एक स्टार्टअप के रूप में शुरू की गई रिलायंस आज भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी है। रिलायंस की सफलता के बारे में मुकेश अंबानी अपने पिता धीरूभाई अंबानी को याद करते हुए कहते हैं कि, 'रिलायंस एक व्यक्ति के विजन का नतीजा है- मेरे पिता और हमारे फाउंडर धीरूभाई अंबानी। पिछले 40 साल में हमने जितनी तरक्की की है वह उन्हीं की बदौलत है। रिलायंस उनके मजबूत कंधों पर खड़ा है।'
तेजी से तरक्की कर नई ऊंचाइयों पर पहुंची रिलायंस, कोरोना काल में भी किया कमाल
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रिलायंस की बाजार हैसियत सबसे अधिक
भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस के बाजार पूंजीकरण (बाजार हैसियत) की बात करें, तो इस मामले में यह अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती आई है।
- 18 अक्तूबर 2019 में रिलायंस नौ लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनी बन गई थी। यह भारत की पहली कंपनी है जिसका बाजार पूंजीकरण नौ लाख करोड़ रुपये हो गया है।
- 28 नवंबर 2019 को रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 10 लाख करोड़ के पार चला गया था। जबकि उससे पिछले सप्ताह कंपनी की हैसियत 9.50 लाख करोड़ रुपये थी।
- देश के दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की कंपनी का बाजार पूंजीकरण 19 जून 2020 को 11 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया। तब मुकेश अंबानी ने कच्चा तेल से लेकर दूरसंचार तक विस्तृत क्षेत्रों में कारोबार करने वाली अपनी कंपनी के शुद्ध रूप से ऋण-मुक्त होने की घोषणा की थी, जिसके बाद कंपनी का हैसियत में 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई थी।
- इसके बाद छह जुलाई 2020 को RIL ने फिर इतिहास रचा। तब शेयरों में भारी उछाल से इसकी बाजार हैसियत 26,150.05 करोड़ रुपये बढ़कर 11.5 लाख करोड़ के पार यानी 11,59,318.60 करोड़ रुपये हो गई।
- 13 जुलाई 2020 में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 12 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया। शेयर में तेजी के चलते कंपनी का बाजार पूंजीकरण बीएसई पर 38,163.22 करोड़ रुपये बढ़कर 12,29,020.35 रुपये पर पहुंच गया था।
- 22 जुलाई 2020 को रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण तेजी से बढ़ा और 13.17 लाख करोड़ रुपये (176.4 अरब डॉलर) पर पहुंच गया। तब फोर्ब्स की अमीर व्यक्तियों की वास्तविक समय पर जारी की जाने वाली सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी 75 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ पांचवें पायदान पर आ गए थे।
- 24 जुलाई 2020 को रिलायंस ने फिर इतिहास रचा। कारोबार के दौरान रिलायंस का बाजार पूंजीकरण 14 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के पार चला गया था। कंपनी के शेयरों में तेजी के चलते उसने इस मुकाम को हासिल किया था।
- मौजूदा समय में कंपनी की बाजार हैसियत 13.68 लाख करोड़ है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर में गिरावट आई थी और यह 2,080 के स्तर पर बंद हुआ था।
वित्तीय निवेशकों से जुटाया फंड
लॉकडाउन के दौरान वैश्विक कंपनियों ने रिलायंस में जमकर निवेश किया। निवेश का सिलसिला 22 अप्रैल 2020 से फेसबुक से शुरू हुआ और उसके बाद एक के बाद एक कुल 13 कंपनियों ने 1,52,055.85 करोड़ रुपये में रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स की 32.94 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी।
निवेशकों के समूह का हृदय से धन्यवाद - अंबानी
मुकेश अंबानी ने कहा था कि, 'पिछले कुछ हफ्तों से हम जियो में निवेश के लिए वैश्विक वित्तीय निवेशक समुदाय की अभूतपूर्व दिलचस्पी से अभिभूत हैं। वित्तीय निवेशकों से फंड जुटाने का लक्ष्य पूरा हो गया है। हम अपने महत्वपूर्ण निवेशकों के समूह का हृदय से धन्यवाद करते हैं और गर्मजोशी से जियो प्लेटफॉर्म्स में उनका स्वागत करते हैं। मैं सभी खुदरा और घरेलू व विदेशी संस्थागत निवेशकों का राइट्स इश्यू में भारी एवं रिकॉर्ड भागीदारी के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं।'
सऊदी अरामको भी कर सकती है निवेश
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने पिछले दिनों में कहा था कि वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में 15 अरब डॉलर निवेश के सौदे पर काम कर रही है।
मुकेश अंबानी ने भी दिए थे संकेत
इससे पहले 15 जुलाई 2020 को हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज की 43वीं एजीएम में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के चलते बनी अभूतपूर्व परिस्थितियों के चलते सऊदी अरामको के साथ प्रस्तावित डील समय से नहीं हो पा रही है। लेकिन हम सऊदी अरामको के साथ अपने दो दशक से ज्यादा के कारोबारी संबंधों का सम्मान करते हैं और उसके साथ लंबी अवधि की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मुकेश अंबानी ने पिछले साल अरामको की डील के बारे में जानकारी दी थी। तब उन्होंने कहा था कि रिलायंस के रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में अरामको 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए निवेश कर सकती है।
29 साल बाद राइट्स इश्यू लाई RIL
30 अप्रैल को कंपनी ने 53,124 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू की घोषणा की थी। यह देश का सबसे बड़ा राइट्स इश्यू रहा। इसके तहत प्रत्येक 15 शेयर के लिए एक शेयर की पेशकश 1,257 रुपये के मूल्य पर की गई थी। यह 30 अप्रैल को कंपनी के शेयर के बंद मूल्य से 14 फीसदी कम था। इस इश्यू को 1.6 गुना अभिदान मिला। शेयरों के लिए कुल 84,000 करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं।
इससे पहले आरआईएल ने 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था। राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती है, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता।
अंबानी के पास 80.52 लाख शेयर
राइट्स इश्यू में मुकेश अंबानी को कंपनी के 5.52 लाख शेयर मिले। अंबानी के पास अब रिलायंस इंडस्ट्रीज के 80.52 लाख शेयर हो गए हैं। राइट्स इश्यू से पहले उनके पास 75 लाख शेयर थे। अब उनके पास कंपनी के 0.12 फीसदी शेयर हैं।
अंबानी की पत्नी नीता और बच्चों ईशा, आकाश और अनंत को भी राइट्स इश्यू में 5.52-5.52 लाख शेयर मिले थे। इनके पास भी अब कंपनी के 0.12-0.12 फीसदी शेयर हैं। कुल मिलाकर राइट्स इश्यू में प्रवर्तक समूह को 22.50 करोड़ शेयर मिले हैं। इसके साथ ही कंपनी में प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी 50.29 फीसदी हो गई है, जो पहले 50.07 फीसदी थी।
लक्ष्य से पहले कर्जमुक्त हुई रिलायंस
जून 2020 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कच्चा तेल से लेकर दूरसंचार तक विस्तृत क्षेत्रों में कारोबार करने वाली अपनी कंपनी के शुद्ध रूप से ऋण-मुक्त होने की घोषणा की थी। तब अंबानी ने दो महीने के भीतर वैश्विक निवेशकों और राइट्स इश्यू से रिकॉर्ड 1.69 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के शुद्ध रूप से ऋण-मुक्त हो जाने की घोषणा की थी।
रिलायंस ने रिकॉर्ड कायम करते हुए मात्र 58 दिनों की छोटी सी अवधि में 1,68,818 करोड़ रुपये जुटाए। इस अवधि में रिलायंस की सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स में वैश्विक निवेशकों की तरफ से 1,15,693.95 करोड़ रुपये का निवेश आया था। वहीं रिलायंस ने राइट्स इश्यू के माध्यम से 53,124.20 करोड़ रुपये जुटाए थे।
कंपनी पर था इतना कर्ज
रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 31 मार्च 2020 तक 1,61,035 करोड़ रुपये का शुद्ध कर्ज था। अगस्त 2019 में मुकेश अंबानी ने कहा था कि उनकी कंपनी 18 महीने यानी मार्च 2021 तक पूरी तरह से कर्जमुक्त हो जाएगी। इसके लिए राशि जुटाने की दिशा में कंपनी ने हरसंभव प्रयास किया। कंपनी ने यह लक्ष्य नौ माह पहले ही हासिल कर लिया।
कम अवधि में इतनी पूंजी जुटाने का रिकॉर्ड
इतने कम समय में विश्व स्तर पर इतनी पूंजी जुटाना एक रिकॉर्ड है। भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के लिए भी यह अभूतपूर्व हैं। महत्वपूर्ण यह है कि फंड जुटाने का यह लक्ष्य कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए वैश्विक लॉकडाउन के बीच हासिल किया गया।