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ऐसे बचें बीमा एजेंटों के फ्रॉड से

Mon, 02 Sep 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Mon, 02 Sep 2013 12:04 AM IST
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be alert from insurance agent fraud

जीवन बीमा एक ऐसा प्रोडक्ट है, जिसका लाभ मुख्य रूप से लंबे समय में मिलता है। इसके बावजूद कई बार तात्कालिक फायदा पाने के लिए ग्राहकों को भ्रम में रख कर गलत ढंग से इनकी बिक्री कर दी जाती है।

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वास्तव में बीमे की इस मिस सेलिंग से ग्राहक का ही नहीं, बल्कि बीमा कंपनी का भी नुकसान होता है।

बीमे की मिस सेलिंग अकसर पॉलिसियों से जुड़ी जटिलताओं, उसे बेचने से एजेंट को मिलने वाले लाभ (इंसेंटिव) और इसके लिए पर्याप्त जवाबदेही न होने के चलते होती है।
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मिस सेलिंग में बीमे या किसी भी उत्पाद को ऐसी वजहें या लाभ बताकर बेचा जाना आता है, जो कि वास्तव में उसमें शामिल नहीं होतीं।

एजेंटों के बहकावे में न आएं

इसके अलावा ग्राहक के लिए उपयोगी न होने पर भी प्रोडक्ट बेचना भी इसके दायरे में आता है। उदाहरण के लिए ऐसे व्यक्ति, जिसका कोई आश्रित न हो, उसे बीमा पॉलिसी बेचना मिस सेलिंग ही कहलाएगा।
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दूसरी ओर किसी प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों को छुपाकर, ग्राहक को उसके लिए जरूरी जानकारियां न देकर या गलत सलाह देकर प्रोडक्ट बेचने की प्रवृत्ति भी अकसर देखने को मिलती है।

हालांकि इसे मिस सेलिंग के बजाय फ्रॉड की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। बीमा एजेंटों द्वारा अधिक कमीशन के लालच में कई बार ग्राहकों को ऐसी पॉलिसी बेच दी जाती है, जिसके लिए उन्हें लंबे समय तक काफी अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ता है।

भ्रामक फोन कॉल से बचें
भ्रामक फोन कॉलों के जरिए मिस सेलिंग का और भी बढ़ जाना बीमा उद्योग के लिए परेशानी व बदनामी का सबब बनता जा रहा है।

इसमें कॉल करने वाले गलत जानकारी देने के साथ ही इंट्रेस्ट फ्री लोन व भारी बोनस जैसे झूठे वायदे करके ग्राहकों को जाल में फंसाते हैं।

कई बार तो वह मौजूदा पॉलिसी सेरेंडर करके नई पॉलिसी लेने की सलाह तक देते हैं, जिससे ग्राहक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।

जांच करने पर पता चला है कि अकसर ऐसा करने वाले लोग पूर्व में कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीमा कंपनी से जुड़े होते हैं तथा अलग होने के बाद भी खुद को कंपनी से जुड़ा बता कर इस तरह की हरकतें करते हैं।

मिस सेलिंग से बीमा कंपनी चौकन्ना

यह अकसर प्री पेड मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं और नंबर बदलते रहते हैं। ऐसे में इनकी पहचान और धरपकड़ मुश्किल हो जाती है।

फोन के जरिए बढ़ती मिस सेलिंग ने बीमा कंपनियों को चौकन्ना कर दिया है और इसके खिलाफ देशव्यापी जागरूकता अभियान की कवायद शुरू हो गई है।

कुछ कंपनियों ने कॉल-बैक सिस्टम शुरू करने सहित इस दिशा में कुछ अन्य कदम उठाए हैं। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि ग्राहक को पॉलिसी तभी जारी की जाए, जबकि वह उससे जुड़ी जरूरी शर्तों, लाभ, जोखिम व बाध्यताओं आदि को समझ चुका हो और एजेंट द्वारा उसे सही-सही व पूरी जानकारी दी गई हो।

इस तरह की प्रणाली से न केवल ग्राहकों को सही बीमा प्रोडक्ट चुनने में मदद मिलती है, बल्कि कंपनी की साख और ग्राहकों से उसका रिश्ता भी मजबूत होता है।

इसके अलावा बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने भी मिस सेलिंग के प्रति ग्राहकों को जागरूक करने के लिए एसएमएस के जरिए जानकारियां भेजना शुरू किया है।

उम्मीद है कि इन प्रयासों से न केवल ग्राहक लाभान्वित होंगे, बल्कि बीमा सेक्टर के लिए भी यह एक अच्छा और फलदायी कदम साबित होगा।

आंख मूंदकर न मानें एजेंट की बात
आमतौर पर बीमा एजेंट ग्राहकों को पॉलिसी बेचने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं। मसलन, भारी गारंटीड रिटर्न मिलेगा, पांच साल तक ही आपको प्रीमियम जमा करना है, आगे कंपनी करेगी आदि।

सबसे आम बात जो सुनने में आती है, वह यह कि रिटर्न गारंटीड है, आप फॉर्म पर साइन कर दीजिए आगे मैं सब भर लूंगा।

अमूमन लोग इन सभी बातों पर यकीन कर पॉलिसी खरीद लेते हैं। लेकिन क्या एजेंट द्वारा कही गई सभी बातें वास्तव में सही होती हैं? तो इसका सीधा-सपाट जवाब है बिलकुल नहीं।

दरअसल, बीमा एजेंट ग्राहक को वही सब बातें बताता है, जो ग्राहक को सुननी अच्छी यानी लुभावनी लगती हैं और पॉलिसी से जुड़ी तकनीकी चीजों के बारे में जानकारी नहीं मुहैया कराता है।

एजेंट द्वारा इस तरह बीमा उत्पाद बेचने को ही मिस सेलिंग यानी गलत तरीके से उत्पाद बेचना कहते हैं। दरअसल, बीमा आपके मकान और लक्जरी कार के बाद तीसरा सबसे बड़ा महंगा उत्पाद होता है।

इसलिए, उपभोक्ता जितनी जागरूकता और पूछताछ मकान और मनपसंद कार खरीदने में करता है,उतनी ही सूझबूझ और समझदारी उसे बीमा उत्पाद खरीदने में भी दिखानी चाहिए।

दस्तावेज पर दस्तखत से पहले पूरा पढ़ें
अकसर बीमा के प्रपोजल फार्म पर उपभोक्ता बिना उसे पूरा पढ़े दस्तखत कर देता है। प्रपोजल फार्म महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर ही कंपनी पॉलिसी जारी या खारिज करती है। इसलिए उपभोक्ता को फार्म पूरा पढ़ना चाहिए और स्वयं भरना चाहिए।

मान लीजिए बीमा एजेंट ने आपका फार्म भरा और 60 साल की उम्र में आपको 100 फीसदी इक्विटी वाले प्रोडक्ट में रख दिया।

ऐसे में बाजार में गिरावट आने पर आपकी पूंजी डूब सकती है। निपटान के समय आपके द्वारा प्रपोजल फार्म में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो क्लेम में भारी दिक्कत हो सकती है।

बीमा उत्पाद को समझें
बीमा उत्पाद पारंपरिक, यूलिप, टर्म या मनी बैक चार तरह के हो सकते हैं। इनमें से प्रत्येक उत्पाद के अपने-अपने नफा-नुकसान हैं। जैसे, यदि आप टर्म प्लान लेते हैं तो आपको मैच्योरिटी पर रिटर्न की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

वहीं, यूलिप उत्पाद का रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। इसलिए उपभोक्ता को अपनी जरूरत को जानते और समझते हुए अपने या अपने प्रियजनों के लिए बीमा उत्पाद खरीदना चाहिए। आजकल हर तरह के प्रोडक्ट की जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है।

बीमा कंपनी को कॉल करें
आजकल सभी बीमा कंपनियों के 24 घंटे वाले टोल फ्री नंबर उपलब्ध हैं। बीमा उत्पाद के बारे में हर तरह के स्पष्टीकरण के लिए आपको इन नंबरों पर कॉल कर सभी जरूरी जानकारियां प्राप्त कर लेनी चाहिए।


यदि आपको कभी भी ऐसा लगे कि एजेंट आपको कुछ गलत तथ्य बता रहा है, तो बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर फोन पर अपने संदेह पर स्पष्टीकरण जरूर ले लें।

उत्पादों की तुलना कर खरीदें
किसी एक कंपनी के उत्पाद को आंख मूंदकर न लें। दूसरी कंपनियों के उत्पादों के साथ तुलना कर अपनी जरूरत का उत्पाद खरीदें।

आजकल कई बीमा एग्रीगेटर वेबसाइट उपलब्ध हैं, जिन पर सभी उत्पादों के फीचर उपलब्ध हैं। इनसे जानकारी लेकर आप बेहतर व किफायती उत्पाद खरीद सकते हैं।

समझ लें मार्केट लिंक्ड उत्पाद
यह समझ लें कि आपकी पॉलिसी मार्केट से किस तरह जुड़ी है। यदि आप बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर ही रहना चाहते हैं तो यूलिप प्लान लेने से बचें। लेकिन यदि आप इसमें निवेश करते हैं तो डेट और कैंश फंड को चुने इन पर कम लेकिन अच्छा रिटर्न मिलता है।

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