रोजगार देने वाले चौथे सबसे बड़े सेक्टर पर क्यों छा रहे हैं मंदी-बेरोजगारी के बादल
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ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा मंदी और बेरोजगारी के बादल छा रहे हैं। रोजगार देने वाले देश के चौथे सबसे सेक्टर में मंदी और बेरोजगारी के बादल छा रहे हैं। देश की तीन दिग्गज कंपनियों के पहली तिमाही के घाटे वाले नतीजे और विभिन्न कंपनियों द्वारा अपने शोरूम को बंद किए जाने से स्थिति कितनी विकट हो चुकी है, इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। हाल ही में ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री ने भी 10 लाख लोगों की नौकरी जाने की ओर इशारा किया था।
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मंदी की शुरुआत
गाड़ियों की बिक्री में कमी होना वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में शुरू हो गया था। पिछले साल फेस्टिव सीजन में भी कंपनियों की उम्मीद थी, कि बिक्री का आंकड़ा बढ़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिसंबर से लेकर के जून तक कंपनियों का स्टॉक पहले की तरह पड़ा हुआ है। हालत यह है कि मांग न होने की वजह से कई कंपनियों ने अपनी फैक्ट्रियों में उत्पादन को बिलकुल बंद कर दिया है। कंपनियों के पास पुराना स्टॉक ही इतना ज्यादा पड़ा हुआ है कि उसको निकालने में अभी काफी समय लगने की उम्मीद है।
जून में 17 फीसदी घटी बिक्री
भारत में ऑटो कंपनियों के संगठन सियाम की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून में यात्री वाहनों की बिक्री 17.54 फीसदी घटकर 2,25,732 यूनिट्स की रही। जबकि पिछले साल जून 2018 में यह आंकड़ा 2,73,748 यूनिट था। अभी जुलाई के ताजा आंकड़े आने बाकी हैं। केवल कार और बाइक ही नहीं बल्कि ट्रक और ट्रैक्टर समेत अन्य कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भी कमी देखने को मिली है। टाटा, महिंद्रा और अशोक लीलैंड जैसी दिग्गज कमर्शियल वाहन कंपनियों की भी बिक्री पर असर पड़ा है।
मारुति नहीं करेगी उत्पादन में बढ़ोतरी
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति ने हाल ही में तिमाही नतीजों को जारी किया था। कंपनी को पहली तिमाही में 1435.50 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। साल दर साल आधार कंपनी को 27 फीसदी का नुकसान हुआ है। कंपनी की नेट बिक्री में 14.1 का नुकसान हुआ है और यह 18,735.20 करोड़ रुपये रह गई है। कंपनी के वाहनों की बिक्री भी 18 फीसदी गिर गई है। अब कंपनी ने फैसला किया है कि वो अपने गुजरात स्थित प्लांट में उत्पादन क्षमता को दोगुना नहीं करेगी।
कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली ऑल्टो और वैगन-आर भी गिरती बिक्री को रोक नहीं पाई। बल्कि खुद इनकी ही बिक्री में कमी दर्ज की जा रही है। मारुति ने ऑल्टो को नए सेफ्टी फीचर्स और बीएस6 इंजन में पेश तो किया लेकिन गाड़ी की कीमत ज्यादा हो गई। जिसके चलते इसकी डिमांड कम होती चली गई। वहीं दूसरे मॉडल्स के साथ भी यही कुछ ऐसा ही हश्र हुआ। कीमत बढ़ने से भी मांग में कमी देखने को मिली है।
टाटा मोटर्स की आय में भी गिरावट
टाटा मोटर्स को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3,679.66 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जोकि पिछले वित्तवर्ष 2018-19 की समान अवधि के मुकाबले दोगुना है। क्योंकि पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को 1,902.37 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
बजाज ऑटो को मुनाफा
बजाज ऑटो को हालांकि मुनाफा हुआ है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एकीकृत आधार पर 1,012.16 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। लेकिन यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के मुनाफे की तुलना में 2.84 फीसदी कम ही रहा है। क्योंकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 1,041.77 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध मुनाफा हुआ था।
इन कंपनियों की बिक्री भी घटी
- मारुति सुजुकी की घरेलू बिक्री 17.2 फीसदी गिरी
- टाटा मोटर्स की पैसेंजर कारों की बिक्री 27 फीसदी गिरी
- ह्यूंदै मोटर इंडिया की बिक्री में 3.2 फीसदी की गिरावट
- टोयोटा की बिक्री 19 फीसदी गिरी
- महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री 9 फीसदी की कमी
गिरती बिक्री पर ह्यूंदै का बयान
ह्यूंदै मोटर इंडिया के सीनियर मैनेजर एंड ग्रुप हेड, मार्केटिंग पुनीत आनंद ने बताया कि गिरती सेल्स के पीछे रेट ऑफ इंटरेस्ट में बढ़ोतरी, फाइनेंशियल चैलेंजेस, मानसून की लेट-लतीफी जैसे कारण हैं, जुलाई का महीना वैसे ही मानसून वाला होता है, जिससे सेल्स पर निगेटिव असर पड़ता है। लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि अगस्त-सितम्बर महीने से बिक्री बढ़ेगी, कंपनी कुछ नए प्रोडक्ट्स को भी मार्किट में उतारेगी। वहीं इस बार हमें बजट से काफी उमीदें है कि सरकार इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगी।
10 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा
ऑटो कंपोनेंट मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ऐक्मा) ने कहा है कि ऑटो सेक्टर में मंदी छाने और उत्पादन ठप होने की वजह से पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों में 10 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा गया है। फिलहाल यह सेक्टर ही देश भर में 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है।
दो हजार करोड़ का नुकसान
देश के ऑटोमोटिव रिटेल सेक्टर को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017-18 में हुंडई मोटर इंडिया के करीब 23 शोरूम, निसान के 38 शो रूम और होंडा, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के करीब 12 शो रूम बंद हो चुके हैं।
क्या कहते हैं ऑटो एक्सपर्ट
एक्सपर्ट्स कहते हैं भारत में डीलर्स का मार्जिन 2.5-5 फीसदी है। मेट्रो सिटी में कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने से भी डीलर्स की परेशानी बढ़ाती है। इतना ही नहीं इंश्योरेंस और फाइनेंस कंपनियों की तरफ से मिलने वाला मार्जिन भी अब कम हो रहा है। देश में जीएसटी लागू होने के बाद से डीलरों को कैश की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। बड़े शहरों में हर दूसरे कार डीलर को व्यापार में घाटे का सामना करना पड़ रहा है जबकि दूरदराज के इलाकों के डीलरों की हालत फिर भी कुछ ठीक है। लेकिन गाड़ियों की बिक्री में लगातार गिरावट के चलते उन्हें भी रिटर्न हासिल करने में अधिक समय लग रहा है।
चीन में भी छाई मंदी
जून के आंकड़ों के मुताबिक चीन में वाहनों की बिक्री में 9.6 फीसदी की गिरावट आई है। चीन में पिछले 12 महीने से गाड़ियों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
20.6 लाख वाहन तक गिरी बिक्री
चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (CAAM) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक गाड़ियों की बिक्री गिर कर 20.6 लाख वाहन तक पहुंच गई है। इस साल अप्रैल में 16.4 फीसदी और मई में 14.6 फीसदी की गिरावट आई थी। माना जा रहा है धीमी आर्थिक विकास दर और अमेरिका से चल रही ट्रेड वार के चलते यह गिरावट आ रही है।