फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Corporate ›   Vendors mull insolvency action against BSNL MTNL for pending payments

BSNL-MTNL के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर विचार कर रहे वेंडर

Tue, 05 Nov 2019 10:53 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Tue, 05 Nov 2019 10:53 AM IST
विज्ञापन
Vendors mull insolvency action against BSNL MTNL for pending payments
बीएसएनएल - फोटो : PTI

आर्थिक तंगी से जूझ रही दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के खिलाफ उसके कुछ वेंडर दिवालिया याचिका दायर करने पर विचार कर रहे हैं। इस मामले में उद्योग संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल पर इनके वेंडर्स का करीब 20,000 करोड़ रुपये बकाया है। सभी वेंडर ने 19 नवंबर को इसके खिलाफ प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।

विज्ञापन


इस संदर्भ में पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के टेलीकॉम कमेटी के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने कहा कि बीएसएनएल और एमटीएनएल पर टेलीकॉम उपकरणों और अन्य वस्तुओं के मद में इन वेंडर्स का बकाया है। इतना ही नहीं, कंपनियों ने ग्रामीण ब्रॉडबैंड प्रोजेक्ट भारतनेट के लिए सप्लाई किए गए 45,000 करोड़ रुपये कीमत के टेलीकॉम उपकरण और अन्य संबंधित वस्तुओं का भुगतान भी नहीं किया है।

विज्ञापन

2017-18 में कंपनी को हुआ था इतना नुकसान 

वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसएनएल को 31,287 करोड़ का नुकसान हुआ था। कंपनी में फिलहाल 1.76 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। वीआरएस देने से कर्मचारियों की संख्या अगले 5 सालों में 75 हजार रह जाएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रविशंकर प्रसाद ने दिया निर्देश

हाल ही में बीएसएनएल और एमटीएनएल को भारी-भरकम बेलआउट पैकेज देने के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दोनों कंपनियों से वीआरएस और मुद्रीकरण योजना में तेजी लाने को कहा था। साथ ही उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में अधिक आक्रामक तरीके से काम करने का भी निर्देश दिया था।

कंपनियों को दिया गया मजबूत प्रोत्साहन पैकेज

केंद्रीय मंत्री ने दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल के साथ बैठक में स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें सरकार की ओर से मजबूत प्रोत्साहन पैकेज दिया गया है और अब उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनने के लिए कदम उठाने होंगे। सरकार ने पिछले महीने दोनों कंपनियों की विलय योजना पेश करते हुए करीब 69 हजार करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया था। इस योजना में दोनों कंपनियों की संपत्तियों का मौद्रिकरण और कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना भी शामिल है। सूत्रों ने बताया कि प्रसाद ने दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल से साफतौर पर कहा है कि वे अपने प्रदर्शन में जल्द सुधार लाने का प्रयास करें। 

इन कंपनियों का इतना बकाया है पैसा

  • स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज - 500 करोड़ रुपये
  • तेजस नेटवर्क - 314 करोड़ रुपये
  • एचएफसीएल - 219 करोड़ रुपये
  • पैरामाउंट वायर्स एंड केबल्स - 168 करोड़ रुपये
  • वीएलएल - 150 करोड़ रुपये


मामले में पैरामाउंट ने रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखकर बकाया भुगतान करने का अनुरोध किया था। पत्र में कंपनी ने बताया था कि बैंक उस पर कर्ज लौटाने का दबाव बना रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed