{"_id":"611cc03b02b7c742a337b939","slug":"patanjali-ayurveda-owned-ruchi-soya-received-sebi-go-ahead-to-raise-rs-4300-crore-through-fpo","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुचि सोया: FPO के जरिए 4300 करोड़ रुपये जुटाएगी बाबा रामदेव की कंपनी, मिली SEBI की हरी झंडी","category":{"title":"Corporate","title_hn":"कॉरपोरेट","slug":"corporate"}}
रुचि सोया: FPO के जरिए 4300 करोड़ रुपये जुटाएगी बाबा रामदेव की कंपनी, मिली SEBI की हरी झंडी
Wed, 18 Aug 2021 01:39 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Wed, 18 Aug 2021 01:39 PM IST
सार
रुचि सोया एफपीओ के जरिए 4,300 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसके लिए कंपनी को पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है।
विज्ञापन
बाबा रामदेव
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
योग गुरु बाबा रामदेव की अगुवाई वाली पतंजलि आयुर्वेद की अनुषंगी खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया को फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) के जरिए 4,300 करोड़ रुपये जुटाने के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल गई है। इस संदर्भ में कंपनी ने जून में बाजार नियामक के पास मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। 14 अगस्त को कंपनी को इसके लिए मंजूरी मिली।
विज्ञापन
ये है कंपनी का लक्ष्य
कंपनी द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेज के अनुसार, रुचि सोया को इश्यू से जो राशि मिलेगी, उसका इस्तेमाल कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने में किया जाएगा। इसके जरिए कुछ बकाया लोन को चुकाया जाएगा और साथ ही वर्किंग कैपिटल जरूरतों को व दूसरे सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों को पूरा किया जाएगा।
विज्ञापन
2019 में पतंजलि ने किया था रुचि सोया का अधिग्रहण
साल 2019 में पतंजलि ने ऋण शोधन नीलामी में रुचि सोया का अधिग्रहण किया था। कर्जदाताओं ने 9,300 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली के लिए नीलामी शुरू की थी। साल 2019 में पतंजलि ने 4,350 करोड़ रुपये में एक दिवाला प्रक्रिया के माध्यम से रुचि सोया का अधिग्रहण किया था, जो स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध है। अडाणी विलमर के बोली से हटने के बाद रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली घरेलू कंपनी रुचि सोया के लिए पतंजलि एकमात्र बोलीदाता रह गई थी। अडाणी विलमर का चयन कुछ महीने पहले सबसे बड़ी बोलीदाता के रूप में हुआ था। इसके बावजूद उसने बोली से हटने का निर्णय किया।
विज्ञापन
माजूदा समय में प्रवर्तकों की 99 फीसदी हिस्सेदारी
इसमें माजूदा समय में प्रवर्तकों की 99 फीसदी हिस्सेदारी है और सूत्रों के अनुसार उन्हें एफपीओ के तहत कम से कम अपनी नौ फीसदी हिस्सेदारी को बेचना है। प्रवर्तकों को कंपनी में कम से कम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता के नियम का अनुपालन करना है और इसके लिए रुचि सोया के पास तीन साल का समय है।