टॉप 10 ग्लोबल ब्रांड्स की लिस्ट से बाहर हुआ फेसबुक, पहले पायदान पर रही यह कंपनी
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साल भर से चल रही जांच और डाटा लीक स्कैंडल से परेशान रही सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक विश्व भर की 100 कंपनियों की ग्लोबल ब्रांड्स की रैंकिंग में पहली बार टॉप 10 लिस्ट से बाहर हो गई है। इस बार कंपनी 14वें पायदान पर रही, जबकि पिछले साल यह आठवें स्थान पर थी।
इन कंपनियों ने बनाई टॉप 10 में जगह
जिन कंपनियों ने टॉप 10 में जगह बनाई है, वो क्रमानुसार इस प्रकार हैंः-
- एप्पल
- गूगल
- अमेजन
- माइक्रोसॉफ्ट
- कोका कोला
- सैमसंग
- टोयोटा
- मर्सिडिज
- मैकडोनाल्ड
- डिज्नी
फेसबुक को ऐसे हुआ नुकसान
डाटा लीक मामले में फेसबुक पर 34 हजार करोड़ रुपये (पांच अरब डॉलर) का जुर्माना अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन ने इस साल जुलाई में लगाया था। यह किसी टेक्नोलॉजी कंपनी पर सबसे बड़ा जुर्माना था, इससे पहले साल 2012 में फेसबुक पर 22 मिलियन डालर यानी 154 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका गया था। फेसबुक पर साढ़े आठ करोड़ यूजर्स का डाटा लीक करने का आरोप लगा था।
यहां से बिगड़ी बात
कैंब्रिज एनालिटिका पर फेसबुक के करीब 8.7 करोड़ यूजर्स का डाटा चोरी करने का खुलासा हुआ था। फेसबुक के इस डाटा लीक मामले की जांच कर रही फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने कहा था कि फेसबुक ने 2011 में तैयार हुए सेफगार्ड यूजर्स प्राइवेसी के नियमों का उल्लंघन किया है। इस मामले में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की अमेरिकी संसद में पेशी भी हो चुकी है। साल 2018 में लंदन की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म कैंब्रिज एनालिटिका पर फेसबुक का डाटा लीक होने की खबरों के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया था। इसके बाद कई जांच हुईं और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने इसके लिए माफी भी मांगी। राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था।
जुलाई की शुरुआत में फेसबुक पर जर्मनी सरकार ने आरोप लगाया था कि जर्मनी में फेसबुक अवैध सामग्री वाले कन्टैंट दिखा रही है, जो इंटरनेट ट्रांसपेरेंसी कानून का उल्लंघन हैं, जिसके बाद अथॉरटीज ने फेसबुक पर 2.3 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ 83 लाख रुपए) का जुर्माना लगाया है।
कंपनी पर इस महीने लगा चार करोड़ डॉलर का जुर्माना
सात अक्तूबर को कंपनी पर 2.83 लाख करोड़ रुपये (4 करोड़ डॉलर) का जुर्माना लगा था। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे वीडियो विज्ञापनों के समय की गणना करने में गलती की थी। अमेरिका की फेडरल ट्रेड कमीशन ने कंपनी को विज्ञापनदाताओं की याचिका पर यह फैसला दिया है।
1.5 साल तक विज्ञापनदाताओं को देना पड़ा ज्यादा पैसा
2015 से लेकर के 2016 के बीच 18 महीने के दौरान कंपनी के विज्ञापनदाताओं को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ा। इस बारे में कुछ विज्ञापनदाताओं ने 2016 में कंपनी के खिलाफ सैनफ्रांसिस्को की अदालत में मुकदमा दर्ज कर दिया। विज्ञापनदाताओं का आरोप था कि कंपनी ने केवल तीन सेकंड से ज्यादा समय वाले वीडियो की गणना की और इससे कम समय वाले विज्ञापनों को सूची से निकाल दिया। इसके अलावा आर्टिफिशियल तरीकों का इस्तेमाल करके औसत समय को भी बढ़ा दिया।