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Hindi News ›   Business ›   G-20 countries will formulate policy for tax collection from big digital companies

बड़ी डिजिटल कंपनियों से टैक्स वसूली के लिए नीति बनाएंगे जी-20 देश

Fri, 31 May 2019 06:08 AM IST
Avdhesh Kumar एजेंसी, टोक्यो
एजेंसी, टोक्यो Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 31 May 2019 06:08 AM IST
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G-20 countries will formulate policy for tax collection from big digital companies
टैक्स
जी-20 देश इंटरनेट क्षेत्र में कारोबार करने वाली दुनियाभर की दिग्गज डिजिटल कंपनियों के लिए नई कर नीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें किसी कंपनी पर टैक्स लगाने अधिकार उस देश को दिया जाएगा, जहां वह कारोबार कर रही है। अगले महीने होने वाले जी-20 देशों के शीर्ष नेताओं के सम्मेलन में इस पर अंतिम सहमति बन सकती है।
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जापान के शीर्ष बिजनेस अखबार ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि जापान के फुकुओका शहर में अगले महीने होने वाली बैठक में इस आधार नीति पर जी-20 समूह के सभी सदस्यों देशों के वित्त मंत्री हस्ताक्षर करेंगे। आम सहमति बनने के बाद अंतिम करार 2020 तक तैयार कर लिया जाएगा। 
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हालांकि, अभी इसका फैसला नहीं हुआ है कि यह नीति किस तरह काम करेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि नई नीति के तहत कंपनियों को कर के रूप में अपने राजस्व का हिस्सा उस देश को देना होगा, जहां उसके उपभोक्ता हैं। हालांकि, टैक्स किस तरह एकत्र किया जाएगा और इसका बंटवारा कैसे होगा, इस पर आर्थिक एवं विकास संगठन ही अंतिम रूप से फैसला करेगा। 
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भारत को होगा बड़ा फायदा

नई कर नीति का भारत जैसे देशों को बड़ा फायदा मिल सकता है। नई नीति में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि कोई वैश्विक कंपनी अपने टैक्स की गणना और भुगतान उस देश में लगने वाली दर के हिसाब से नहीं करेगी, जहां उसका मुख्यालय है। अब कंपनियों को टैक्स का भुगतान जिन देशों में कारोबार स्थित है, उनके हिसाब से देना होगा। इसकी गणना उस देश में कंपनी के उपभोक्ताओं की संख्या पर आधारित होगी। ऐसे में भारत को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अरबों का टैक्स मिलने का रास्ता खुल सकता है।


इन कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

नई नीति का सबसे ज्यादा असर गूगल, एपल, फेसबुक और अमेजन जैसी कंपनियों पर होगा। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, स्नैप, अलीबाबा, टेनसेंट, नेटफ्लिक्स, बुकिंग, ई-बे, उबर, फ्लिपकार्ट, ट्विटर और ट्रिपएडवाइजर सहित दो दर्जन से ज्यादा बहुराष्ट्रीय इंटरनेट कंपनियां नए कानून के दायरे में आएंगी।
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