बिना टैक्स सामान बेच रहीं चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों पर सरकार ने कसा शिकंजा
- क्लब फैक्ट्री, अली एक्सप्रेस और शीन जैसी चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों पर कसी नकेल
- 5,000 रुपये तक के उपहार पर नहीं लगता टैक्स, जिसका फायदा उठा रहीं कंपनियां
- डाकघर एवं कुरियर कंपनियों से चीन से आने वाले सामानों पर नजर रखने का निर्देश
- 1.20 लाख ऑर्डर अब भी मिलते हैं चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों को
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विस्तार
सीमा शुल्क दिए बिना उपहार के नाम पर सामान बेच रहीं चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों पर भारत ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस मामले से जुड़े दो लोगों ने बताया कि टैक्स और कस्टम अधिकारियों के पत्र लिखने के बाद सरकार ने डाकघर एवं कुरियर कंपनियों से चीन से आने वाले सामानों पर नजर रखने को कहा है।
इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने बताया- अब तक कस्टम विभाग को सख्त कार्रवाई करने को कहा जाता था, लेकिन डाकघर को भी ऐसे खरीद पर नजर रखने को कहा गया है। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने देश के सभी बंदरगाहों को लिखित में निर्देश दिया है कि वे जांच करें कि चीन से आ रहा कोई सामान उपहार है या नहीं।
इससे पहले सरकार ने मुंबई के रास्ते माल का आयात बंद कर दिया था। अब वह चेन्नई और कोलकाता समेत देश के अन्य हिस्सों से आयात बंद करने पर विचार कर रही है।
नियमों की आड़ में कारोबार
सूत्रों का कहना है कि सरकार को जांच में पता चला है कि अली एक्सप्रेस और शीन जैसी अधिकतर चीनी ई-कॉमर्स कंपनियां उपहार बताकर भारत में सामान भेज रही हैं, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। नियमों के मुताबिक, 5,000 रुपये तक के उपहार पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगता है।
ये कंपनियां इस नियम की आड़ में धड़ल्ले से कारोबार कर रही हैं। कस्टम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जांच में अक्सर पाया जाता है कि ये चीनी ई-कॉमर्स कंपनियां पूर्व अनुमति और सीमा शुल्क दिए बिना अधिकृत पंजीकृत कुरियर के जरिए सामान बेच रही हैं।
शिकंजा कसने पर ऑर्डर में आई कमी
जांच में पता चला है कि भारतीय चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन दो लाख तक ऑर्डर दे रहे थे, जिन पर टैक्स नहीं चुकाया गया। शिकंजा कसने के बाद यह आंकड़ा घटकर प्रतिदिन 1.20 लाख तक आया है, जो अब भी काफी अधिक है। सरकार इस पर पूरी तरह शिकंजा कसना चाहती है। चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों की तुलना में फ्लिपकार्ट और अमेजन को हर दिन औसतन करीब 10 लाख ऑर्डर मिलते हैं।
खरीदारी की जगह का पता लगाना मुश्किल
लोगों को पता था कि भारतीय और चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के सामान की कीमतों में अंतर कई मामलों में 40 फीसदी तक था। कई चीनी ई-कॉमर्स कंपनियां वेबसाइट पर सामानों की कीमतें भारतीय रुपये में प्रदर्शित करती हैं और सामान डिलीवरी के वक्त रसीद (इनवॉइस) भी नहीं देती हैं। अधिकतर मामलों में खरीदार कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनते थे, जिससे जांचकर्ताओं को यह पता लगाना और भी मुश्किल हो गया कि कौन से सामान लाए जा रहे हैं और किस स्थान पर खरीदारी हो रही है।
2018 में पहली बार की गई शिकायत
ऑनलाइन पोर्टल लोकल सर्किल के संस्थापक एवं चेयरमैन सचिन टपारिया का कहना है कि हाल ही में सरकार ने सभी चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इससे उन्हें भारतीय कानूनों के तहत लाने में मदद मिल सकती है। सचिन ने ही पहली बार 2018 में चीनी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सरकार से शिकायत की थी।