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भारत के नक्शे कदम पर पाकिस्तान, जल्द बेचेगा अपनी नेशनल एयरलाइंस कंपनी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 15 Jan 2018 01:43 PM IST
pakistan government mulls option to sell its international airlines company
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नेशनल एयरलाइंस कंपनी को बेचने के मामले में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी भारत के नक्शेकदम पर चल पड़ा है। जैसे भारत में सरकार एयर इंडिया को बेचने की तैयारी कर रही है, वैसे ही पाकिस्तान सरकार इस साल होने वाले आम चुनाव से पहले अपने नेशनल कैरियर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) को निजी हाथों में बेचने की तैयारी कर रहा है। 



लॉस में जा रही है एयरलाइंस
पाक सरकार के विनिवेश मंत्री डेनियल अजीज के मुताबिक पीआईए काफी लंबे समय से लॉस में जा रही है। एयरलाइंस को विदेशी कंपनियों जैसे कि Etihad और Emirates से तगड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके अलावा कंपनी का मैनेजमेंट भी खस्ताहाल हालत में है। 2016 में एयरलाइंस का एक प्लेन भी क्रैश हो गया था, जिसमें 47 लोग मारे गए थे। 


68 कंपनियों को सरकार बेचेगी
पाक सरकार अपनी बीमार हो चुकी 68 कंपनियों को बेचने जा रहा है। इन कंपनियों में पीआईए भी शामिल है। इससे पहले भी सरकार ने 2016 में पीआईए को बेचने की कोशिश की थी लेकिन तब कर्मचारियों ने काफी विरोध किया था, जिससे एयरलाइंस के ऑपरेशन पर काफी असर पड़ा था। 

सरकार लेकर आई थी कानून

Air India
Air India
पीआईए को बेचने से रोकने के लिए सरकार बाद में एक कानून लेकर के आई थी, जिसके बाद यह प्रावधान किया गया था कि इसको किसी भी हालत में निजी हाथों में नहीं बेचा जाएगा। लेकिन अब एक बार फिर से पीआईए को बेचने की तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है। इसके लिए विनिवेश मंत्रालय जल्द ही प्रपोजल बनाकर के कैबिनेट के पास ले जाएगा। कैबिनेट से प्रपोजल पास होने के पास इसे फिर संसद में पेश किया जाएगा। 

186 बिलियन का है कर्जा
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस पर 186 बिलियन रुपये का कर्ज मार्च 2016 तक था। अजीज ने कहा कि अगर आपके पास पैसा है तो आप तुरंत ही पीआईए को खरीद सकते है। अजीज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सारा प्रोसेस इस साल जुलाई-अगस्त तक पूरा हो जाएगा। 

Air India कर्मचारियों को पीएसयू कंपनियों में भेजने की तैयारी
सरकार एयर इंडिया कर्मचारियों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में लगाने और उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) पैकेज देने जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर विचार कर रही है। एयर इंडिया के विनिवेश के लिए आगे बढ़ने से पहले सरकार इन कदमों पर विचार कर रही है। वहीं एयर इंडिया को बेचने के सरकार के फैसले का कई कर्मचारी संघ कड़ा विरोध कर रहे हैं।

कर्ज तले दबी सरकारी विमान सेवा को 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दी गई है। इस दौरान एक आसान रणनीतिक विनिवेश सुनिश्चित किए जाने के प्रयास सहित मंत्रियों का एक समूह अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। एक अनुमान के अनुसार, कर दाताओं के पैसे पर चलने वाली विमान सेवा 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर्ज के बोझ तले दबी है। वहीं विमान सेवा में पैसे और इस विनिवेश योजना का उद्देश्य विमान सेवा को फिर से पटरी पर लाना है।
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