रिलायंस-वॉलमार्ट से टक्कर लेने के लिए अमेजन का नया प्लान, जल्द खरीदेगा मोर, बिग बाजार में हिस्सेदारी
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ई-कॉमर्स कंपनियों में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को अपनी और खींचने के लिए युद्ध अगले चरण में पहुंच गया है। रिलायंस और वॉलमार्ट जैसी कंपनियों को टक्कर देने के लिए विश्व की दिग्गज ऑनलाइन कंपनी अमेजन ने नया प्लान बनाया है। कंपनी अब अपनी पैठ लोगों के बीच बढ़ाने के लिए कई प्रमुख रिटेल कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह सभी कंपनियां देश भर ग्रोसरी व अन्य सामान को स्टोर्स के माध्यम से बेचती हैं।
इन कंपनियों से हो रही है बातचीत
अमेजन फिलहाल देश भर में कई कंपनियों से बातचीत कर रही है, जिसमें वो निवेश करने के इच्छुक है। इन कंपनियों में स्पेंसर्स रिटेल, बिग बाजार और आदित्य बिड़ला ग्रुप का मोर स्टोर शामिल हैं। अगर अमेजन की इन सभी कंपनियों से बातचीत सफल हो जाती है तो फिर उसका देश भर के 1700 स्टोर्स में हिस्सेदारी हो जाएगी।
इन जगहों पर हैं स्टोर्स
स्पेंसर्स के पूर्वी भारत, दिल्ली एनसीआर और दक्षिण भारत में स्टोर्स हैं। वहीं आदित्य बिड़ला के रिटेल स्टोर दक्षिण, उत्तर और पश्चिमी भारत में स्थित हैं। किशोर बियानी के स्वामित्व वाली फ्यूचर ग्रुप के बिग बाजार के सितंबर के अंत तक देश के प्रत्येक राज्य में स्टोर हो जाएंगे।
30 शहरों में है स्पेंसर्स के स्टोर
अमेजन फिलहाल स्पेंसर्स से बातचीत कर रहा है। इसके देश के 30 शहरों में करीब 128 स्टोर हैं। इनमें 58 बड़े स्टोर, हाइपर मार्केट और सुपर मार्केट शामिल हैं। कंपनी की पिछले वित्त वर्ष में करीब 2091 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी और उसे 30 करोड़ का नुकसान भी उठाना पड़ा था। फिलहाल कंपनी अगले चार सालों में 40 हाइपर मार्केट खोलने की योजना पर काम कर रही है।
वॉलमार्ट के हैं कैश एंड कैरी स्टोर
अमेजन को सबसे बड़ी टक्कर इस सेगमेंट में वॉलमार्ट, रिलायंस रिटेल और अलीबाबा से मिलने वाली है। वॉलमार्ट के पूरे देश में पहले से ही कैश एंड कैरी स्टोर मौजूद हैं। इसके अलावा कंपनी ने फ्लिपकार्ट में भी 76 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है। वहीं चीन की कंपनी अलीबाबा ने पेटीएम और बिग बॉस्केट में बहुत बड़ा निवेश कर रखा है। अलीबाबा फिलहाल रिलायंस और टाटा से अपनी इस सेगमेंट में साझेदारी करने के लिए बातचीत कर रही है।
इसलिए करना चाहती है निवेश
अमेजन इस निवेश के जरिए अपने मुनाफे को बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही वो अपने ग्रोसरी बिजनेस को भी बढ़ाना चाहती है, जिसके लिए अभी विदेशी कंपनियां सीधे तौर पर फूड रिटेल बिजनेस में निवेश नहीं कर सकती हैं। कंपनी को अपना ग्रोसरी बिजनेस बढ़ाने के लिए केवल भारत में तैयार खाद्य उत्पादों को बेचने की अनुमति होगी।