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इस साल चीन से 13 फीसदी घटा आयात, जबकि निर्यात में 16 फीसदी की हुई बढ़ोतरी

Tue, 08 Dec 2020 12:57 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 08 Dec 2020 12:57 AM IST
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Imports from China decreased by 13 percent in this year, while exports increased by 16 percent
भारत-चीन

सीमा पर जारी विवाद और अर्थव्यवस्था पर कोरोना महामारी के झटकों के बीच इस साल चीन से आयात में 13 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि निर्यात में 16 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। 

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1.40 लाख करोड़ के उत्पाद निर्यात किए भारत ने 11 महीने में
चीन के सीमा शुल्क विभाग की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से नवंबर के बीच यानी पिछले 11 महीने में भारत ने चीन को 19 अरब डॉलर (करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये) के उत्पादों का निर्यात किया है। निर्यात का यह आंकड़ा 16 फीसदी ज्यादा है। इस दौरान भारत ने चीन से 59 अरब डॉलर (करीब 4.36 लाख करोड़ रुपये) के उत्पादों का आयात किया है।
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सीमा पर जारी विवाद के बीच और चीनी सामानों के बहिष्कार से आयात में आई कमी
यह आंकड़ा 13 फीसदी गिरावट को दर्शाता है। इस साल के पहले 10 महीनों में चीन से आयात में 16.2 फीसदी की गिरावट आई रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर जारी विवाद के कारण भारत में चीन के उत्पादों का बड़े स्तर पर बहिष्कार हुआ। इससे कारोबारियों ने चीन से आयात में कटौती की, जिसे आयात के आंकड़ों में गिरावट देखने को मिली है। उधर, ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि महामारी के कारण भारत की आंतरिक मांग में गिरावट आई है। इसका असर चीन से निर्यात पर पड़ा है।  
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चीन के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था भारत
बीजिंग में भारतीय दूतावास ने इन आंकड़ों को संग्रह किया है। इसके मुताबिक, 2019 में भारत चीनी कार्बनिक रसायन, उवर्रक, एंटीबायोटिक्स और एल्युमीनियम फ्वॉयल के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था। वहीं, चीन कार्बनिक रसायन, लौह अयस्क, कच्चे हीरे, मछली, कपास और ग्रेनाइट पत्थर का शीर्ष आयातक था। 

एक दशक में पहली बार कम हुआ व्यापार घाटा
दरअसल, 2019 के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा एक दशक में पहली बार कम हुआ। इस दौरान 2005 के बाद व्यापार घाटा 2 फीसदी कम होकर 56.95 अरब डॉलर रहा था। पिछले साल भारत और चीन के बीच 92.89 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था। इस दौरान अमेरिका, जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, मलयेशिया, ब्राजील और रूस के बाद भारत चीन का 12वां सबसे बड़ा कारोबारी भागीदार था। 

चीन में चावल खरीद के फैसले का स्वागत
 इस बीच, चीनी मीडिया ने भारत से चावल खरीद के फैसला का सावधानीपूर्वक स्वागत किया है। चीन ने तीन दशक में पहली बार भारत से बड़े पैमाने पर चावल का आयात करना शुरू किया है। इस बीच, भारतीय कारोबारियों ने दिसंबर-फरवरी के बीच चीन को 300 डॉलर प्रति टन के हिसाब से एक लाख टन टूटे चावल के निर्यात का अनुबंध किया है।


दरअसल, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान से चीन चावल खरीदता है। लेकिन, आपूर्ति में गिरावट के कारण चीन को 10 गुना ज्यादा कीमत पर भारत से आयात करना पड़ रहा है। भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि चीन सबसे बड़ा आयातक। पड़ोसी देश सालाना करीब 40 लाख टन चावल खरीदता है।

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