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ई पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बजट में मिल सकती है छूट

Fri, 22 Jan 2016 03:50 AM IST
Updated Fri, 22 Jan 2016 03:50 AM IST
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ई पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्प सरकार आगामी आम बजट में इस क्षेत्र के लिए कुछ छूट की घोषणा कर सकती है। सरकार चाहती है कि लोग नकद लेन-देन या पेपर ट्रांजेक्शन करने के बदले ई-ट्रांजेक्शन करें। सरकार इसके जरिये एक तीर से दो शिकार करना चाहती है, पहला कि नकदी का कम उपयोग हो और दूसरा कि काले धन पर लगाम लगे। इससे आय कर विभाग को भी आसानी हो जाएगी।.

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सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वित्त मंत्रालय ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने केलिए कुछ प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। बजट बनाने केसिलसिले में पिछले दिनों जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंक एवं वाणिज्यिक संगठनों से मुलाकात की थी, तब उन्होंने ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने से संबंधित उपायों पर विस्तार से चर्चा की थी। इन दिनों अधिकारी इन उपायों पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि बजट में इसकी घोषणा हो सके।
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रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि बीते नवंबर माह के दौरान देश में ई-ट्रांजेक्शन केजरिये 6,32,587 करोड़ रुपये का हस्तांतरित किए गए, जबकि परंपरागत चेक या अन्य कागजी प्रतिभूतियों केजरिये 6,17,845 करोड़ रुपये हस्तांतरित हुए थे। इन आंकड़ों से तो लगता है कि ई-ट्रांजेक्शन ने परंपरागत साधनों को पछाड़ दिया, लेकिन यदि एक अन्य आंकड़े पर गौर करें तो एक अलग ही दृश्य दिखता है।
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ई-पेमेंट के जरिये काले धन पर लगाम

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भारत में उपभोक्ता भुगतान के आंकड़ों को देखें, तो अब भी 98 फीसदी भुगतान नकदी पर आधारित है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में यह क्रमश: 55 फीसदी और 48 फीसदी तक है। एक गैर सरकारी रिपोर्ट का कहना है कि नकदी पर आधारित अर्थव्यवस्था होने की वजह से भारत में हर वर्ष 21,000 करोड़ रुपये मूल्य के नोट और सिक्के छापने, उसकी ढुलाई आदि पर खर्च करना पड़ता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि बैंक एवं पेमेंट गेटवे उपलब्ध कराने वाली कंपनियां सहमत हुईं, तो ई-पेमेंट पर उपभोक्ताओं को कुछ छूट भी मिल सकती है। पहली छूट तो पेमेंट गेटवे चार्ज में मिल सकती है। इसके अलावा उन्हें कैश बैक का भी लाभ मिल सकता है। उदाहरण के लिए मान लिया जाए कि कोई ग्राहक 500 रुपये की खरीदारी का भुगतान यदि ई-पेमेंट से करता है तो उसे पांच फीसदी कैश बैक दे दिया जाएगा। मतलब वह 525 रुपये की वस्तु या सेवा खरीद सकता है।  इस समय पेमेंट गेटवे चार्ज के रूप में ट्रांजेक्शन राशि के 1.65 फीसदी से 3.5 फीसदी तक लिया जाता है।

ई-पेमेंट से तुरंत धन केहस्तांतरण और नकदी का उपयोग न होना जैसे लाभ तो हैं ही, लेकिन सबसे बड़ा लाभ अलग ही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि शत-प्रतिशत ई-पेमेंट होने लगे, तो काले धन पर लगाम लग जाएगी। ऐसा इसलिए कि ई-पेेमेंट की जांच करना बेहद आसान है। यही नहीं, ई-पेमेंट करने वाले सभी लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालना आसान है, क्योंकि इसके लिए आय कर विभाग द्वारा जारी होने वाले पैन संख्या को आधार बनाया जाता है।

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