40 करोड़ की रिश्वत देने के मामले में कॉग्निजेंट ने बिठाई जांच
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कंपनी ने पहले इस अनुचित पेमेंट की राशि 33 करोड़ रुपए के आसपास आंकी थी।
पिछले साल सितंबर में कॉग्निजेंट ने कहा था कि वह भारत में परमिट पाने और बिल्डिंग लाइसेंस लेने में हुए अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन की आंतरिक जांच करेगी। आईटी कंपनी यह जांच करेगी कि क्या भारत में उसने अमेरिका के फॉरन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट का उल्लंघन किया है?
कंपनी के प्रेसीडेंट ने दिया था इस्तीफा
शुकवार को ही कंसल्टिंग कंपनी ने जानकारी दी थी कि वो मामले की अपने स्तर पर जांच कर रही है। कंपनी के मुताबिक उसने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन को भी इस बारे में जानकारी दे चुकी है।
इसके साथ ही कंपनी ने जानकारी दी कि कंपनी के प्रेसीडेंट गॉर्डन को बर्न 27 सितंबर को इस्तीफा दे चुके हैं।
कंपनी कर रही है अपनी तरफ से जांच
कंपनी के सीएफओ कैरेन ने बताया, “यह पड़ताल ठीक ढंग से चल रही है और इसमें काफी कुछ सामने आया है। हमें पता चला है कि भारत में कंपनी का जो सेटअप है उससे जुड़े करीब 60 लाख डॉलर के भुगतान (पेमेंट) के गलत ढंग से होने का संदेह जताया गया है।
बीती तिमाही में यह करीब 10 लाख डॉलर के ऐसे भुगतान की बात सामने आई थी, जो अब बढ़ कर इस स्तर तक पहुंच गया है। इसमें से कंपनी अभी तक करीब 41 लाख डॉलर का करेक्शन (सुधार) कर चुकी है।”