लॉकर की फीस नहीं भरी तो झेलनी पड़ेगी मुसीबतें

प्रशांत श्रीवास्तव/नई दिल्ली Updated Sat, 26 Oct 2013 12:44 PM IST
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आपने बैंक में लॉकर ले रखा है और उसकी फीस नहीं चुका रहे हैं, तो यह लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है।
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बैंक अब ऐसे ग्राहकों से निपटने के लिए जहां उनके नाम अखबारों के जरिए सार्वजनिक करने की शुरुआत कर चुके हैं, वहीं इसके बाद भी भुगतान न करने पर ग्राहकों के लॉकर तोड़ने का भी कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं।
भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि कई क्षेत्रों में लॉकर फीस न देने के मामले सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए बैंक ने क्षेत्रवार ऐसे ग्राहकों की सूची सार्वजनिक करना शुरू किया है।
इस कदम का मकसद है कि ग्राहक अपना भुगतान करें या फिर लॉकर बंद कराएं। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो बैंक के पास लॉकर तोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी जगजीत सिंह के अनुसार बैंक ग्राहकों को दो से तीन बार रिमाइंडर देते हैं। यदि इसके बाद भी वह भुगतान नहीं करता है, तो बैंक किसी वकील के समक्ष लॉकर को तोड़ देता है।

साथ ही उसमें रखी वस्तुओं को एक साल तक संभाल कर रखता है। अगर उसके बाद भी कोई उन वस्तुएं के लिए नहीं आता है, तो बैंक उसे बेच देता है।

ऐसे में ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि वह सूचना मिलने पर बैंक शाखा आकर या तो उसे बंद करा दें या फिर आगे के लिए भुगतान कर उसे जारी रखें।

इंडियन बैंक के अधिकारी के अनुसार हाल के दिनों में इस तरह के मामले कुछ खास क्षेत्रों में ज्यादा सामने आ रहे है। लोग कई बैंक खाते खुलवा लेते हैं, ऐसे में वह कई बार खाते को मेंटेन करना भूल जाते हैं।

इस स्थिति में यदि किसी ग्राहक का वहां लाकर है, बैंक के पास उसे तोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।

लॉकर के लिए कितना लगता है किराया
स्टेट बैंक तीन तरह के लॉकर का विकल्प ग्राहकों को देता है। इसके तहत छोटे लॉकर पर 764 रुपए से 1,014 रुपए तक, मझोले आकार पर 2,547 रुपए से 3,065 रुपए और बड़े आकार पर 4,075 से 5,093 रुपए तक सालाना किराया लेता है। इसी तरह, दूसरे बैंक भी आकार और क्षेत्र के आधार पर सालाना शुल्क लेते हैं।
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