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सरकार ने उठाया बड़ा कदम, आयात से पहले ही तय हो जाएगा माल का एमआरपी

Thu, 04 May 2017 04:13 PM IST
राजीव कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 04 May 2017 04:13 PM IST
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MRP will be fixed before import of goods

चीन से होने वाले आयात को हतोत्साहित करने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब चीन से आने वाले सामान का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पहले ही तय कर दिया जाएगा। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के साथ ही यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।

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चीन से आयातित माल के एमआरपी का खुलासा बंदरगाह पर ही हो जाने से आयात करने वाले कारोबारी सरकार से कर की चोरी नहीं कर पाएंगे और उनका मार्जिन काफी कम रह जाएगा। ऐसे में कारोबारी कम मुनाफे के लिए अधिक जोखिम नहीं लेंगे।
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वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गत वित्त वर्ष 2016-17 के अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत व चीन के बीच 64.57 अरब डॉलर का कारोबार किया गया। इनमें से भारत ने चीन में मात्र 8.69 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि चीन से भारत ने 55.63 अरब डॉलर का आयात किया।
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100 रुपये के माल पर बिल बनवाते थे 50 रुपये का
चीन से माल मंगाने वाले कारोबारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अब तक के चलन के मुताबिक चीन से 100 रुपये के माल की खरीदारी पर वह भारत में उसकी कीमत 50 रुपये ही बताते थे और चीन से माल भेजने वाले को 50 रुपये का ही बिल बनाने के लिए कहते थे। ऐसे में आयातित माल पर लगने वाला कर 50 रुपये के हिसाब से लगता था और वह घरेलू बाजार में उन चीजों की कीमत खुद तय करते थे। लेकिन जीएसटी लागू होने पर आयात होने वाली छोटी-छोटी वस्तुओं को एमआरपी के साथ ही आयात करना होगा। कारोबारियों के मुताबिक, ऐसे में सरकार से कर चोरी की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाएगी और उनका मार्जिन भी काफी कम हो जाएगा।


उत्पादों के क्लीयरेंस में की जा रही है देरी
कारोबारियों ने बताया कि सरकार की तरफ  से चीन से आने वाले उत्पादों को हतोत्साहित करने का काम शुरू हो गया है। देश में आते ही बाजार में बिकने वाले छोटे-छोटे उत्पादों के बंदरगाह पर क्लीयरेंस में काफी समय लगाया जा रहा है और बाजार में बिकने को तैयार माल के कंटेनर की पूरी जांच हो रही है ताकि कारोबारी देरी से दुखी होकर चीन से माल मंगाना छोड़ दें। कारोबारियों ने बताया कि दूसरी तरफ  चीन से आने वाली मशीनों के आयात में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। मशीनों को बंदरगाह पर तुरंत क्लीयरेंस मिल रहा है।

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