कंपनियों में बढ़ेगी महिला कर्मचारियों की संख्या, टॉप मैनेजमेंट में मिलेगा अहम रोल
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भारतीय कंपनियां कार्यस्थलों पर पुरुषों व महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं। इसके तहत वे विभिन्न पहल कर रही हैं, जो उसके महिला कर्मचारियों के कैरियर को आगे बढ़ाने, उन्हें जिम्मेदारी सौंपने तथा जीवन के विभिन्न स्तरों पर उनके लिए मददगार हैं।
पीपुलस्ट्रांग के सह-संस्थापक तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पंकज बंसल ने बताया कि भारत की 48 फीसदी आबादी महिलाओं की है, लेकिन कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी मात्र 28.5 फीसदी है और हिस्सेदारी में इस कमी का कारण विभिन्न सामाजिक कलंकों के साथ ही शिक्षा को बीच में छोड़ने की उच्च दर है।
दुनियाभर की कंपनियां कार्यस्थलों पर खासकर वरिष्ठ प्रबंधन में लैंगिक असमानता को लेकर जागरूक हैं और इस खाई को पाटने के लिए वे काम कर रही हैं। गैर-इरादतन पूवार्गग्रह से बचने के लिए कंपनियां विभिन्न नेतृत्व कार्यक्रम प्रदान करने के अलावा, वेतन तथा कैरियर को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही हैं।
एचएसबीसी की खास पहल
एचएसबीसी की भारत की प्रौद्योगिकी शाखा एचएसबीसी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट (इंडिया) ने उन महिलाओं को अपना कैरियर दोबारा शुरू करने को लेकर मौका देने के लिए टेक2 नामक भर्ती कार्यक्रम शुरू किया है, जिन्होंने बीच में काम छोड़ दिया था।
इस साल के भर्ती कार्यक्रम के माध्यम से एचएसबीसी टेक्नोलॉजी में इंटर्नशिप के लिए 400 से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया। कंपनी में काम शुरू करने से पहले 12 सप्ताह का इंटरर्नशिप पूरा करना होता है। इसके अलावा, आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के पास ‘अनन्या मॉडल’ है, जो महिला कर्मचारियों को सहयोग बढ़ाने के हर अवसर का लाभ बढ़ाने के इर्द-गिर्द घूमता है।
बेयर का इंटरनेशनल कैरियर्स मॉडल
वहीं, बेयर में वरिष्ठ भूमिकाओं के लिए ‘इंटरनेशनल कैरियर्स’ कैरियर बनाने को लेकर एक अहम विभाग है। क्षेत्रीय या वैश्विक भूमिकाओं की तरफ रुख करने के लिए बेयर में विभिन्न बाजारों व कारोबारों का ज्ञान, सहयोग व संस्कृति के मॉडल को अहम जरूरत समझा जाता है।
साउथ एशिया बेयर के कंट्री ग्रुप एचआर हेड केएस हरीश ने बताया कि लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के इस तरह के प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप महिला कर्मचारियों का एक समूह तैयार हुआ है, जिनकी आकांक्षाएं असीम हैं और किसी भी जगह पर काम करने के लिए तैयार हैं। उन्हें पता है कि कंपनी उनकी प्राथमिकताओं को समझती है और साथ मिलकर नेतृत्व वाले पदों पर काम करने के लिए तैयार हैं।
लैंगिक विविधता के फायदों से कंपनियां अंजान
कई शोध अध्ययनों ने लैंगिक विविधता वाली कंपनियों के मूल्यों को स्थापित किया है। हालांकि, सीआईआई इंडियन वूमेन नेटवर्क (आईडब्ल्यूएन) तथा ईवाई के हालिया अध्ययन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि 69 फीसदी कंपनियां लैंगिक विविधता के फायदों को समझने में अक्षम है।
नियुक्ति रणनीति की जरूरत
यूफ्लेक्स लिमिटेड में ह्यूमन रिसोर्सेज (भारत व वैश्विक) के प्रेसिडेंट चंदन चटर्जी ने बताया कि कारोबारी दिग्गजों को एक नियुक्ति रणनीति विकसित करनी चाहिए, जो कम लैंगिक विविधता वाली कंपनियों में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देता हो और योग्यता को महत्ता देता हो।
कंपनियों को लैंगिक विविधता वाली संस्कृति के लिए तेजी से काम करना चाहिए, जो संबंधों में भरोसे को बढ़ावा देता हो, जिससे उन्हें हर चीज में अपना बेहतरीन देने के लिए प्रोत्साहित मिले। मर्सर में कैरियर के इंडिया बिजनेस लीडर शांति नरेश ने कहा कि प्रतिनिधित्व अनुपात पर ध्यान केंद्रित करने का आरंभिक प्रयास बढ़िया है। कंपनी में सभी स्तरों पर दोनों लिंगों की सतत भागीदारी कंपनी को विविधता के फायदों के अनुभव कराने के लिए आवश्यक है।