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धोखाधड़ी का पता लगाने में बैंकों को लग जाते हैं दो साल
Wed, 26 Aug 2020 05:07 AM IST
Amit Mandal
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 26 Aug 2020 05:07 AM IST
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आरबीआई ने कहा है कि बैंकों की लापरवाही की वजह से समय रहते धोखाधड़ी का पता नहीं लग पाता है। यही कारण है कि बैंकिंग फर्जीवाड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को जारी 2019-20 की सालाना रिपोर्ट में कहा कि बैंक चेतावनी के शुरुआती संकेतों (ईडब्ल्यूएस) का सख्ती से पालन नहीं करते, जिससे धोखाधड़ी का पता लगाने में दो साल लग जाते हैं।
आरबीआई ने कहा, 100 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का पता लगाने में तो बैंकों को 5 साल लग जाते हैं। लापरवाही की वजह से ही 2019-20 में बैंक धोखाधड़ी के मामले 28 फीसदी बढ़े। अगर राशि की बात करें तो इसमें 129 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा 76 फीसदी फर्जीवाड़ा लोन से जुड़ा है। बैंक अगर ईडब्ल्यूएस का सख्ती से पालन करें और आंतरिक ऑडिट व फोरेंसिक ऑडिट में सावधानी बरतें तो धोखाधड़ी का जल्द पता लगाया जा सकता है।
एमएसपी नहीं, व्यापार नीति है कृषि क्षेत्र का स्थायी समाधान
रिजर्व बैंक ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने से कृषि क्षेत्र का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता है। अगर कृषि उत्पादों के लिए नई व्यापार नीतियां प्रभावी तरीके से लागू हों, तो उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। पिछले कुछ समय में कृषि क्षेत्र के लिए अनुकूल व्यापार होने से सकल मूल्य संवर्द्धन (जीवीए) 3 फीसदी बढ़ा है। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित कई नीतियों में बदलाव के बाद कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की संभावना बढ़ गई है।
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आरबीआई ने कहा, 100 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का पता लगाने में तो बैंकों को 5 साल लग जाते हैं। लापरवाही की वजह से ही 2019-20 में बैंक धोखाधड़ी के मामले 28 फीसदी बढ़े। अगर राशि की बात करें तो इसमें 129 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा 76 फीसदी फर्जीवाड़ा लोन से जुड़ा है। बैंक अगर ईडब्ल्यूएस का सख्ती से पालन करें और आंतरिक ऑडिट व फोरेंसिक ऑडिट में सावधानी बरतें तो धोखाधड़ी का जल्द पता लगाया जा सकता है।
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एमएसपी नहीं, व्यापार नीति है कृषि क्षेत्र का स्थायी समाधान
रिजर्व बैंक ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने से कृषि क्षेत्र का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता है। अगर कृषि उत्पादों के लिए नई व्यापार नीतियां प्रभावी तरीके से लागू हों, तो उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी बढ़ोतरी की जा सकती है। पिछले कुछ समय में कृषि क्षेत्र के लिए अनुकूल व्यापार होने से सकल मूल्य संवर्द्धन (जीवीए) 3 फीसदी बढ़ा है। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित कई नीतियों में बदलाव के बाद कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की संभावना बढ़ गई है।
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