एजीएम 2021: शेयरहोल्डर्स से बोले गौतम अडाणी- सभी शेयरों ने दिया 100 फीसदी से अधिक रिटर्न
वित्तीय वर्ष 2021 के लिए, अडाणी समूह के सूचीबद्ध पोर्टफोलियो के लिए समेकित ईबीआईटीडीए (या ब्याज, टैक्स, डिप्रेसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की आय) 32,000 करोड़ रुपये से अधिक था।
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कोविड-19 की वर्तमान सामाजिक सुरक्षा नियमों के कारण अडाणी समूह की साल 2021 की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) वर्चुअल तरीके से हुई। इस दौरान समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने पिछले 12 महीनों के कुछ अनुभव साझा करते हुए कहा कि, 'जो भयंकर वैश्विक महामारी के कारण असाधारण रूप से कठिन दौर रहा है। यह वैश्विक महामारी आने वाले कई दशकों के लिए दुनिया पर अपनी छाप छोड़ेगी। आ रहे आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो दुखद है। दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं, और कोविड-19 महामारी ज्ञात इतिहास में पहले से ही वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सबसे व्यापक खतरा बन चुकी है।'
अडाणी ने शेयरहोल्डर्स को कंपनी के प्रदर्शन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछला वर्ष उन व्यवसायों के लिए असाधारण रूप से कठिन अवधि थी जिन्होंने इन अभूतपूर्व परिस्थितियों से गुजरते हुए अपनी बिल्कुल नई राह बनाई, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए सफर तय किया और अधिक मजबूत बनकर उभरे। उन्होंने बताया कि, 'हमारी सूचीबद्ध संस्थाओं के प्रदर्शन के कारण इस नए वित्तीय वर्ष के पहले सप्ताह में हमारा पोर्टफोलियो मार्केट कैपिटलाइजेशन 100 अरब डॉलर को पार कर गया है। यह महत्वपूर्ण वैल्यूएशन किसी पहली पीढ़ी की भारतीय कंपनी के लिए पहली बार है।
सभी शेयरों ने दिया 100 फीसदी से अधिक रिटर्न
वित्तीय वर्ष 2021 के लिए, हमारे सूचीबद्ध पोर्टफोलियो के लिए समेकित ईबीआईटीडीए (या ब्याज, टैक्स, डिप्रेसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की आय) 32,000 करोड़ रुपये से अधिक था, जो 22 फीसदी की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज किया है। अडाणी के सभी शेयरों ने 100 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया और हमारे बिजनेस ने सुनिश्चित किया कि हम आपको, हमारे इक्विटी शेयरहोल्डर्स को लगभग 9,500 करोड़ रुपये रिटर्न में दें।
पिछले वर्ष में हासिल की गईं ग्रुप की उपलब्धियों के बारे में उन्होंने बताया कि अडाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने खुद को पोर्ट्स कंपनी से एकीकृत पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी में बदलना जारी रखा। वित्तीय वर्ष 2021 वास्तव में परिवर्तनकारी वर्ष था और एपीएसईजेड ने भारत के पोर्ट-आधारित कार्गो बिजनेस में अपनी हिस्सेदारी 25 फीसदी तक बढ़ाने और कंटेनर सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी 41 फीसदी तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इसने आगे भी विविधता के साथ विकास जारी रखा और मुंद्रा में एलएनजी और एलपीजी कारोबार को और धामरा में एलएनजी ऑपरेशंस के साथ अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया। दुनिया में कोई भी अन्य कंपनी इस पैमाने और पहुंच के साथ पोर्ट बिजनेस का संचालन नहीं करती है।
दुनिया की सबसे बड़ी सोलर कंपनी
अडाणी ग्रीन एनर्जी रिन्यूएबल एनर्जी के भविष्य को फिर से परिभाषित कर रही है। 2020 में, हम दुनिया की सबसे बड़ी सोलर कंपनी बन गए। सोलर कंपनी के रूप में हमने 2015 में यात्रा शुरू की थी। और पिछले महीने, एसबी एनर्जी के पांच-गीगावाट पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के बाद, लगभग 3.5 अरब डॉलर के एंटरप्राइज वैल्यूएशन पर, हमने अपने रिन्यूएबल एनर्जी के 25 गीगावॉट के लक्ष्य को निर्धारित समय से चार साल पहले हासिल कर लिया है।
चार यात्रियों में से एक यात्री भरता है अडाणी एयरपोर्ट से उड़ान
आगे उन्होंने कहा कि अडाणी एंटरप्राइजेज के जरिए, हमने एयरपोर्ट्स के क्षेत्र में कदम रखा और आज भारत में हर चार यात्रियों में से एक यात्री अडाणी एयरपोर्ट से उड़ान भरता है। किसी भी बड़े देश के किसी भी एयरपोर्ट बिजनेस ने कुल यात्री यातायात का 25 फीसदी हिस्सा हासिल नहीं किया है। कंपनी ने अहमदाबाद, लखनऊ और मंगलूरू में एयरपोर्ट का ऑपरेशंस भी संभाला है तथा गुवाहाटी, जयपुर और तिरुवनंतपुरम के लिए रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए, और अब मुंबई तथा नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है।
शुरू हो रहा तेज विकास का वास्तविक चरण
अडाणी ने शेयरहोल्डर्स को कहा कि, 'हालांकि अपने बिजनेस परफॉरमेंस को लेकर हम संतुष्ट हैं, फिर भी मेरा मानना है कि हमारे तेज विकास का वास्तविक चरण अभी शुरू हो रहा है। ऐसा इसलिए कि हमारे ग्रुप को ऐसी कंपनियों के निवेश सूची से बहुत लाभ होता है जिनके पास विभिन्न क्षेत्रों में हमारे भविष्य के विकास को प्रोत्साहन देने वाली कई रणनीतिक निकटता हैं।'
आगे उन्होंने कहा कि अगले चार वर्षों में भारत का पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करना आश्चर्य की बात है। मैं इसे व्यक्तिगत तौर पर एक अप्रासंगिक प्रश्न के रूप में देखता हूं। इतिहास ने दिखाया है कि, हर महामारी द्वारा पैदा किए गए संकट में कई सीख मिलती है और मेरा मानना है कि भारत और दुनिया इस महामारी से गुजरते हुए समझदार बने हैं। भारत पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, और फिर अगले दो दशकों में 15 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। खपत के आकार और मार्केट कैप दोनों के मामले में भारत सबसे बड़े वैश्विक बाजारों में से एक बनेगा।