राणा कपूर ने मुखौटा कंपनियों से विदेश में बनाई बेनामी संपत्ति, 2200 करोड़ का किया निवेश
- विदेश में कपूर परिवार की चल-अचल संपत्ति का लगाया जा रहा है पता
- परिवार के पास हैं करीब दो दर्जन मुखौटा कंपनियां
- अप्रैल 2018 से जून 2018 के बीच डीएचएफएल में यस बैंक ने किया था 3,700 करोड़ रुपये का निवेश
विस्तार
मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन मामले में गिरफ्तार यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर 11 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। उनसे हुई पूछताछ में कई नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राणा कपूर परिवार के सदस्यों की करीब 25 मुखौटा कंपनियों का पता चला है। इनमें कई कंपनियों पर अप्रत्यक्ष रूप से राणा की पत्नी और बेटियों का वर्चस्व बताया जा रहा है।
बाकी कंपनियों में भी कथित तौर पर उनके परिवार के दूसरे सदस्यों का हस्तक्षेप है। जांच में बहुत जल्द यह भी खुलासा हो सकता है कि मुखौटा कंपनियों में कथित तौर पर किन भारतीय राजनेताओं की हिस्सेदारी है। ईडी जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि विदेश में कपूर परिवार की चल-अचल संपत्ति कहां-कहां पर है। संपत्ति खरीदने के लिए किस मुखौटा कंपनी का इस्तेमाल किया गया है।
यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर को ईडी ने रविवार की सुबह गिरफ्तार किया था। उसके बाद अदालत ने उन्हें 11 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे। जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि कपूर और उनके परिवार के कई सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग कर बैंक को चूना लगाया है। इस मामले में यस बैंक के संस्थापक की पत्नी और तीन बेटियां भी शामिल बताई जा रही हैं।
बैंक के पैसे को इधर-उधर घुमाकर अपने लिए संपत्ति जुटाने की खातिर कपूर परिवार ने अनेक मुखौटा कंपनियों की मदद ली है। मुखौटा कंपनियों की मदद से इस परिवार ने कई देशों में चल-अचल संपत्तियां खरीदी है। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि करीब दो दर्जन मुखौटा कंपनियां, जिनका अप्रत्यक्ष स्वामित्व इसी परिवार के पास रहा है, इनकी मदद से बेनामी संपत्ति एकत्रित की गई है।
यही वजह है कि कपूर की बेटी रोशनी को विदेश जाने से रोक दिया गया है। जांच एजेंसी अब उससे भी पूछताछ करेगी। आरोप है कि कपूर ने अपने परिवार के नियंत्रण वाली विभिन्न मुखौटा कंपनियों के लिए 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत ली थी। इस बाबत आयकर विभाग ने जांच शुरू की है।
ईडी ने कोर्ट को बताया कि 600 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी देने के बाद यस बैंक ने अप्रैल 2018 से जून 2018 के बीच डीएचएफएल में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके बाद यस बैंक ने छोटे से अंतराल में ही डीएचएफएल ग्रुप की एक दूसरी कंपनी को 750 करोड़ रुपये का लोन दे दिया।
मुखौटा कंपनियों का है बड़ा खेल
ईडी ने कपूर के आवास और दफ्तरों पर छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। राणा कपूर की पत्नी बिंदु तथा तीनों बेटियों के आवास एवं प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई है। इस दौरान पता चला है कि राणा परिवार ने मुखौटा कंपनियों की मदद से करीब 2200 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मुखौटा कंपनियां खोलने के लिए परिवार के सदस्यों के अलावा बैंक के कई भरोसेमंद अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। कथित रिश्वत देने या रुपयों की हेराफेरी करने जैसे सभी काम इन्हीं मुखौटा कंपनियां की आड़ में होते थे। कपूर परिवार के पास 44 महंगी पेंटिंग भी मिली हैं। इनमें से कई पेंटिंग तो ऐसी हैं, जिन्हें कथित तौर पर राजनेताओं से खरीदा गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैंक घोटाले में यह बहुत छोटा सा मामला है। जांच में पता चला है कि कई राजनेताओं ने मुखौटा कंपनियां स्थापित कर खूब पैसा कमाया है। आरोप है कि कपूर ने डीएचएफएल के प्रवर्तक कपिल वाधवन के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर यस बैंक को चूना लगाया और डीएचएफएल को वित्तीय सहायता मुहैया करा दी।
यहां पर भी मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इस मदद के बदले राणा परिवार को अनुचित लाभ दिया गया है। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, यह घोटाला अप्रैल और जून 2018 में शुरू हुआ था। उस दौरान यस बैंक ने डीएचएफएल के अल्पकालिक ऋण पत्रों में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
माना जा रहा है कि इसी निवेश के बदले वाधवन ने कथित रूप से राणा परिवार को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का फायदा पहुंचाया। हालांकि यह फायदा डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज के रूप में पैसा देकर हासिल किया गया है।