फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   NITI Ayog VP said Public sector banks will only survive when government intervention is low

सरकारी दखल कम होने पर ही बाजार में टिक पाएंगे सार्वजनिक बैंक: नीति आयोग उपाध्यक्ष

Wed, 13 Dec 2017 03:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 13 Dec 2017 03:35 PM IST
विज्ञापन
NITI Ayog VP said Public sector banks will only survive when government intervention is low
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया - फोटो : SBI
सरकारी बैंकों के कामकाज को सुधारने के लिए उनमें सरकार की हिस्सेदारी और दखलंदाजी कम करनी होगी। इसके बाद ही निजी बैंकों से बाजार में मुकाबला कर पाएंगे और सीएजी और सीवीसी जैसी संस्थाओं के नियंत्रण से भी बाहर हो पाएंगे। फिलहाल सरकारी  बैंकों में सरकार की कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी है। ये विचार नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के हैं।
विज्ञापन


नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि सरकारी बैंकों के कामकाज में सबसे बड़ी बाधा है, उन पर नान-परफार्मिंग एसेट्स का बढ़ता बोझ। इसे चुकाने में कर्जदाता नाकामयाब रहता है। यह जनता का पैसा है, इसलिए इस पर सरकार से ज्यादा नियंत्रण जनता का होना चाहिए। 
विज्ञापन


सरकारी बैंकों पर बडे़ उद्योगों के कई लाख करोड़ के कर्ज बकाया हैं जिन्हें बैड लोन करार दे दिया गया है। इनमें से कई कर्ज सरकार या राजनीतिक दलों के दबाव में दे दिए जाते हैं। इनमें किंगफिशर एयरलाइन का ताजा उदाहरण है। डूबती हुई कंपनी होने के बावजूद आईडीबीआई बैंक ने विजय माल्या की  कंपनी को सैकड़ों करोड़ रुपए का कर्ज दे दिया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राजीव कुमार का मानना है कि पीजे नायक कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक इन बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी को एक अलग होल्डिंग कंपनी के हवाले कर देना चाहिए। वह इसमें सरकार की हिस्सेदारी घटाकर बाजार से पैसे जुटाकर जनता की हिस्सेदारी बढ़ाएगी।

लेहमान से लेकर नोटबंदी तक पिछले 10 सालों में अर्थव्यवस्था में लाए बड़े बदलावों पर लिखी तमाल बंदोपाद्धयाय की किताब के विमोचन समारोह में नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि, 'इस कंपनी के बोर्ड में कुछ सरकारी अधिकारी हो सकते हैं लेकिन इससे उन पर सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण खत्म हो जाएगा। इससे वे न सिर्फ सरकार के दबाव में बैड लोन देने से बचेंगे बल्कि उन पर सीएजी और सीवीसी जैसी सरकारी संस्थाओं का अंकुश खत्म हो जाएगा। अभी वे काफी फैसले इसी दबाव में नहीं ले पाते कि ये संस्थाएं उनके फैसलों की समीक्षा करेंगी। हालांकि इस निजीकरण के बावजूद वे रिजर्व बैंक की नीतियों के अनुसार ही चलने को बाध्य होंगे।' 

राजीव कुमार सरकारी बैंकों को विदेशी बैंकों के हवाले करने के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि फिलीपींस की राजधानी मनीला में नौ साल के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने किसी देश की अर्थव्यवस्था पर विदेशी बैंकों के असर को बहुत करीब से देखा है। 

राजीव कुमार के प्रस्ताव अव्यावहारिक हैं: स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन

NITI Ayog VP said Public sector banks will only survive when government intervention is low
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : WordPress
किताब विमोचन समारोह में मौजूद स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन प्रदीप चौधरी ने राजीव कुमार के प्रस्तावों को अव्यावहारिक करार दिया। अमर उजाला से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि लोगों को सरकारी बैंकों पर तभी तक भरोसा है जब तक उन पर सरकार का ठप्पा लगा है। उनका निजीकरण होते ही लोग वहां से अपनी पूंजी निकाल लेंगे।

कोटक महिंद्रा और इंडस्ट्री इंड जैसे निजी बैंकों द्वारा जमा खाते पर छह फीसदी ब्याज दिए जाने के बावजूद लोग अभी भी साढ़े तीन फीसदी ब्याज देने वाले सरकारी बैंकों में पैसा इसीलिए जमा करते हैं क्योंकि इनकी विश्वसनीयता अधिक है। इसके अलावा सरकारी बैंकों के सामाजिक सरोकार भी हैं जो उनका निजीकरण होते ही तिरोहित कर दिए जाएंगे। निजी बैंकों का केवल एक ही सरोकार होता है -लाभ कमाना जबकि सरकारी बैंक ग्रामीण अंचलों में भी बैंकिंग सुविधा प्रदान कर रहे हैं। 

सरकार से पूछ कर रेट तय करे आरबीआई
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भारतीय रिजर्व बैंक को ऐसी नीतियां बनाने की सलाह दी है जिनसे रोजगार के अवसर पैदा हों। उनका कहना था कि रिजर्व बैंक का काम केवल ब्याज दर घटाना-बढ़ाना या एक्सचेंज रेट तय करना भर नहीं है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान के पूछने पर कि आरबीआई रोजगार के अवसर कैसे पैदा कर सकता है, राजीव कुमार ने कहा कि सरकार से सलाह करके ही उसे रेट तय करने चाहिए। 

पिछले कुछ समय से सरकार और आरबीआई के बीच ब्याज दर को लेकर तनातनी चल रही है। सरकार चाहती है कि रेट कम हों जिससे बाजार में तरलता आए जबकि पिछले कई बार से आरबीआई ने  ब्याज दर को कम करने का फैसला नहीं लिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed