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#नोटबंदी: रेटिंग एजेंसी फिच ने घटाया भारत की विकास दर का अनुमान

Wed, 30 Nov 2016 09:34 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Wed, 30 Nov 2016 09:34 AM IST
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Demonetisation effect: Fitch cuts India's FY17 growth forecast to 6.9 pc
फिच (Fitch) रेटिंग्स ने मंगलवार को इस वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.4 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया। फिच ने कहा कि देश में नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधि के लिए कुछ अस्थाई अवरोध रहेंगे। आगे कहा कि अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में आर्थिक गतिविधि को झटका लगेगा, जिसका कारण नकदी की निकासी व 500 और 1,000 रुपये के नोट बदलने से पैदा हुआ नकदी संकट है। 
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फिच ने कहा कि भारतीय विकास दर अनुमान को आर्थिक गतिविधि के लिए अस्थाई अवरोधों को देखते हुए कम किया गया है और इसका संबंध आरबीआई के बड़े मूल्य वर्ग के नोटों को चलन से बाहर करने के फैसले से है। अमेरिका स्थित रेटिंग एजेंसी ने 2017-18 और 2018-19 के लिए भी जीडीपी विकास दर अनुमान को घटाकर 8 फीसदी से 7.7 फीसदी कर दिया है। 
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फिच ने अपने ‘ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक-नवंबर’ रिपोर्ट में कहा कि ढांचागत सुधारों का क्रमिक क्रियान्वयन उच्च विकास दर हासिल करने में योगदान कर सकता है। लेकिन आंकड़ों में चल रही कमजोरी यह दर्शाती है कि निवेश में प्रत्याशित सुधार थोड़ा कम है। नोटबंदी के संबंध में फिच ने कहा कि लोगों के पास खरीदारी के लिए नकदी नहीं है। साथ ही ऐसी रिपोर्ट मिली हैं कि आपूर्ति बाधित हो रही है और किसान बुवाई के लिए बीज और उर्वरक नहीं खरीद पा रहे हैं। बैंकों के बाहर कतारों में समय नष्ट होने से सामान्य उत्पादकता पर भी प्रभाव पड़ेगा। 
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फिच ने कहा कि जीडीपी विकास दर प्रभावित होने से लंबे समय तक व्यवधान जारी रहने की आशंका में बढ़ोत्तरी होगी। जीडीपी विकास दर पर नकदी निकासी का मध्यावधि प्रभाव अनिश्चित है लेकिन इसके बहुत ज्यादा होने की संभावना नहीं है। 

जल्द ही पहले की तरह कारोबार करने लगेगा अनौपचारिक क्षेत्र
फिच ने कहा कि अनौपचारिक क्षेत्र में संचालन करने वाले लोग अभी भी नए मूल्य वर्ग के नोटों का इस्तेमाल करने और अन्य विकल्पों जैसे, सोना आदि के जरिए संपत्ति का संचय करने में सक्षम होंगे। लोगों के लिए नकद लेन-देन को टालने से संबंधित कोई नया प्रोत्साहन नहीं है और अनौपचारिक क्षेत्र जल्द ही पहले की तरह कारोबार करने लगेगा। 


कम लागत वाली फंडिंग बढ़ने से बैंकों की बाधाएं हो सकती हैं दूर
नोटबंदी के कारण कम लागत वाली फंडिंग बढ़ने से बैंकों की बाधाएं दूर हो सकती हैं, जो कर्ज दरों को हाल के सालों में आरबीआई द्वारा दरों में की गई कटौती के साथ गति बनाए रखने से रोके हुए हैं। हालांकि यह अगले कुछ महीनों बाद बैंकों में बचे हुए जमा पर निर्भर करेगा। 
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