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कुछ वस्तुओं पर दरें घटा सकता है जीएसटी परिषद, चीनी पर नहीं लगेगा सेस

Wed, 11 Jul 2018 05:56 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 11 Jul 2018 05:56 PM IST
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gst council may cut tax on sanitary napkins, no cess on sugar

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद 21 जुलाई को होने वाली अपनी अगली बैठक में उन वस्तुओं पर जीएसटी दरों को घटाने पर विचार कर सकता है, जिनसे राजस्व पर बहुत ज्यादा असर नहीं पडे़गा। जिन वस्तुओं पर दरें घटाने पर विचार किया जा सकता है, उनमें सैनिटरी नैपकिन, हस्तशिल्प तथा हथकरघा वस्तुएं शामिल हो सकती हैं, इसके अलावा कुछ सेवाओं पर भी दरें घटाई जा सकती हैं।

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इन पर घट सकती है कर की दर
उल्लेखनीय है कि कई औद्योगिक संगठन तथा हितधारक सामान्य स्वास्थ्य देखभाल तथा असंगठित क्षेत्र में रोजगारों का सृजन करने से संबंधित वस्तुओं पर जीएसटी दर घटाने की मांग कर रहे हैं।
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एक अधिकारी ने कहा कि हितधारकों की मांग के मद्देनजर, बैठक के दौरान परिषद विभिन्न वस्तुओं पर कर की दरों में बदलाव का मुद्दा उठाएगा।

यह मूलत: उन वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो सामान्य खपत के होते हैं और उनका राजस्व पर कम असर पड़ता हो। अधिकांश हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों के साथ सैनिटरी नैपकिन पर वर्तमान में 12 फीसदी का कर लगता है, जबकि इन्हें कर से मुक्त रखने की मांग की गई है। 

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चीनी पर सेस नहीं 

gst council may cut tax on sanitary napkins, no cess on sugar

मंत्रियों के एक समूह ने बुधवार को एथेनॉल पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने की सिफारिश की, लेकिन उसने चीनी पर सेस लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, क्योंकि गन्ना किसानों के बकाया पहले से घटा है।

अधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी की मौजूदा व्यवस्था के तहत चीनी पर सेस लगाया जाए या नहीं, इस पर फैसला लेने से पहले असम के वित्त मंत्री हेमंत बिश्वा शर्मा के नेतृत्व वाला मंत्रिसमूह महान्यायवादी की राय का भी इंतजार करेगा।

लक्जरी वस्तुओं पर लग सकता है सेस
अगर उनकी राय अनुकूल होती है, तो मंत्रिसमूह लक्जरी सामानों पर एक फीसदी कृषि सेस लगाने के विकल्प पर विचार कर सकता है, जिसका इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में किसी भी तरह की अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने में किया जा सकता है।

चीनी की आपूर्ति पर पांच फीसदी जीएसटी के अलावा, प्रति किलोग्राम तीन रुपये तक का सेस लगाने के केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए जीएसटी परिषद ने मई में हुई अपनी अंतिम बैठक में मंत्रिसमूह का गठन किया था।

जमा होंगे 6700 करोड़ रुपये
शुल्क लगाने से जमा एकत्रित होने वाली राशि, लगभग 6,700 करोड़ रुपये होगी, जिसे एक अलग फंड में रखा जाएगा और उसका इस्तेमाल चीनी क्षेत्र तथा गन्ना किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए किया जाएगा। मंत्रिसमूह की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में शर्मा ने कहा कि चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रति किलोग्राम 29 रुपये तय करने के बाद किसानों का गन्ना बकाया 5,000 करोड़ रुपये घटकर 18,000 करोड़ रुपये पर आ गया है।

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