निवेश कम होने से घट रही हैं नौकरियां?

ब्यूरो/अमर उजाला,दिल्‍ली Updated Wed, 29 Jan 2014 12:00 PM IST
jobs reduce due to low investment in various sector?
औद्योगिक संगठन सीआईआई ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो दर में चौथाई फीसदी बढ़ोतरी को चौंकाने वाला कदम बताया है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि आरबीआई ने यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जबकि आर्थिक हालात को देखते हुए यथास्थिति बनाए रखने की जरूरत थी।

आरबीआई ने महंगाई को काबू में लाने पर ध्यान दिया है। हमें उम्मीद थी कि मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक की ओर से निवेश में तेजी व मांग में मजबूती लाने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि विकास को बढ़ावा दिया जा सके। फिलहाल हम ऐसे हालात से गुजर रहे हैं, जहां ऊंची ब्याज दर के चलते मांग में कमी दिख रही है। फलस्वरूप विकास दर और निवेश प्रभावित हो रहा है।

फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला ने भी रेपो रेट में बढ़ोतरी पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो साल से आर्थिक विकास की सेहत ठीक नहीं है और निवेश का हाल भी कुछ ऐसा ही है। उद्योगों में नौकरियां घट रही हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति में ग्रोथ और रोजगार को बढ़ावा देने पर ज्यादा ध्यान देगा और आगे मूल दरों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष शरद जयपुरिया ने मौद्रिक नीति को सख्त बताते हुए इससे निवेश और मांग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। मौजूदा माहौल में औद्योगिक नीति में नरम रुख अपनाए जाने की जरूरत है, ताकि अर्थव्यवस्था में स्थिरता और मजबूती लाई जा सके।

उन्होंने कहा कि महंगाई की दर काफी ऊंची है और मौद्रिक नीति इसपर काबू कर पाने में कामयाब नहीं हो सकी है, महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों के चलते विकास प्रभावित हो रहा है। कड़ी मौद्रिक नीति रिकवरी को आगे भी प्रभावित कर सकती है।

बढ़ोतरी को वापस ले आरबीआई : क्रेडाई
रीयल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख संस्था क्रेडाई ने रेपो रेट में वृद्धि को एक नकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि इससे सेक्टर को भारी निराशा हुई है।

क्रेडाई के चेयरमैन ललित कुमार जैन ने कहा कि कर्ज की ऊंची ब्याज दरों, महंगाई और बढ़ती लागत के चलते रीयल्टी कारोबार पहले से ही बेहाल है। ऐसे में रेपो रेट बढ़ाना रीयल एस्टेट सेक्टर को लिए विनाशकारी हो सकता है।

इससे गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में (एनपीए) बढ़ोतरी होगी। उन्होंने रिजर्व बैंक से इस बढ़ोतरी को वापस लेते हुए ग्राहकों के लिए अनुकूल कदम उठाने की मांग की है।

सेंसेक्स में 24 अंक की गिरावट
रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के फैसले ने घरेलू शेयर बाजार को दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचा दिया। हालांकि मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद 150 अंक की शुरुआती गिरावट से खुद को काफी हद तक उबारने में बाजार कामयाब रहा। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद बीएसई का सेंसेक्स 23.94 अंक नीचे 20,683.51 अंक पर व एनएसई का निफ्टी 9.60 अंक घटकर 6,126.25 अंक पर बंद हुआ।

बीएसई में टेक, आईटी, हेल्थकेयर और बैंकिंग वर्ग पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव रहा। मेटल, रीयल्टी कैपिटल गुड्स, तेल-गैस. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और एफएमसीजी वर्ग में लिवाली ने बाजार को सहारा दिया। बाजार को ज्यादा गिरावट में धंसने से संभाले रखा। सेंसेक्स मे टाटा स्टील का शेयर सबसे ज्यादा बढ़त में रहा, जबकि मारुति सबसे ज्यादा गिरावट में रहा।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Business News in Hindi related to stock exchange, sensex news, finance, breaking news from share market news in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Business and more Hindi News.

Spotlight

Most Read

Corporate

सरकार का शिकंजा, कंपनियां नहीं कर पाएंगी घोटाला, जनता रखेगी नजर

अब देश में कार्यरत कोई भी बड़ी या छोटी कंपनी किसी भी तरह का घोटाला आसानी से नहीं कर पायेगी।

19 जनवरी 2018

Related Videos

राजधानी में बेखौफ बदमाश, दिनदहाड़े घर में घुसकर महिला का कत्ल

यूपी में बदमाशों का कहर जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों को तो छोड़ ही दीजिए, राजधानी में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं। शनिवार दोपहर बदमाशों ने लखनऊ में हार्डवेयर कारोबारी की पत्नी की दिनदहाड़े घर में घुस कर हत्या कर दी।

21 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper