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तेज होगा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कारोबार, ऑनलाइन कंपनियों ने कसी कमर
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:56 AM IST
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देश में ऑनलाइन कारोबार कर रही कंपनियां अब अपनी सेवाएं हिंदी तथा क्षेत्रीय भाषाओं में मुहैया कराने पर जोर दे रही हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, देश में अंग्रेजी की तुलना में हिंदी सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटल मनोरंजन एवं कंटेंट में लोगों का आकर्षण कहीं अधिक है।
लेकिन सेवाओं और प्रस्तुतियों में क्षेत्रीय भाषा की मौजूदगी नहीं है, क्योंकि फिलहाल इंटरनेट के उद्यम क्षेत्र की भाषा अंग्रेजी है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करने वालों को खरीद, टिकट बुकिंग इत्यादि में अंग्रेजी जानने वालों की सहायता लेनी पड़ती है।
देश में वर्तमान में इंटरनेट पर 39 फीसदी लोग हिंदी भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं, जबकि 60 फीसदी लोग क्षेत्रीय भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं। महज एक फीसदी लोग अंग्रेजी भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं।
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क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा
आईएएमएआई एवं आईएमआरबी इंटरनेशनल के अध्ययन के मुताबिक, सेवाओं एवं प्रस्तुतियों के क्षेत्र में अगर देसी भाषा की वेबसाइट या एप मुहैया हो, तो क्षेत्रीय भाषा जानने वाले ग्राहक ऑनलाइन व्यवसाय में नई तेजी लाने में मददगार साबित होंगे। इससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
अध्ययन के अनुसार, कंपनियां और सरकार सेवाओं और प्रस्तुतियों को क्षेत्रीय भाषा में मुहैया कराने के लिए बदलाव कर रही हैं। उदाहरण के लिए भारतीय रेलवे ने इंटरनेट पर टिकटों की बुकिंग हिंदी में शुरू की है। ऐसे में क्षेत्रीय कंटेंट की बढ़ती उपलब्धता से एक साल में देश के बाजार में 24 फीसदी की वृद्धि होगी। वर्तमान में 50 करोड़ से ज्यादा आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल करती है।
कंटेंट में भाषाओं की विविधता बढ़ी
अध्ययन में कहा गया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां, रिटेल, फिनटेक एवं इंटरनेट पर व्यवसाय करने वाले अन्य उद्योग अपने पोर्टल में क्षेत्रीय भाषा का समावेश कर रहे हैं। संदेश क्षेत्र में शेयरचैट ने हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी सहित 14 भाषाओं में सेवा शुरू की है। उसके सीबीओ सुनील कामत का कहना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में सेवा शुरू करने से इसका तीन करोड़ ग्राहकों तक विस्तार हुआ है।
मौजूदा समय में देश में व्यवसाय करने वाला ऑनलाइन बाजार का एक फीसदी हिस्सा भी क्षेत्रीय भाषाओं में नहीं है। इसके चलते आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में डिजिटल तरीके से खरीद होती है, वहीं कस्बों, ग्रामीण या दूरदराज क्षेत्रों के ग्राहकों तक कंपनियों की पहुंच नहीं बन रही है।
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लेकिन सेवाओं और प्रस्तुतियों में क्षेत्रीय भाषा की मौजूदगी नहीं है, क्योंकि फिलहाल इंटरनेट के उद्यम क्षेत्र की भाषा अंग्रेजी है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करने वालों को खरीद, टिकट बुकिंग इत्यादि में अंग्रेजी जानने वालों की सहायता लेनी पड़ती है।
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देश में वर्तमान में इंटरनेट पर 39 फीसदी लोग हिंदी भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं, जबकि 60 फीसदी लोग क्षेत्रीय भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं। महज एक फीसदी लोग अंग्रेजी भाषा वाले कंटेंट को ब्राउज करते हैं।
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क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा
आईएएमएआई एवं आईएमआरबी इंटरनेशनल के अध्ययन के मुताबिक, सेवाओं एवं प्रस्तुतियों के क्षेत्र में अगर देसी भाषा की वेबसाइट या एप मुहैया हो, तो क्षेत्रीय भाषा जानने वाले ग्राहक ऑनलाइन व्यवसाय में नई तेजी लाने में मददगार साबित होंगे। इससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
अध्ययन के अनुसार, कंपनियां और सरकार सेवाओं और प्रस्तुतियों को क्षेत्रीय भाषा में मुहैया कराने के लिए बदलाव कर रही हैं। उदाहरण के लिए भारतीय रेलवे ने इंटरनेट पर टिकटों की बुकिंग हिंदी में शुरू की है। ऐसे में क्षेत्रीय कंटेंट की बढ़ती उपलब्धता से एक साल में देश के बाजार में 24 फीसदी की वृद्धि होगी। वर्तमान में 50 करोड़ से ज्यादा आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल करती है।
कंटेंट में भाषाओं की विविधता बढ़ी
अध्ययन में कहा गया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां, रिटेल, फिनटेक एवं इंटरनेट पर व्यवसाय करने वाले अन्य उद्योग अपने पोर्टल में क्षेत्रीय भाषा का समावेश कर रहे हैं। संदेश क्षेत्र में शेयरचैट ने हरियाणवी, राजस्थानी और भोजपुरी सहित 14 भाषाओं में सेवा शुरू की है। उसके सीबीओ सुनील कामत का कहना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में सेवा शुरू करने से इसका तीन करोड़ ग्राहकों तक विस्तार हुआ है।
मौजूदा समय में देश में व्यवसाय करने वाला ऑनलाइन बाजार का एक फीसदी हिस्सा भी क्षेत्रीय भाषाओं में नहीं है। इसके चलते आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में डिजिटल तरीके से खरीद होती है, वहीं कस्बों, ग्रामीण या दूरदराज क्षेत्रों के ग्राहकों तक कंपनियों की पहुंच नहीं बन रही है।