निजी कंपनियां नहीं बच पाएंगी कैग्ा की नजर
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निजी कंपनियां भले ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के जरिए अपने खातों के ऑडिट का विरोध करें, लेकिन इस मामले में कैग ने अपना रुख साफ कर दिया है।
कैग के अनुसार किसी भी निजी कंपनी की कमाई (रेवन्यू) सरकार के साथ साझा हो रही है, या फिर कोई प्रोजेक्ट सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत चलाया जा रहा है, तो उसका कैग ऑडिट करेगा।
कैग के ऑडिट का निजी क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनियों के साथ-साथ कुछ तेल कंपनियां भी विरोध कर रही हैं।
साझा हो रही कमाई की जांच
मंगलवार को औद्योगिक संगठन एसौचैम द्वारा कॉरपोरेट धोखाधड़ी पर आयोजित कार्यक्रम में कैग प्रमुख शशिकांत शर्मा ने कहा कि कैग सरकार के साथ साझा हो रही कमाई की जांच करेगा, भले ही इसके दायरे में निजी कंपनियां या पीपीपी प्रोजेक्ट आएं।
शर्मा के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों का ऑडिट चल रहा है, जिस पर पहली रिपोर्ट इस साल के अंत तक आने की संभावना है। इसके अलावा गैस और तेल एक्सप्लोरेशन पर कैग की रिपोर्ट जल्द ही संसद में रखी जाएगी। साथ ही अभी चल रहे कुछ पीपीपी प्रोजेक्ट का भी ऑडिट किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कैग ऐसा कुछ नहीं कर रहा है, जिससे निवेशक हतोत्साहित हों। शर्मा के अनुसार परिपक्व अर्थव्यवस्था में जोड़तोड़ करने की संभावना बहुत कम होती है। ऐसे में यदि कंपनियों ने कुछ गलत नहीं किया है, तो वह ऑडिट से क्यों डर रही हैं।
सीबीआई, कैग और सीवीसी जिम्मेदार नहीं
सीबीआई, कैग और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) देश में नीतिगत जड़ता के लिए जिम्मेदार नहीं है। यह बात केंद्रीय सतर्कता आयुक्त जेएम गर्ग ने मंगलवार को एसोचैम के कार्यक्रम में कही है।
गर्ग के अनुसार यूपीए-2 के कार्यकाल में इन तीनों एजेंसियों को नीतिगत जड़ता के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। मूल्यों की कमी और ऊंची महत्वाकांक्षा कॉरपोरेेट धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार है।
शार्ट कट रास्ता भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। ऐसे में इन पर लगाम के लिए रेगुलेटरी मैकेनिज्म होना जरूरी है।