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कैसे वसूलें एनपीए जब कंपनी की हैसियत ही है कर्ज से कम

Sat, 27 Oct 2018 05:12 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीयूष पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीयूष पांडेय Updated Sat, 27 Oct 2018 05:12 AM IST
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How to recover NPA when the companies status is less than the loan

बैंकों के फंसे कई लाख करोड़ के कर्ज को वसूला जाना नामुमकिन होता जा रहा है। सरकार का कहना है कि सारे कदम उठाने के बावजूद फंसा हुआ कर्ज (एनपीए) कैसे वसूला जाए। जबकि कंपनी की हैसियत ही उतनी नहीं रही। ऐसी कंपनियां सामने आई हैं जिनके पास दिए गए कर्ज के बराबर संपत्ति तक नहीं है। ऐसे में सरकार वसूली कैसे करे। कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि दीमकों को बैंकों को चट करने का मौका यूपीए सरकार में दिया गया। कंपनियों की हैसियत जाने के बिना कर्ज दिया गया, वापस उनसे क्या रिकवरी करेंगे। ऐसी कंपनियों को कर्ज दिया गया जिनकी हैसियत तो छोड़िए संपत्ति भी इतनी नहीं कि कर्ज वसूला जा सके। उन्होंने कहा कि आज कर्ज देने से पहले पूरी प्रक्रिया का निर्वहन किया जाता है, जांच पड़ताल की जाती है। यही नहीं, इंसॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी (आईबी) कानून है जिसके जरिए तेज गति में वसूली भी संभव है, लेकिन यूपीए शासन में बैंकों को लूटा गया।

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चौधरी ने कहा कि यूपीए-1 में 2008 तक करीब 18 लाख करोड़ और 2014 तक 52 लाख करोड़ रुपया कंपनियों को बैंकों ने दिया। ऐसे में महज पांच साल में 34 लाख करोड़ का कर्ज दिया गया जिसमें ना ये देखा गया कि कंपनी कैसी है, उसकी साख क्या है, वह कर्ज वापस दे पाएगी या नहीं। सबकुछ नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आगे कहा अब ऐसी कंपनियों से क्या वसूली करोगे जिनकी हैंसियत भी कर्ज के बराबर नहीं है। अगर लिक्वीडेशन में जाएं तो पता लगता है कि 54 करोड़ रुपया कर्ज दिया गया और कंपनी 10 करोड़ रुपये की। ऐसी स्थितियों की वजह से वसूली कम हो रही है।
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उन्होंने कहा कि आईबी कानून आने के बाद नए मामलों में वसूली 90 से सौ फीसद होगी। अब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है और बैंक भी कर्ज लेकर नहीं चुकाने वालों के खिलाफ सक्षम हो गए हैं। अब अगर कोई बैंकों से कर्ज लेता है और नहीं चुकाता तो निर्धारित समय में निपटारे की व्यवस्था है। एनसीएलटी है, जिसके द्वारा कई अहम मामलों पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने बैंकिंग संरक्षण के लिए ऐसा इको-सिस्टम तैयार किया है जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। 
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मंत्री की टिप्पणी हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) राजीव महर्षि द्वारा आरबीआई की भूमिका पर उठाए गए सवाल के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि कैग ने पूछा था कि बैंक जब बड़े-बड़े लोन दे रहे थे (जो अब एनपीए हो गए हैं) तब आरबीआई क्या कर रहा था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 के अंत तक बैंकों के एनपीए या फंसे हुआ कर्ज बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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