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कार लोन लेने से पहले पढ़िए ये खबर
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 16 Dec 2013 01:12 PM IST
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कार अब स्टाइल और स्टेटस का एक अहम सिंबल बन गई है। छोटे बाजार हो या बड़े, कमोबेश हरेक बाजार में व्यक्ति की जरूरत और सामर्थ्य के मुताबिक कारें उपलब्ध हैं।
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भारतीय बाजार की बात की जाए तो यहां लखटकिया नैनो से लेकर पांच करोड़ की लैंबोरगिनी तक बिकती है। ऑटो इंडस्ट्री के लिहाज से भी देखें, तो भारत दुनिया का एक महत्वपूर्ण ऑटो बाजार भी है।
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हमारे देश से हर महीने करीब 2.6 लाख कारों की बिक्री/निर्यात होता है।
आसान है कार पर कर्ज लेना
वाहनों पर बैंकों के अलावा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां या फाइनेंस कंपनियां भी कर्ज देती हैं।
कार, दोपहिया वाहन के अलावा ट्रक, बस, ट्रैक्टर आदि के वाहनों के कर्ज के लिए इन कंपनियों का प्रमुख जोर रहता है। हालांकि इनकी ब्याज दरें बैंकों की तुलना में एक से दो फीसदी तक ज्यादा होती है।
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पर ऐसे ग्राहक जिन्हें बैंक कर्ज नहीं देते हैं या फिर उनके क्षेत्रों तक बैंकों की पहुंच नहीं है, उनके लिए कर्ज लेने के लिए फाइनेंस कंपनियां बेहतर विकल्प हैं।
आज के दौर में आपको अगर बाइक और स्कूटर के लिए बैंकों से कर्ज लेना है, तो वह काफी मुश्किल भरा हो सकता है। वहीं इसकी तुलना में कार के लिए कर्ज लेना कहीं आसान है।
देश के सरकारी बैंक हो या निजी बैंक सभी दुपहिया वाहन पर कर्ज देने के लिए ज्यादा आक्रामक नहीं रहते हैं। हाल ही में सरकार द्वारा जोर देने पर सरकारी बैंकों ने दोपहिया वाहनों पर शर्तों के साथ कर्ज देना शुरू किया है।
जैसे कि पंजाब नेशनल बैंक केवल उन्हीं ग्राहकों को दोपहिया वाहन पर कर्ज दे रहा है, जिनका वेतन खाता बैंक में है।
फ्लोटिंग या फिक्स्ड ब्याज दर
सामान्य तौर पर लोन की ब्याज दरें दो तरह की होती हैं, फिक्स्ड या फ्लोटिंग। फ्लोटिंग ब्याज दरें बैंक के बेस रेट से जुड़ी होती हैं और इसमें लोन की अवधि के दौरान बदलाव हो सकता है। यह उस स्थिति में होता है जब बैंक समग्र ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है।
दूसरी ओर, फिक्स्ड ब्याज दरों में पूरी लोन की अवधि के दौरान ब्याज दर समान रहती हैं। यदि आपको लगता है कि आने वाले समय में ब्याज दरें कम होंगी तो फ्लोटिंग रेट बेहतर रहता है। इसके विपरीत यदि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने का अंदेशा है तो फिक्स्ड रेट अच्छा विकल्प है।
लोन की फंडिंग
फंडिंग से तात्पर्य लोन की राशि से है और यह कार की वैल्यू के आधार पर दी गई लोन की राशि को दर्शाता है। जैसे, यदि कोई बैंक पांच लाख रुपए की कार पर 80 फीसदी की फंडिंग कर रहा तो इसका मतलब हुआ कि बैंक 4 लाख रुपए तक लोन ग्राहक को उपलब्ध करा सकता है।
यह फंडिंग सामान्यत: एक्सशोरूम कीमत और ऑन रोड कीमत पर होती है। ऑन रोड कीमत में बीमा, रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन शुल्क आदि भी जुड़ा रहता है।
कार अब स्टाइल और स्टेटस का एक अहम सिंबल बन गई है। छोटे बाजार हों या बड़े, कमोबेश हरेक बाजार में व्यक्ति की जरूरत और सामर्थ्य के मुताबिक कारें उपलब्ध हैं। भारतीय बाजार की बात की जाए तो यहां लखटकिया नैनो से लेकर पांच करोड़ की लैंबोरगिनी तक बिकती है।
ऑटो इंडस्ट्री के लिहाज से भी देखें, तो भारत दुनिया का एक महत्वपूर्ण ऑटो बाजार है। हमारे देश से हर महीने करीब 2.6 लाख कारों की बिक्री/निर्यात होता है।
देश में यात्री कारों की 70 फीसदी खरीदारी बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के लोन यानी कार लोन के जरिए की जाती है। यह कार खरीदने का सबसे सुविधाजनक तरीका है। इसमें ग्राहक को कार की पूरी रकम का एकमुश्त भुगतान नहीं करना पड़ता है।
ग्राहक के लिए अपने पैसे का अन्य जगहों पर निवेश करने के विकल्प भी खुले रहते हैं और वह अपने कार लोन का भुगतान हर महीने एक तय किस्त के रूप में आसानी से कर सकता है।
बाजार में आज बहुत सी वित्तीय कंपनियां हैं, जो कार लोन उपलब्ध कराती हैं लेकिन ग्राहक के लिए सबसे अहम बात है अपनी सुविधा और जरूरत के मुताबिक लोन का चयन करना।
प्रीपेमेंट चार्ज
जब ग्राहक कार लोन के भुगतान की तय अवधि से पहले लोन का भुगतान या उसे बंद करना चाहता है तो इसपर उसे एक तय प्रीपेमेंट चार्ज (फोरक्लोजर चार्ज) देना पड़ सकता है। यह चार्ज अलग-अलग बैंकों और लोन अवधि पर निर्भर करता है।
कई बार ग्राहक तय अवधि से पहले लोन का पूर्ण भुगतान करने की बजाय उसका कुछ हिस्सा एकमुश्त चुकाना चाहता हैं। इसे पार्ट पेमेंट कहते हैं।
कुछ बैंकों में पार्ट पेमेंट का प्रावधान नहीं है जबकि कुछेक में एक निश्चित अवधि के बाद ही पार्ट पेमेंट कर सकते हैं। कुछ वित्तीय संस्थाएं पार्ट पेमेंट की एवज में ग्राहकों से चार्ज लेती हैं।
अपने फाइनेंसर से यह सवाल जरूर पूछें:
--ब्याज दरें फिक्स्ड हैं या फ्लोटिंग?
--कार लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस क्या है?
--क्या कोई पार्ट पेमेंट या प्री-पेमेंट चार्ज है?
--चेक बाउंस होने पर चार्ज/पेनाल्टी क्या है?
--डुप्लीकेट एनओसी के लिए क्या फाइनेंसर चार्ज लेता है?
--क्या बैंक लोन पर किसी तरह का हिडेन चार्ज या पेनाल्टी चार्ज लेता है?