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'कर्ज लेने के नियमों में बदलाव से नहीं थमेगी रुपए की गिरावट'
भाषा, मुंबई
Updated Thu, 04 Oct 2018 05:04 PM IST
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पेट्रोलियम कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज लेने के नियम सरल करने से रुपये की गिरावट को थामने में कोई ठोस मदद नहीं मिलेंगे। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने गुरुवार को यह बात कही। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी ने एक नोट में कहा कि सरकार के पूर्व के कदम मसलन गैर आवश्यक वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाने का भी रुपये की गिरावट को थामने में उल्लेखनीय प्रभाव नहीं होगा क्योंकि वह कोई बड़ा कदम नहीं था।
बोफाएमएल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के लिए बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) की सीमा को बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करने से रुपये की गिरावट को थामने में खास मदद नहीं मिलने वाली क्योंकि कंपनियों पर चालू वित्त वर्ष में अल्पावधिक विदेशी कर्जों को निपटाने पर भी बड़ा धन खर्च करना है। इन पर अल्पावधिक विदेशी वाणिज्यिक ऋण का भार चालू वित्त वर्ष में 15 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
बोफाएमएल ने कहा कि ऐसी चर्चा चल रही है कि तेल आयातकों के लिए रिण की अदला बदली की कोई विशेष सुविधा दी जा सकती, लेकिन रिजर्व बैंक के लिए ऐसा करने की गुंजाइश नहीं है।
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बोफाएमएल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के लिए बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) की सीमा को बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करने से रुपये की गिरावट को थामने में खास मदद नहीं मिलने वाली क्योंकि कंपनियों पर चालू वित्त वर्ष में अल्पावधिक विदेशी कर्जों को निपटाने पर भी बड़ा धन खर्च करना है। इन पर अल्पावधिक विदेशी वाणिज्यिक ऋण का भार चालू वित्त वर्ष में 15 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
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बोफाएमएल ने कहा कि ऐसी चर्चा चल रही है कि तेल आयातकों के लिए रिण की अदला बदली की कोई विशेष सुविधा दी जा सकती, लेकिन रिजर्व बैंक के लिए ऐसा करने की गुंजाइश नहीं है।
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