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कोरोना वायरसः विदेशी निवेशकों को वैश्विक मंदी का डर, 12 दिन में निकाले 37,976 करोड़

Mon, 16 Mar 2020 04:12 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 16 Mar 2020 04:12 AM IST
सार

  •  कोरोना के आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहे असर से घबराए निवेशक
  •  अन्य देशों की तरह राहत पैकेज की घोषणा से बदलेगी निवेशकों की धारणा
  •  6 महीने यानी सितंबर, 2019 से लगातार शुद्ध खरीदार रहे थे विदेशी निवेशक

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Foreign investors fear global recession, extracts 37,976 crore in 12 days
Coronavirus - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक असर को देखते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) में वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ गई है। इससे डरे एफपीआई ने मार्च में अब तक भारतीय पूंजी बाजार से शुद्ध रूप से 37,976 करोड़ रुपये की निकासी की है।

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डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 2 से 13 मार्च की अवधि के दौरान शेयरों से शुद्ध रूप से 24,776.36 करोड़ रुपये और बॉन्ड बाजार से 13,199.54 करोड़ रुपये निकाले। इस प्रकार, आलोच्य अवधि में एफपीआई कुल 37,975.90 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। इससे पहले सितंबर, 2019 से लगातार छह महीने तक विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार रहे थे।
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मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। इस कारण इसे महामारी घोषित कर दिया गया है। इसके असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती से दुनियाभर के निवेशक प्रभावित हुए हैं और सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।
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वहीं, ग्रो के सह-संस्थापक एवं सीओओ हर्ष जैन ने कहा कि दुनियाभर के बाजारों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कई देश अपने उद्योग को समर्थन देने के लिए जल्द ही राहत पैकेज की घोषणा कर सकते हैं। इससे घबराए निवेशकों की धारणा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

निर्माण और परिवहन पर सबसे ज्यादा असर

चीन में कोरोना वायरस संक्रमण से निर्माण, परिवहन और रसायन मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीन से अजैविक रसायनों का करीब 15 फीसदी आयात करता है। इसके अलावा, पांच आयातित उत्पाद ऐसे हैं, जिनके लिए भारत काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं।

इनमें इलेक्ट्रिकल मशीनरी, मशीनरी, मैकेनिकल उपकरण, जैविक रसायन, प्लास्टिक और ऑप्टिकल एवं सर्जरी के उपकरण हैं। देश के कुल आयात में इनकी हिस्सेदारी 28 फीसदी है। ऐसे में ये क्षेत्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत प्रमुख रूप से कच्चे तेल, रत्न एवं आभूषण आयात करता है।

देश के कुल आयात में इनका हिस्सा 46 फीसदी है। चीन में आए संकट से ये दोनों क्षेत्र बचे हैं। 2018-19 में भारत के 507 अरब डॉलर के आयात में 26 फीसदी हिस्सा लौह एवं इस्पात और अजैविक रसायनों का था। कोरोना के कारण इन क्षेत्रों पर सबसे कम असर पड़ा है।
 

शीर्ष-10 कंपनियों की पूंजी 4.22 लाख करोड़ घटी

शेयर बाजारों में कोरोना वायरस के कोहराम के कारण बीते सप्ताह सेंसेक्स की शीर्ष-10 कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से 4,22,393.44 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। टीसीएस और आरआईएल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 1,16,549.07 करोड़ और आरआईएल का 1,03,425.15 घटा है।

इसके अलावा, इन्फोसिस के बाजार पूंजीकरण में 41,315.98 करोड़, एचडीएफसी बैंक में 34,919.51 करोड़, हिंदुस्तान यूनिलीवर में 33,208.35 करोड़, कोटक महिंद्रा बैंक में 30,931.1 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक में 25,098.54 करोड़, बजाज फाइनेंस में 16,320.81, एयरटेल में 13,611.62 करोड़ और एचडीएफसी में 7,013.31 रुपये की कमी आई है। 

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