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बंगलूरू: एथर एनर्जी की उत्पादन क्षमता साढ़े तीन गुना बढ़ी, हर रोज 650 ई-स्कूटर बन रहे
Mon, 28 Nov 2022 05:49 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 28 Nov 2022 05:49 AM IST
सार
अभी कंपनी इस उत्पादन क्षमता के लगभग 60% हिस्से का ही प्रयोग कर पा रही है लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक 100% उत्पादन क्षमता का उपयोग होने लगेगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
ई-स्कूटर और चार्जिंग स्टेशन कंपनी एथर एनर्जी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 35 हजार ई-स्कूटर प्रति माह करेगी। तमिलनाडु के होसुर में अपने दूसरे उत्पादन संयंत्र के शुभारंभ पर कंपनी के सह-संस्थापक स्वप्निल जैन ने बताया कि इस संयंत्र के चालू होने के बाद अब सालाना उत्पादन क्षमता चार लाख 20 हजार ई-स्कूटर हो गई है। अभी तक यह एक लाख 20 हजार यूनिट प्रतिवर्ष थी। वर्तमान में एथर एनर्जी हर रोज लगभग 650 ई-स्कूटर बना रही है। दूसरे संयंत्र की बदौलत वह अब हर रोज 1200 यूनिट बना सकती है।
उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर ही ई-स्कूटर की मांग इतनी बढ़ जाएगी कि देश में बिकने वाला हर दूसरा स्कूटर इलेक्ट्रिक स्कूटर होगा। अभी कंपनी इस उत्पादन क्षमता के लगभग 60% हिस्से का ही प्रयोग कर पा रही है लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक 100% उत्पादन क्षमता का उपयोग होने लगेगा। निकट भविष्य में मांग में जबर्दस्त बढ़ोतरी के रुझान देखते हुए ही उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती मांग की वजह से कंपनी ने अब तीसरे संयंत्र के बारे में सोचना आरंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की बदौलत यह शून्य जलनिकासी व शून्य रासायनिक कचरे वाला संयंत्र है। यहां प्रत्यक्ष रूप से एक हजार और अप्रत्यक्ष रूप से 500 लोगों को रोजगार मिला है। बैटरी यूनिट में भी 50 फीसदी कर्मचारी महिलाएं हैं।
तीन लाख वर्गफुट क्षेत्रफल के साथ 20 एकड़ में है संयंत्र
होसुर में नया संयंत्र तीन लाख वर्गफुट क्षेत्रफल के साथ 20 एकड़ जमीन में फैला है। इसमें दो यूनिट हैं। एक यूनिट केवल बैटरी उत्पादन के लिए है जिसमें पांच असेम्बली लाइनें हैं। दूसरे यूनिट में ई-स्कूटर बनाने वाली दो असेम्बली लाइनें हैं। कंपनी के दोनों ई-स्कूटर मॉडल क्रमश: एथर 450 प्लस और एथर 450 एक्स में 99% स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि दो साल के भीतर ही ई-स्कूटर की मांग इतनी बढ़ जाएगी कि देश में बिकने वाला हर दूसरा स्कूटर इलेक्ट्रिक स्कूटर होगा। अभी कंपनी इस उत्पादन क्षमता के लगभग 60% हिस्से का ही प्रयोग कर पा रही है लेकिन वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक 100% उत्पादन क्षमता का उपयोग होने लगेगा। निकट भविष्य में मांग में जबर्दस्त बढ़ोतरी के रुझान देखते हुए ही उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती मांग की वजह से कंपनी ने अब तीसरे संयंत्र के बारे में सोचना आरंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की बदौलत यह शून्य जलनिकासी व शून्य रासायनिक कचरे वाला संयंत्र है। यहां प्रत्यक्ष रूप से एक हजार और अप्रत्यक्ष रूप से 500 लोगों को रोजगार मिला है। बैटरी यूनिट में भी 50 फीसदी कर्मचारी महिलाएं हैं।
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तीन लाख वर्गफुट क्षेत्रफल के साथ 20 एकड़ में है संयंत्र
होसुर में नया संयंत्र तीन लाख वर्गफुट क्षेत्रफल के साथ 20 एकड़ जमीन में फैला है। इसमें दो यूनिट हैं। एक यूनिट केवल बैटरी उत्पादन के लिए है जिसमें पांच असेम्बली लाइनें हैं। दूसरे यूनिट में ई-स्कूटर बनाने वाली दो असेम्बली लाइनें हैं। कंपनी के दोनों ई-स्कूटर मॉडल क्रमश: एथर 450 प्लस और एथर 450 एक्स में 99% स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल हो रहा है।
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