामला ले जा सकता है।
क्लेमकर्ता को यह जान लेना चाहिए कि अगर उसका मामला वाजिब है और उसने निर्धारित कागजात उपलब्ध कराते हुए सही ढंग से क्लेम दाखिल किया है, तो बीमा कोई वजह नहीं कि बीमा कंपनी उसके क्लेम को अस्वीकार कर दे अथवा उसका निपटारा न करे।
क्लेम के निपटारे को लेकर बीमा कंपनियों को बीमा नियामक द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ता है। ऐसा न होने पर वह बीमा कंपनी के खिलाफ कानूनी तौर पर आवाज उठा सकता है।
साथ ही बीमाधारक को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पॉलिसी के प्रपोजल फार्म में वह कंपनी द्वारा मांगी गई सारी जानकारियां सही-सही और स्पष्ट रूप से दे, ताकि उसके न रहने पर क्लेम के निपटारे में किसी तरह की अड़चन न आने पाए।
नॉमिनी की भूमिका
पॉलिसीधारक को नॉमिनी का पूरा नाम, पता, जन्मतिथि, जन्म प्रमाणपत्र और पहचान पत्र पॉलिसी के साथ मुहैया कराना चाहिए। वहीं, यदि एक से ज्यादा व्यक्ति को नॉमिनी बनाया है, तो सभी नॉमिनी की जानकारी मुहैया करानी चाहिए।
नॉमिनी 18 साल से कम उम्र का हो, तो पॉलिसीधारक को क्लेम की राशि लेने के लिए किसी वयस्क की नियुक्ति करनी होती है। अल्पवयस्क नॉमिनी के संदर्भ में जिसकी नियुक्ति की है उसकी भी संपूर्ण जानकारी पॉलिसी के साथ देनी चाहिए।
पॉलिसीधारक द्वारा नियुक्त किए गए नॉमिनी की यदि मृत्यु हो जाती है, तो पॉलिसीधारक को अपनी पॉलिसी के लिए दूसरा नॉमिनी नामित करना होता है क्योंकि नॉमिनी की मृत्यु के बाद यदि वह पॉलिसी में दूसरे नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं कराता है, तो पॉलिसीधारक की मौत के बाद नॉमिनी के अभाव में उसका क्लेम रद्द हो सकता है।