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फूड डिलीवरी एप कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर स्वदेशी जागरण मंच की ‘टेढ़ी नजर’

Thu, 14 Feb 2019 04:26 PM IST
Harendra Chaudhary बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Feb 2019 04:26 PM IST
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food delivery apps Zomato, swiggy and foodpanda are violating FDI rules, swadeshi jagran manch slams
Swiggy Food Order & Delivery

मोबाइल एप के जरिए फूड डिलीवरी करने वाली कंपनियां हजारों करोड़ के घाटे में हैं, बावजूद इसके उन्हें 5.5 करोड़ ऑर्डर हर महीने मिल रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने इन कंपनियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों की तरह इन पर सख्ती करने की मांग की है।

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दो सालों में 1371 करोड़ का घाटा

एप के जरिए फूड डिलिवरी इन दिनों देश में काफी पॉपुलर है और स्विगी, जौमेटो, ऊबर ईट्स और फूड पांडा जैसे कंपनियां घाटे के बावजूद ग्राहकों को डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। मार्च 2018 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में इन्हें 731 करोड़ का घाटा हुआ, वहीं 2016-17 में इन्हें 640 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा। कुल मिला कर इन कंपनियों को दो सालों में 1371 करोड़ का घाटा हुआ। लेकिन बढ़ते घाटे के बावजूद ये कंपनियां डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं।
 

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एफडीआई नियमों का उल्लंघन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आर्थिक मामलों की शाखा स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि कंपनियां सीधे-सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से ई-कॉमर्स कंपनियां डिस्काउंट के जरिए नियमों को तोड़ रही थीं और ई-कॉमर्स नीति लाकर उन पर शिंकजा कसा गया, वैसे ही फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए अलग से नीति बनाए जाने की जरूरत है।
 

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हर माह एप से 5.5 करोड़ ऑर्डर

वहीं इन कंपनियों का तर्क है कि वे ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने के लिए ऑफर और डिस्काउंट दे रही हैं। अभी देश में हर माह एप से 5.5 करोड़ ऑर्डर दिए जा रहे हैं, जिनमें 2.5 करोड़ स्विगी और 2 करोड़ जोमैटो पर आते हैं। वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि 2021 तक भारत में एप के जरिए फूड डिलिवरी बिजनेस चार गुना बढ़कर 2.5 अरब डॉलर (करीब 17.7 हजार करोड़ रुपए) का हो जाएगा।
 

सरकार को लिखने वाले हैं पत्र

महाजन के मुताबिक वे जल्द ही इस बारे में सरकार को पत्र लिखने वाले हैं और मांग करने वाले हैं कि इन कंपनियों पर भी सख्ती की जाए ताकि छोटे व्यापारियों और रेस्टोरेंट मालिकों के हितों की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों का मॉडल भी ठीक ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसा है। ये विदेशी निवेश के नाम पर पैसा लेकर उसे डिस्कांउट और ऑफर्स पर खर्च कर रही हैं, जिसे एफडीआई नियमों के खिलाफ है। महाजन ने कहा कि अगर इन पर जल्द ही शिकंजा न कसा गया, तो ये छोटे-छोटे रेस्टोरेंट्स पर ताला लगवा देंगी।
 

स्विगी और जोमैटो को 14 हजार करोड़ रुपए का मिला निवेश

स्विगी और जोमैटो को पिछले एक साल में 14 हजार करोड़ रुपए का निवेश मिला है, जिसमें सबसे ज्यादा स्विगी के खाते में आया है। वहीं फूड पांडा को 1.4 हजार करोड़ का निवेश मिलने वाला है। वहीं ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के बाद भी डिस्काउंट दिए जाना जारी है। जोमैटो, उबर ईट्स और फूड पांडा अब भी कई प्रोडक्ट पर 50% तक का डिस्काउंट दे रही हैं। वहीं खर्च के मामले में स्विगी सबसे आगे है। मार्च 2018 में खत्म वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 865 करोड़ खर्च किए।
 

कंपनियां रेवेन्यू (करोड़ो में) घाटा (करोड़ो में)
  2016-17 2017-18 2016-17 2017-18
जोमैटो 332 466 390 106
फूड पांडा 45 89 45 228
स्विगी 133 442 205 397
 
 

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