DHFL पर 83,873 करोड़ रुपये बकाया, एसएफआईओ कर सकती है जांच
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सरकार वित्तीय अनियमितताओं के लिए संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (डीएचएफएल) के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की जांच का आदेश दे सकती है। कंपनी पंजीयक, मुंबई कार्यालय ने डीएचएफएल के बारे में रिपोर्ट कुछ दिन पहले कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी है। कर्जदाताओं ने किसी भी रिजॉल्यूशन प्लान के साथ आगे बढ़ने में असमर्थता का संकेत दिया है।
एसएफआईओ को भेजा जाएगा मामला
अधिकारी ने कहा कि डीएचएफएल में अनियमितता का मामला एसएफआईओ को सौंपने की काफी वजहें हैं। रिपोर्ट में धन के गबन और उसे इधर उधर करने का संकेत दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अगले कुछ दिन में यह मामला एसएफआईओ को भेज दिया जाएगा।
फंड जुटाने की क्षमता काफी कम
डीएचएफएल ने सितंबर 2018 से मुख्य रूप से परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्भुगतान संग्रह के माध्यम से 41,800 करोड़ रुपये से अधिक का पुनर्भुगतान किया था। कंपनी वित्तीय संकट से गुजर रही है और फंड जुटाने की क्षमता काफी कम हो गई है। डीएचएफएल को जनवरी-मार्च तिमाही में 2,223 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
जारी हुआ था लुकआउट नोटिस
दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन के प्रवर्तकों के खिलाफ 28 मई को लुकआउट नोटिस जारी हुआ था। इसके बाद कंपनी के शेयर गिर गए थे। मुखौटा कंपनियों में पैसे जमा करने के आरोप में सरकार ने प्रवर्तकों और निदेशकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।
कंपनी पर 83,873 करोड़ रुपये बकाया
डीएचएफएल के रिजॉल्यूशन प्लान के अनुसार, कंपनी पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) का 41.431 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं बैंकों का, 27,527 करोड़ रुपये, 6,188 करोड़ की एफडी, 2,747 करोड़ रुपये की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी), नेश्नल हाउसिंग बैंक (एनएपबी) के 2,350 करोड़, सब-कर्ज और पर्पेचुअल कर्ज क्रमश: 2,267 करोड़ और 1.263 करोड़ रुपये और कमर्शियल पेपर 100 करोड़ रुपये के हैं। इस तरह कंपनी पर कुल 83,873 करोड़ रुपये बकाया है।
31,000 करोड़ रुपये के घपले का आरोप
एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि डीएचएफएल ने मुखौटा कंपनियों के जरिये 97,000 करोड़ रुपये के कुल बैंक कर्ज में से कथित रूप से 31,000 करोड़ रुपये का घपला किया है। जब जांच हुई तो यह पता चला कि कई मुखौटा कंपनियों के ऑफिस तो बताए गए पते पर मौजूद ही नहीं हैं।
कंपनी ने बनाई थी निपटान की योजना
केपीएमजी के फॉरेंसिक ऑडिट में भी डीएचएफएल के प्रमोटर्स द्वारा बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरतने का पता चला है। कंपनी ने जो निपटान की योजना बनाई थी, उसमें कर्ज को इक्विटी में बदलकर कंपनी की 51 फीसद हिस्सेदारी प्राप्त करना भी शामिल था। केपीएमजी द्वारा कर्जदाताओं को सौंपे गए रिपोर्ट के मसौदे के अनुसार, डीएचएफएल के प्रमोटर्स ने लगभग 20 हजार करोड़ का बैंक लोन अपनी युनिट्स में ट्रांसफर किया है।