विक्रम बख्शी के विदेश जाने पर रोक, NCLAT करेगा मैकडोनाल्ड-CPRL समझौते की समीक्षा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( NCLAT ) ने दिग्गज अमेरिकी फास्ट फूड चेन मैकडोनाल्ड और उसकी भारतीय सहयोगी रही कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (सीपीआरएल) के एमडी विक्रम बख्शी को आपसी समझौते के क्रियान्वयन से रोक दिया है। इतना ही नहीं, ट्रिब्यूनल ने बख्शी को उससे या डीआरटी की इजाजत के बिना विदेश जाने पर भी रोक लगा दी है।
एनसीएलएटी करेगा समीक्षा
एनसीएलएटी मैकडोनाल्ड और सीपीआरएल के बीच हुए सौदे की समीक्षा करेगी। इस संदर्भ में एनसीएलएटी ने कहा है कि वह विक्रम बख्शी द्वारा सीपीआरएल में अपने शेयर मैकडोनाल्ड के हाथों बेचने संबंधी सौदे की समीक्षा करेगा।
आदेशों का उल्लंघन है ये समझौता
मामले में चेयरमैन जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने कहा है कि अमेरिकी फास्ट फूड चेन और बख्शी के बीच हुआ समझौता डीआरटी के आदेशों का उल्लंघन है इसलिए इसका क्रियान्वयन रोका जाना चाहिए।
2013 में विक्रम बख्शी को हटाया था एमडी पद से
2013 में मैकडोनाल्ड ने विक्रम बख्शी को सीपीआरएल के एमडी पद से हटा दिया था, जिसके खिलाफ बख्शी ने कंपनी लॉ बोर्ड में याचिका दायर की थी। इसके बाद बख्शी मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में लेकर के चले गए थे।
2017-18 में हुआ था 65 लाख का लाभ
कंपनी को वित्त वर्ष 2017-18 में 65 लाख रुपये का लाभ हुआ था। इससे पहले के वित्त वर्ष में सीपीआरएल को 305 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ा था।
1995 में हुआ था करार
मैकडोनाल्ड और सीपीआरएल के बीच 1995 में करार हुआ था। तब सीपीआरएल ने फ्रैंचाइजी मॉडल पर देश भर में अपने रेस्टोरेंट खोले थे। उसी समय से मैकडोनाल्ड के कई रेस्टोरेंट अस्तित्व में आए। विश्वव्यापी ब्रांड होने के कारण और भारतीयों के स्वाद के अनुसार अपने मेन्यू में बदलाव करने के कारण कंपनी पूरे देश में काफी प्रसिद्ध हो गई थी।