Cabinet Decision: दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को मंजूरी, देश के हर ब्लॉक में बनाए जाएंगे अनाज गोदाम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगले पांच साल में भंडारण क्षमता बढ़ाकर 2,150 लाख टन की जाएगी। यह क्षमता सहकारी क्षेत्र में बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री ने प्रस्तावित योजना को सहकारी क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा खाद्यान्न भंडारण कार्यक्रम बताया।
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देश में अन्नदाता के उत्पादों को बचाने के लिए ब्लॉक स्तर पर 500 से 2,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जाएंगे। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को मंजूरी दी। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) के गठन और अधिकारिता को भी मंजूरी दी गई है।
पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि देश में 1,450 लाख टन खाद्यान्न भंडारण की क्षमता है। अगले पांच साल में 700 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना है, जिसके बाद कुल अन्न भंडारण की क्षमता 2,150 लाख मीट्रिक टन हो जाएगी। सहकारिता मंत्रालय योजना को देश के विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के कम से कम 10 चयनित जिलों में पायलट परियोजना के रूप में लागू करेगा। योजना को कार्यान्वित करने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी समिति का भी गठन किया जाएगा।
भंडार में रखी फसल पर कर्ज ले सकेंगे किसान
ठाकुर ने बताया कि इन गोदामों के बन जाने के बाद भंडारण सुविधा के अभाव में बर्बाद होने वाले लाखों टन अनाज को बचाया जा सकेगा। किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। वे गोदाम में अपने उत्पाद रखकर उसे अच्छे दाम पर बेच सकेंगे। किसान भंडार में रखी अपनी फसल पर 70 फीसदी कर्ज भी ले सकेंगे।
अभी मात्र 47% भंडारण क्षमता
भारत की मौजूदा अन्न भंडारण क्षमता अभी केवल 47% है। भारत सबसे ज्यादा अन्न उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन भंडारण क्षमता में बहुत पीछे है। अनाज के अन्य बड़े उत्पादक देशों चीन, अमेरिका, ब्राजील, रूस और अर्जेंटीना के पास वार्षिक उत्पादन से अधिक की भंडारण क्षमता है।
रोजगार के अवसर पैदा होंगे
इस योजना में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण, खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का मेल करके इस योजना की नींव रखी गई है। इससे कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और किसान के लिए अधिकतम आय की राह आसान होगी।
योजना का मकसद
- भंडारण सुविधाओं की कमी से अनाज को होने वाले नुकसान से बचाना
- किसानों को संकट के समय अपनी उपज बेतरतीब दाम पर बेचने से रोकना
- आयात पर निर्भरता कम करना
- गांवों में रोजगार के अवसर सृजित करना
खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिक भंडारण क्षमता से किसानों के लिए परिवहन लागत कम होगी। इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। देश में सालाना करीब 3,100 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है। लेकिन मौजूदा क्षमता के तहत गोदामों में कुल उपज का 47 प्रतिशत तक ही रखा जा सकता है।
18 शहरों के कायाकल्प के लिए योजना को मंजूरी
शहरों का कायाकल्प करने के लिए कैबिनेट में सिटी इन्वेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेटेड एंड संस टेन, 2.0 योजना (city investments to innovate integrate and sustain) को मंजूरी दी है। यह योजना चार सालों (2023-2027) के लिए होगी। इसमें 18 शहरों का कायाकल्प शामिल है। इसके लिए 1,866 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शहरों का चयन प्रतियोगिता के आधार पर होगा। इसमें शहरों में एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन, राज्य स्तर पर जलवायु परिवर्तन के सुधार कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत मजबूती के साथ सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। इस योजना के पहले चरण में 12 शहरों में स्कूलों, सार्वजनिक पार्कों और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर समग्रता के साथ विकास कार्यों को अंजाम दिया गया था। इस योजना को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा फ्रांसीसी विकास एजेंसी, यूरोपीय संघ और राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान के साथ मिलकर साकार किया जा रहा है।