कल पेश होगा आर्थिक सर्वेक्षण, जानिए क्या है इसका महत्व और बजट से इसका संबंध
एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार का तीसरा बजट पेश करेंगी। ये बजट ऐतिहासिक होगा, क्योंकि इस बार ये पेपरलेस होगा। इस बार 29 जनवरी को मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। आइए समझते हैं कि आर्थिक सर्वेक्षण का क्या महत्व है और इसका बजट से क्या संबंध है...
क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले एक साल में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट शामिल होती है, जिसमें अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख चुनौतियों और उनसे निपटने का जिक्र होता है। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में इस दस्तावेज को तैयार किया जाता है।
जब एक बार दस्तावेज तैयार हो जाता है तो उसे वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है। पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश किया गया था। बजट के समय ही इस दस्तावेज को पेश किया जाता है। पिछले कुछ सालों में आर्थिक सर्वेक्षण को दो खंडों में प्रस्तुत किया जाने लगा है।
वॉल्यूम 1 को भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के अनुसंधान और विश्लेषण कर केंद्रित किया गया था। जबकि वॉल्यूम 2 में वित्तीय वर्ष की एक विस्तृत रिपोर्ट को पेश किया गया था, जो अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है।
आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व क्या है?
आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व यही है कि यह देश की आर्थिक स्थिति को दिखाता है। आर्थिक सर्वेक्षण पैसे की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे, कृषि और औद्योगिक उत्पादन, रोजगार, कीमतों, निर्यात, आयात, विदेशी मुद्रा भंडार के साथ-साथ अन्य प्रांसगिक आर्तिक कारकों का विश्लेषण करता है।
यह दस्तावेज सरकार का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो अर्थव्यवस्था की प्रमुख चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है। आर्थिक सर्वेक्षण का डाटा और विश्लेषण आमतौर पर केंद्रीय बजट के लिए एक नीतिगत दृष्टिकोण प्रदान करता है।
आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करना अनिवार्य है?
ऐसा जरूरी नहीं है, सरकार इसके लिए किसी तरह से संवैधानिक तौर पर बाध्य नहीं है। यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि वह दस्तावेज में सूचीबद्ध सुझावों को चुनना या अस्वीकार करना चाहती है या नहीं। इसके अलावा केंद्र सरकार आर्थिक सर्वेक्षण को प्रस्तुत करने के लिए भी बाध्य नहीं है। इसे इसलिए पेश किया जाता है क्योंकि ये महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2021 से क्या उम्मीदें हैं?
कोरोना महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था पर काफी गहरी चोट मारी है। 2020-21 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण से यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि कोविड-19 प्रेरित मंदी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ है। सर्वेक्षण में वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों पर विचार करने और समाधानों की पेशकश करने की अपेक्षा की गई है, जो देश को 5 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगा।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार अर्थव्यवस्था पर महामारी की बारीकी से जांच करेगी। लोगों का मानना है कि आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर बजट तैयार होता है। लेकिन वास्तव में आर्थिक सर्वेक्षण बजट का मुख्य आधार है। इसमें प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार की राय शामिल होती है। ऐसा जरूरी नहीं कि आर्थिक सर्वेक्षण की बातें बजट में हों।