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Green Bond Proposal: क्या है ग्रीन बांड जिसका बजट में रखा गया प्रस्ताव, इसका लक्ष्य क्या है?
Wed, 02 Feb 2022 03:45 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Wed, 02 Feb 2022 03:45 PM IST
सार
Know About Green Bond Proposal: मंगलवार को पेश हुए बजट में जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों को लेकर भी सरकार की चिंता और तत्परता दिखाई दी है। इसके लिए सरकार ने ग्रीन बांड जारी करने का एलान किया। बता दें कि ग्रीन बॉन्ड वे बॉन्ड होते हैं जिनका उपयोग सरकार ऐसी वित्तीय परियोजनाओं में करती है जिसका पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को देश का आम बजट 2022 पेश किया। संभवत: यह पहला बजट है जिसमें जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों को लेकर भी सरकार की चिंता और तत्परता दिखाई दी है। इसके लिए सरकार ने ग्रीन बांड जारी करने का एलान किया, जिनका उपयोग 'हरित बुनियादी ढांचे' के लिए किया जाएगा।
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जलवायु खतरों से निपटने की पहल
बजट भाषण के दौरान सरकार की ओर से जलवायु खतरों से निपटने के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं। इसके लिए सरकार ने ग्रीन बांड जारी करने का फैसला किया है। दरअसल कार्बन तटस्थता की ओर बढ़ने के लिए विश्व स्तर पर एक अवधारणा तेजी से मजबूत होती जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा कि ग्रीन बांड भारतीय अर्थव्यवस्था को पर्यावरण के लिए अनुकूल बनाने की उसी दिशा में एक नींव विकिसत करने वाला कदम है।
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क्या होता है 'ग्रीन बांड'?
ग्रीन बॉन्ड वे बॉन्ड होते हैं जिनका उपयोग सरकार ऐसी वित्तीय परियोजनाओं में करती है जिसका पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ता है। इस तरह के ग्रीन बांड यूरोपिय निवेश बैंक और विश्व बैंक ने 2007 में लॉन्च किए थे। इन बांड का उपयोग से सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसी योजनाओं में मदद करेगी जिससे उसकी कार्बन पर निर्भरता कम हो सकेगी। दरअसल, ग्रीन बॉन्ड एक उभरता हुआ आशाजनक तंत्र है जो ग्रीन परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में मदद करता है। इसके जरिए स्थानीय सरकारें जलवायु परिवर्तन और अन्य पर्यावरणीय रूप से केंद्रित परियोजनाओं को धन दे सकती हैं।
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बांड की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में यह घोषणा की है कि सरकार पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाली योजनाओं को वित्त पोषित करने के लिए ग्रीन बांड जारी करेगी। इन बांड की जिम्मेदारी सरकार खुद उठाएगी। इसलिए उम्मीद है कि लोग इसमें बड़े पैमाने पर निवेश करेंगे। वित्त मंत्री के मुताबिक ग्रीन बांड का उद्देश्य निवेशकों को घरेलू हरित बांड बाजार की ओर आकर्षित करना है और इसमें निजी क्षेत्र के लोगों को भी निवेश के लिए लाना है।
ग्रीन बांड में क्या शामिल है?
सौर फोटोवोल्टिक पैनलों के घरेलू निर्माण में वृद्धि, कोयले से चलने वाल ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास पेलेट का उपयोग, शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन और इलेकट्रिक वाहनों के उच्च उपयोग की ओर बदलाव को बढ़ावा देने और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली परियोजनाओं को वित्त पोषित करने के लिए ग्रीन बांड जारी किया जाएगा। वित्त मंत्री के मुताबिक ये ग्रीन बांड हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निधि देने के लिए जारी किए जाएंगे और आय का उपयोग सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
क्या है इस एलान का लक्ष्य?
माना जा रहा है कि ग्रीन बांड के जरिए देश में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलेगी। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत सरकार ने साल 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसकी घोषणा भारत ने पिछले साल ग्लासगो में हुए कॉप 26 जलवायु सम्मेलन में की थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में भारत की गैर जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाने और अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत पूरा करने का वादा किया था। इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा का है, फिर पवन और पनबिजली है। इसके अलावा भारत साल 2030 तक प्रति जीडीपी उत्सर्जन को 45 प्रतिशत कम करने का इरादा जता चुका है।
जलवायु कार्रवाई पर गंभीरता का संकेत
सीईईडब्ल्यू-सीईएफ के निदेशक गगन सिद्धू के एक बयान के मुताबिक ग्रीन बांड जारी करने के बजट प्रस्ताव के कई लाभ हैं, जिनमें से प्रमुख जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में देश की गंभीरता का संकेत मिलता है। भारत अब उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जिनमें मुख्य रूप से यूरोपीय देश हैं जिन्होंने इस तरह के बांड जारी किए हैं। यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन को लेकर उठाए गए कदमों में आगे रहना चाहता है इसलिए उसने ग्रीन बांड के तेजी से बढ़ते बाजार पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। दुनिया में तो ग्रीन बांड का करीब एक ट्रिलिन डॉलर का वैश्विक बाजार है।