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जीएसटी से ऑनलाइन खरीदारी हो जाएगी महंगी
राजीव कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 27 Apr 2017 06:38 AM IST
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आगामी जुलाई से ई-कॉमर्स कंपनियों से खरीदारी फायदे का सौदा नहीं रह जाएगा। अभी आए दिन ई-कॉमर्स कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर सेल व महासेल का आयोजन करती रहती हैं, जहां ग्राहक बाजार के मुकाबले 10-25 फीसदी तक सस्ते दाम पर सामान की खरीदारी करते हैं। लेकिन एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद इस प्रकार की सेल का आयोजन आसान नहीं रह जाएगा।
जीएसटी के तहत ई-कामर्स कंपनियों व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं दोनों के लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। उन्हें किसी प्रकार की कोई सीमा रेखा छूट भी नहीं दी गई है। वहीं 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले दुकानदार जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे।
कंपनियां पहले ही ले लेंगी विक्रेताओं से 1 फीसदी कर
अमेजॉन, स्नैपडील व फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अनुमान के मुताबिक जीएसटी के नियम के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने वाले विक्रेताओं से उन्हें पहले ही एक फीसदी का कर लेना होगा।
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इससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने वाले विक्रेताओं की 400 करोड़ रुपये की पूंजी साल भर के लिए फंस जाएगी। कार्यशील पूंजी फंसने से उनकी लागत बढ़ेगी और उसकी वसूली खरीदारों से ही की जाएगी।
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जीएसटी के तहत ई-कामर्स कंपनियों व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं दोनों के लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। उन्हें किसी प्रकार की कोई सीमा रेखा छूट भी नहीं दी गई है। वहीं 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले दुकानदार जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे।
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कंपनियां पहले ही ले लेंगी विक्रेताओं से 1 फीसदी कर
अमेजॉन, स्नैपडील व फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अनुमान के मुताबिक जीएसटी के नियम के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने वाले विक्रेताओं से उन्हें पहले ही एक फीसदी का कर लेना होगा।
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इससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने वाले विक्रेताओं की 400 करोड़ रुपये की पूंजी साल भर के लिए फंस जाएगी। कार्यशील पूंजी फंसने से उनकी लागत बढ़ेगी और उसकी वसूली खरीदारों से ही की जाएगी।
कर के दायरे में नहीं होने से छोटे ऑनलाइन विक्रेता सस्ते में बेच देते थे माल
कर के दायरे में नहीं होने से छोटे ऑनलाइन विक्रेता सस्ते में बेच देते थे माल
चार्टर्ड एकाउंटेंट हिमांशु कुमार के मुताबिक, स्पष्ट नियम नहीं होने की वजह से अब तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बिक्री करने वाले छोटे-छोटे विक्रेताओं की कोई खोज-खबर नहीं होती थी। ये विक्रेता कर दे रहे थे या नहीं, कुछ भी साफ नहीं था। कर के दायरे में नहीं आने से विक्रेता अपने माल को सस्ते दाम में बेच देते थे।
लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स विभाग के उपायुक्त स्तर के अधिकारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर पूरे विक्रेताओं का ब्योरा मांग सकते हैं और कर वसूली की जानकारी ले सकते हैं। ऐसे में पहले के मुकाबले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की मुफीद जगह नहीं रह जाएगी। विक्रेताओं का मार्जिन प्रभावित होगा और वे ऊंचे दाम पर सामान बेचेंगे।
कंपनियां खुद बताएंगी विक्रेताओं की संख्या
कुमार ने बताया कि जीएसटी के तहत सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाली कंपनियां स्वयं ही सरकार को यह बता देंगी कि उनके प्लेटफॉर्म पर कितने विक्रेता हैं।
जीएसटी के तहत विभिन्न प्रकार के नियमों के पालन की बाध्यता की वजह से ई-कॉमर्स कंपनियों की लागत हर हाल में बढ़ेगी। इस बढ़ी हुई लागत की वसूली के लिए वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी लाजिमी है।
चार्टर्ड एकाउंटेंट हिमांशु कुमार के मुताबिक, स्पष्ट नियम नहीं होने की वजह से अब तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बिक्री करने वाले छोटे-छोटे विक्रेताओं की कोई खोज-खबर नहीं होती थी। ये विक्रेता कर दे रहे थे या नहीं, कुछ भी साफ नहीं था। कर के दायरे में नहीं आने से विक्रेता अपने माल को सस्ते दाम में बेच देते थे।
लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स विभाग के उपायुक्त स्तर के अधिकारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर पूरे विक्रेताओं का ब्योरा मांग सकते हैं और कर वसूली की जानकारी ले सकते हैं। ऐसे में पहले के मुकाबले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की मुफीद जगह नहीं रह जाएगी। विक्रेताओं का मार्जिन प्रभावित होगा और वे ऊंचे दाम पर सामान बेचेंगे।
कंपनियां खुद बताएंगी विक्रेताओं की संख्या
कुमार ने बताया कि जीएसटी के तहत सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाली कंपनियां स्वयं ही सरकार को यह बता देंगी कि उनके प्लेटफॉर्म पर कितने विक्रेता हैं।
जीएसटी के तहत विभिन्न प्रकार के नियमों के पालन की बाध्यता की वजह से ई-कॉमर्स कंपनियों की लागत हर हाल में बढ़ेगी। इस बढ़ी हुई लागत की वसूली के लिए वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी लाजिमी है।