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30 दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने निकाल लिए 15 लाख करोड़ रुपये

Mon, 05 Aug 2019 05:30 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 05 Aug 2019 05:30 PM IST
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in last 30 days fpi withdraw 15 lakh crore rupees from indian market

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बजट के बाद पिछले एक माह में 15 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इससे ब्लू चिप कंपनियों को सबसे ज्यादा झटका लगा है। हालांकि अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पीएमओ के दखल के बाद कई सेक्टर के कारोबारियों से मिलेंगी, जिससे लगता है कि सरकार अपने विदेशी संस्थागत निवेशकों पर ज्यादा कर लगाने के फैसले को बदल सके। 

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विदेशी निवेशकों ने दो दिन में निकाले 2632 करोड़ रुपये

विदेशी निवेशकों (एपपीआई) ने अगस्त के पहले दो कारोबारी सत्रों में कैपिटल मार्केट से 2,881 करोड़ रुपये निकाल लिए। एफपीआई ने 1-2 अगस्त को शेयर बाजार में 2,632.58 करोड़ और डेट मार्केट में 248.52 करोड़ रुपये की बिकवाली की। 

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इससे पहले जुलाई के पूरे महीने में एफपीआई ने इक्विटी और डेट मार्केट से कुल 2,985.88 करोड़ रुपये की निकासी की थी। अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध बढ़ने की आशंका से निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले हफ्ते एलान किया कि 300 अरब डॉलर के चाइनीज इंपोर्ट पर एक सितंबर से 10 फीसदी शुल्क लगाएंगे।

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रिलायंस का शेयर तीन फीसदी गिरा

रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर सोमवार से तीन फीसदी गिर गया। क्रेडिट रेटिंग कंपनी क्रेडिट सुइस ने रिलायंस की रेटिंग में 26 फीसदी की कटौती कर दी थी। एफपीआई फरवरी से जून तक लगातार खरीदार रहे थे। लेकिन, बजट में सुपर रिच पर टैक्स बढ़ने के एलान के बाद बिकवाली तेज हो गई। अर्थव्यवस्था में सुस्ती, कमजोर मानसून और कई कंपनियों के तिमाही नतीजे कमजोर रहने की वजह से भी सेंटीमेंट बिगड़ गए। 

एफपीआई पर टैक्स

लोकसभा ने बजट के दौरान पेश किए गए वित्त विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक अब ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) को भी टैक्स देना होगा। कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड एफपीआई पर टैक्स रेट बढ़ने का असर नहीं पड़ेगा और एफपीआई ट्रस्ट के बजाय कंपनी के तौर पर फिर से अपना रजिस्ट्रेशन कराने पर विचार कर सकते हैं। सरकार का यह फैसला बाजार को रास नहीं आया। 

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