चार महीने में ही बजट अनुमान का 80 फीसदी पहुंचा राजकोषीय घाटा, सीजीए की रिपोर्ट में खुलासा
- खाता महानियंत्रक (सीजीए) की ओर से शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट
- जुलाई अंत तक राजकोषीय घाटा 5.47 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है
- वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट अनुमान का 77.8 फीसदी है राजकोषीय घाटा
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सरकार का राजकोषीय घाटा चार महीने में ही चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान का करीब 80 फीसदी पहुंच गया है। खाता महानियंत्रक (सीजीए) की ओर से शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई अंत तक राजकोषीय घाटा 5.47 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो 2019-20 के बजट अनुमान का 77.8 फीसदी है। मालूम हो कि राजकोषीय घाटा सरकार की आय और व्यय के बीच का अंतर होता है।
सीजीए के अनुसार, सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान बढ़ाकर 7.03 लाख करोड़ रुपये किया था। जुलाई के अंत तक यह घाटा 5,47,605 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह घाटा 86.5 फीसदी रहा था। जुलाई में पेश बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे को पिछले साल की तरह जीडीपी के अनुपात में 3.4 फीसदी रखने का लक्ष्य बनाया है।
सीजीए आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई में सरकार को मिला कुल राजस्व बजट अनुमान का 19.5 फीसदी रहा, जो पिछले साल में भी इतना ही था। इस साल जुलाई के आखिर तक सरकार को मिला कुल राजस्व 3.82 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि इस दौरान कुल खर्च 9.47 लाख करोड़ रुपये रहा। सरकार ने पूरे साल के दौरान राजस्व का अनुमान 19.62 लाख करोड़ जबकि खर्च 27.86 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।
वास्तविक आंकड़े साल के आखिर तक
सीजीए ने कहा कि मासिक आधार पर जारी राजकोषीय घाटे के आंकड़े पूरी तरह सही नहीं होते और इनसे वास्तविक राजकोषीय स्थिति का पता नहीं चल पाता। इन आंकड़ों में गैर ऋण प्राप्तियों और खर्च के बीच मिलान नहीं हो पाता और अन्य संक्रमणकारी कारकों का भी असर रहता है। लिहाजा राजकोषीय घाटे का वास्तविक आंकड़ा साल के आखिर तक ही सामने आ सकेगा।