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BSE, NSE ने निलंबित किया कार्वी का शेयर ट्रेडिंग लाइसेंस, सेबी का फैसला बना आधार

Mon, 02 Dec 2019 12:23 PM IST
paliwal पालीवाल BSE, NSE ने निलंबित किया कार्वी का शेयर ट्रेडिंग लाइसेंस, सेबी के फैसले को बनाया आधार
BSE, NSE ने निलंबित किया कार्वी का शेयर ट्रेडिंग लाइसेंस, सेबी के फैसले को बनाया आधार Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 02 Dec 2019 12:23 PM IST
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bse, nse and other exchanges suspends trading license after sebi crackdown
karvy sebi - फोटो : karvy

देश के दोनों प्रमुख शेयर बाजारों ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड का लाइसेंस निलंबित करने का फैसला किया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने एक सर्कुलर जारी करते हुए यह आदेश दिया है। इससे पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और एमएसईआई ने कंपनी का ट्रेडिंग लाइसेंस निलंबित कर दिया था। बीएसई और एनएसई ने अलग-अलग सर्कुलर के जरिए कहा है कि दो दिसंबर से कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है। कार्वी ने स्टॉक एक्सचेंज के रेगुलेटरी प्रावधानों का उल्लंघन किया है। बीएसई ने जहां इक्विटी और डेट सेग्मेंट में लाइसेंस सस्पेंड किया है वहीं एनएसई ने कमोडिटी डेरिवेटिव, कैपिटल मार्केट, म्यूचुअल फंड और एफ एंड ओ के भी लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इस ब्रोकरेज फर्म के ग्राहक अन्य ब्रोकर फर्मों के पास जा सकेंगे।

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22 नवंबर को सेबी ने लिया था यह फैसला

इससे पहले 22 नवंबर को बाजार नियामक सेबी ने फैसला देते हुए नए क्लाइंट्स के साथ व्यापार करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सेबी ने सभी एक्सचेंज से कार्रवाही करने के लिए कहा था। सेबी ने कहा था कि ब्रोकरेज कंपनी ने अपने क्लाइंट की जमा रकम को अपनी सहयोगी कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर कर दिया था। 

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कभी नहीं थी अनुमति

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग मामला सामने आने के बाद पूंजी बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने बुधवार को कहा कि यह ब्रोकरेज कंपनी उन गतिविधियों से शामिल पाई गई, जिनकी कभी अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक सर्कुलर जारी कर इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी और कहा था कि किसी भी इकाई को ऐसी गतिविधियों में लिप्त नहीं होना चाहिए। इससे पहले की भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्तता स्वीकार नहीं होगी। 

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त्यागी ने कंपनी संचालन पर आयोजित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की एशियाई बैठक से अलग कहा, ‘बुनियादी तौर पर जिसकी कभी अनुमति नहीं थी, वह काम हो रहा था। ऐसा नहीं है कि इसके लिए जून में ही मना किया गया है। चाहे इस मामले में स्पष्ट तौर पर पहले कुछ भी नहीं कहा गया था, फिर भी आप अपने स्तर पर ग्राहकों के शेयरों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं और ऐसा करने की अनुमति किसी को नहीं है।’ उन्होंने दोहराया यह बुनियादी मुद्दा है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। 

एनएसई ने भेजी थी प्राथमिक रिपोर्ट

दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इस मामले में सेबी को प्राथमिक रिपोर्ट भेजी थी, जिसके बाद सेबी ने यह कदम उठाया। बाजार नियामक ने एक आदेश में कहा कि एक्सचेंज की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद ही कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के खिलाफ 19 अगस्त को सीमित जांच की गई। इसमें एक जनवरी के बाद के सौदों की जांच की गई। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत बरुआ की 12 पन्ने के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि मामले में ग्राहकों के शेयरों का आगे दुरुपयोग रोकने के लिए तुरंत नियामकीय हस्तक्षेप की जरूरत है। ब्रोकरेज कंपनी पर नए ग्राहक जोड़ने पर प्रतिबंध लगाने के अलावा नियामक ने एनएसडीएल और सीडीएसएल को निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों की पावर ऑफ अटॉर्नी के अनुसरण में कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के किसी भी निर्देशों का पालन न करें। 

यह है मामला : ग्राहकों के शेयरों का दुरुपयोग

ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर घोटाला है। सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं। मामला सामने आने के बाद सेबी ने तुरंत प्रभाव से कंपनी को शेयर ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए नए ग्राहकों जोड़ने पर रोक लगा दी है। 

निवेशक ऐसे कर सकते हैं कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग से शेयर ट्रांसफर

विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों को मौजूदा ब्रोकर कार्वी से डेबिट इंस्ट्रक्शन स्लिप लेकर भरवाना होगा। स्लिप में आईएसएन नंबर भरना होगा। इसके बाद जिस ब्रोकर के पास शेयर ट्रांसफर करना है उसका 16 कैरेक्टर वाला टारगेट क्लाइंट कोड भरना होगा। इसमें डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट और ब्रोकर दोनों का ही कोड शामिल होता है। पुराने और नए ब्रोकर दोनों ही एनएसडीएल के मेंबर हैं तो इसमें इंट्रा डिपॉजिटरी ट्रांसफर होगा। ऐसे में डेबिट इंस्ट्रक्शन स्लिप में ऑफ मार्केट ट्रांसफर लिखना होगा। स्लिप को भरकर उसमें साइन करके मौजूदा ब्रोकर यानि कार्वी को देना होगा। आमतौर पर 5-6 दिन में शेयर ट्रांसफर हो जाता है। 

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